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बिहार से रवि,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि देश में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है इसलिए सभी से निवेदन है कि सरकार द्वारा बनाए गए कोरोना गाइडलाइन का पालन अवश्य करे

हमारे श्रोता शुभम ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महाराष्ट्र में सरकार ने वीकेंड लॉक डाउन की घोषणा की है। इससे व्यापारी अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित है। वहीं सीबीएसई दसवीं और बारहवीं की परीक्षा पर विचार कर रहे है। ऑडियो पर क्लिक कर सुनें पूरी ख़बर..

हरियाणा राज्य के झज्जर ज़िला के बहादुरगढ़ से सतरोहन लाल कश्यप ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि अगर लॉक डाउन की स्थिति बनती है तो श्रमिकों पर ज़्यादा प्रभाव पड़ेगा। जिस राज्य में जो प्रवासी श्रमिक रहते है उस राज्य की सरकारें भी उनके विषय में नहीं सोचती है न ही उनकी सहायता के लिए आगे आते है

हरियाणा राज्य के झज्जर ज़िला के बहादुरगढ़ से सतरोहन लाल कश्यप ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि हमारा कर्तव्य है कि कोरोना गाइडलाइन का पालन करे परन्तु जब चुनाव प्रचार के दौरान गाइडलाइन की अवहेलना होते हुए देखते है तो लोगों के मन में कई सवाल उत्पन्न हो जाते है।

हरियाणा राज्य के झज्जर ज़िला के बहादुरगढ़ से रुपाली ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि हरियाणा सरकार के निर्णय अनुसार दिल्ली के अवैध कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं उपलब्ध करवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किया है। ऑडियो पर क्लिक कर सुनें पूरी ख़बर..

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दिल्ली से संवाददाता रफ़ी की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से आया नगर निवासी राम करण से हुई। राम करण बताते हैं कि वे दिल्ली के आया नगर में रहते थे और गुडगांवा में काम करते थे। जब कम्पनी छोटी-छोटी गलती पर काम से निकाल दिया करती थी तो अपने हक़ को पाने के लिए स्वयं आवाज उठाते थे। लेकिन जब कोर्ट में जाते थे तो वहां कोई सुनवाई नहीं होता था। यदि कोई श्रमिक जागरूक होते हैं तो वे किसी वकील से या संस्था से जुड़े व्यक्ति से अपनी समस्या साझा करते हैं और उनकी राय लेते हैं।और जो भी जानकारी उन्हें मिलती है उसके अनुसार ही अपना काम करते हैं लेकिन दूसरी ओर जो श्रमिक जागरूक नहीं होते हैं वे सीधे लेबर कॉर्ड में जा कर अपना समय बरबाद करते हैं। साथ ही जब श्रमिकों को तारीख़ मिलने पर वे कोर्ट जाते हैं तो एक दिन का काम छूट जाता है और दिहाड़ी भी उन्हें नहीं मिल पाता है। कम्पनी को जब यह खबर मिलती है की श्रमिक कोर्ट का चक्क्र लगा रहे हैं तो कम्पनी श्रमिक को काम पर नहीं रखती है। यह सोच कर की ये तो यूनियन का आदमी है। जबकि मजदुर अपने हक़ और इंसाफ को पाने के लिए लेबर कोर्ट का चक्क्र लगाते हैं। वहीँ श्रमिक किसी यूनियन के माध्यम से मुकदमा दर्ज करती है तो उन्हें 5 या 10% खर्चे के रूप में पैसे देने पड़ते हैं और वकील से जुड़ कर करते हैं तो 10% खर्चा लिया जाता है।साथ ही जब श्रमिक साझा मंच की सहायता से कोई कार्य को करती है तो निःशुल्क कार्य हो जाता है। यदि कोर्ट की करवाई आसान करने के लिए ऐसी कोई व्यवस्था को लागु की जाए जहाँ मामले को ऑनलाइन लॉगिन करके सुनवाई की तारीख मिल जाए या आदेश प्राप्त कर ली जाए। साथ ही अदालत की करवाई को ऑनलाइन श्रमिक देख सकें ऐसी सुविधा आ जाए तो श्रमिकों को काफी लाभ मिलेगा उनका समय बचेगा साथ ही उस दिन की मजदूरी भी नहीं कटेगा। क्योंकि कोई भी ऐसी कम्पनी अबतक सामने नहीं आई है जो मजदूरों के हित के लिए सोचे उनकी सहायता करे। यदि मोबाइल वाणी मजदूरों की सहायता और उनकी समस्या को सरल बनाने के लिए कोई एप्प जारी करती है तो उसमे यह सिस्टम अवश्य दिया जाए जैसे मजदूरों को किस तारीख में अदालत पहुंचना है,कोर्ट के क्या आदेश आए हैं उसकी जानकारी आसानी से मिल जाए तो श्रमिकों को बहुत सहूलियत होगी। दूसरी बात जब गाँव में दो पक्षों में बीच किसी बात को लेकर मतभेद हो जाता है तो इस मामले को लेकर सबसे पहले लोग 100 नंबर पर फोन कर अपनी बात रखते हैं। क्योंकि ग्राम पंचयत के मुखिया की बातों को लोग ज्यादा नहीं मानते हैं।

