हरियाणा राज्य के बहादुरगढ़ से सतरोहन साझा मंच मोबाइल वाणीं के माध्यम से बता रहे है कि शमिकों के लिए जो सरकार कानून बनाने वाली है उसका फायदा कंपनी वाले अभी से ही श्रमिकों से निकाल रहे है। उनहोंने कहा की अब बहुत से श्रमिक तंग आकर मजबूरी में अपना पीएफ तक नहीं कटवा रहे है क्यूंकि उनका मन्ना है की वेतन कम होने की वजह से यदि कुछ पैसे पीएफ में ही कट गया तो उनके पास कुछ नहीं बचेगा अपना रोजी रोटी चलाने के लिए।
बहादुरगढ़, हरियाणा से साझा मंच मोबाईल वाणी के सम्वाददाता एस एन कश्यप बता रहे हैं कि लॉक डाउन के बाद श्रमिकों को आर्थिक और रोज़गार के मोर्चे पर बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसमें से कई श्रमिकों का पहले पीएफ़ कटता था। लेकिन जब वे अपना पीएफ़ निकालना चाहते हैं, तो उन्हें पीएफ़ ऑफ़िस के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसलिए श्रमिक अपना पीएफ़ कटवाने से डरता है। क्योंकि इसके चक्कर में उनके काम और पैसे दोनों का नुक़सान होता है।
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बहादुरगढ़, हरियाणा से एस एन कश्यप साझा मंच मोबाईल वाणी के माध्यम से एक महिला श्रमिक नेहा से बात कर रहे हैं, जो बता रही हैं कि लॉक डाउन से पहले इन्हें साढ़े नौ हज़ार रुपए वेतन मिलता था और अब नौ हज़ार। इसलिए इन्होंने अपना पीएफ़-ईएसआई कटवाना बंद कर दिया, क्योंकि इतने कम वेतन में घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था।
बहादुरगढ़, हरियाणा से एस एन कश्यप साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि यहाँ के औद्योगिक एरिया के सेक्टर सत्रह में फूटवियर पार्क की एक कम्पनी, जिसमें एक विभाग में काम कर रहे बीस श्रमिकों को अचानक ठेकेदारी में शिफ़्ट कर दिया। जिसपर बहुत सारे श्रमिकों ने काम छोड़ने के लिए कह दिया, जिसपर कम्पनी ने उन्हें अगले महीने आने को कहा।
हरियाणा राज्य के झज्जर ज़िला के से बहादुरगढ़ से अनुभव ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि केंद्र सरकार ने अनलॉक 5 के दिशा निर्देश जारी करते हुए पिछले 6 महीने से बंद पड़े मल्टीप्लेक्स ,सिनेमा हॉल खोलने की अनुमति दे दी। जिसके तहत 15 अक्टूबर से सिनेमा हॉल दर्शकों की कुल संख्या क्षमता से 50% कम रखते हुए खुल सकेंगे। साथ ही इस बारे में अगले कुछ दिनों में सरकार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम (SOP) भी जारी करेगी धन्यवाद आजा मोबाइल वाणी
हरियाणा राज्य के झज्जर ज़िला के बहादुरगढ़ से सतरोहन लाल कश्यप ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि कंपनी श्रमिकों के हिसाब पूरी करने के डर से उन्हें धोखे से कंपनी से निकाल देते है। ऐसा धोखा महिला श्रमिकों के साथ ज़्यादा हो रहा है। अभी के समय में जब रोज़ी रोटी की बहुत समस्या है ,उस वक़्त कम्पनियाँ मज़दूरों के साथ छल कर रही है। कंपनी में काम रहने पर उनसे पूरी तरह काम लिया जाता है परन्तु काम ख़त्म होने पर श्रमिकों के साथ धोखा होता है।
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