दिल्ली से संवाददाता रफ़ी की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बहादुरगढ़ हरियाणा के निवासी मनोहर लाल कश्यप से हुई। मनोहर लाल कश्यप कि वे उनके पारिवारिक वसीहत में बहन की कोई संतान नहीं होने कारण वसीहत के क़ानूनी हक़दार मनोहर लाल कश्यप ही थे। मनोहर लाल कश्यप के भाई रमेश ने वसीहत पर केस कर दिया। वसीहत प्रीतम पुरान के उत्तरी पश्चमी क्षेत्र में स्थित है। रोहणी कोर्ट में 22 दिसम्बर 2015 को मनोहर लाल कश्यप ने केस फाइल किया। इतने समय हो जाने के बाद भी कोर्ट किसी भी नतीज़े तक नहीं पहुंची।केस की पहली तारिक 3 फरवरी 2016 को मिली थी। अब तक तारिक ही बढ़ रही है। ऐसे मुद्दों को पहले आपस में सुलझाना चाहते हैं। जब बात नहीं बनती तब आदमी क़ानूनी मामलों को समझने के लिए वकील से सलाह लेता है और केस फाइल करता है। वकील भी पहले आपस में मामला सुलझाना चाहता है ,विपक्ष दाल को नोटिस के माध्यम से सुलह करने के लिए कहा जाता है। इन सभी प्रक्रियाओं से हमारे वकील ने मामले को सुलझाने का प्रयास किया। मनोहर लाल कश्यप ने बताया कि कोर्ट में अदालत की कार्यवाही को वकील समझाने की कोशिश करता है। कोर्ट में हुए अदालत की कार्यवाही की पूरी प्रतिक्रिया अंग्रेजी में होता है। यदि इसकी प्रतिलिपि हिंदी में मिले तो केस वाला व्यक्ति किसी और से भी सलाह मशवरा कर सकते हैं और हिंदी में समझने में सहूलियत होगी। तारीख़ मिलने पर उन्हें कोर्ट जाने के लिए एक दिन की छुट्टी लेना पड़ता है। कभी कभी कोर्ट जाना भी बेकार हो जाता है। बहुत समय ऐसा लगता है कि उनका कोर्ट में उपस्थित होना जरुरी नहीं होता । जज जब पुरे मामले को समझने लगते हैं तो हर दो -तीन महीने में जज बदल जाते हैं। जिससे समय की बर्बादी होती है। मनोहर लाल कश्यप ने बताया कि अब तक उनके मुक़दमे के लिए चार जज बदल चुके हैं ,नए जज के आने पर वे मामला समझे में 2 -3 तारीख दे देते हैं। ऐसी व्यवस्था की जाये जिससे मुक़दमे ऑनलाइन तकनिकी से जोड़ा जाये और जिससे जानकारी ली जा सके ,आदेश प्राप्त किया जा सके साथ ही अदालत की कार्यवाही को ऑनलाइन भी देखा जा सके या मुकदमा देख में समस्या हो तो मुकदमा सुन सके। जिससे समय की बचत हो सके और कारोबार को भी कोई नुक्सान ना हो। लेकिन जज को फ़ोन में कभी कभी चीज़ों को समझने में ग़लतफ़हमी हो सकती है और मुकदमा हार भी सकते हैं। इसलिए ऐसा एप बनाया जाये जिसमे मुकदमा का दिन भर का व्यौरा उनतक पहुंच जाये।साथ ही ऐसी ब्यवस्था भी की जाये जिससे यहाँ मुकदमा करने के समय ही पता चल उसके कि इस मुकदमे में उनका कितना खर्च होगा और मुकदमा जितमे के कितने प्रतिशत चांसेज़ है ,तो बहुत अच्छा होगा

दिल्ली के श्री राम नगर कॉलोनी से हस्मत अली ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से दिल्ली के श्री राम कॉलोनी खजुरी खास के निवासी मज़हर अली से उनके कोर्ट में चल रहे केस के मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। जहाँ उन्होंने बताया कि कोर्ट में वकील व जज एक पक्ष को ही ज्यादा अहमियत देते हैं।और पूरी तरह से वकील पर निर्भर हो जाते हैं। यदि लोगों के पास पैसे है तो वे जज के पास तक अपनी पहुंच बना कर अपना काम आसानी से करवा सकते हैं। साथ जब मज़हर अली और उनके पुरे परिवार जेल में बंद थे तो अकेले वकील पुरे मामले को समझ कर जज के पास पेश किये और साडी बातो को समझा कर मज़हर अली को जीत दिलाई। इस पुरे केस में वकील ने दो लाख रूपए लिए थे।यदि कोर्ट की प्रक्रिया को ऑनलाईन कर दिया जाये तो इससे सभी का समय बचेगा।साथ ही घर बैठे अदालत की सारी कार्यवाई को फोन पर ही सुनने को मिल जाएगा तो बहुत अच्छा होगा। लोगों का पैसा बच जाएगा, समय बच जाएगा। क्योंकि सुनवाई की तारीख छूट ना जाये इसलिए लोग अपना काम -काज छोड़ कर कोर्ट जाते हैं। जिसके कारण इसका बुरा प्रभाव उनके काम पर भी पड़ता है। वहीँ दूसरी ओर जब दो पक्षों के बीच कोई मतभेद हो जाता है तो लोग सबसे पहले पुलिस,मुखिया या सरपंच के पास ना जा कर गाँव के दबंग व्यक्ति के पास जाना बेहतर समझते हैं। अगर आईवीआर द्वारा अदालती कार्यवाही को सुनने का विकल्प मिले तो इसे भी सुनना पसंद करेंगे। अगर अदालत द्वारा ऐसी सुविधा उपलब्ध हो जिसमे केस दाख़िल करने से जुड़े सारे खर्च और केस जीतने के अनुमान बता दें तो इससे श्रमिकों को बहुत फ़ायदा है वो अपने परिवार का सारा ख़र्च व्यवस्थित कर पाएँगे।



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