दिल्ली एनसीआर के मानेसर से रवि कुमार ,श्रमिक वाणी के माध्यम से बताते है कि कंपनी में श्रमिकों के साथ घटना होती रहती है। यशोदा कंपनी में श्रमिकों को चोट लगते रहती है। एचआर को कंपनी में सुरक्षा को लेकर ध्यान देना चाहिए। सेंसर लगाने का प्रयास करना चाहिए ताकि श्रमिक सुरक्षित रहे

ब्रिटेन में साल की शुरुआत रेल कर्मचारियों की हड़ताल हुई थी। लेकिन जैसे जैसे मंदी बढ़ रही है, हड़तालें भीं बढ़ गई हैं।रेल सेवाओं और रॉयल मेल डिलीवरी से लेकर NHS नर्सों, एंबुलेंस चालकों और शिक्षकों तक सब ने हड़ताल पर जाने की योजना बनायी है।बढ़ती महंगाई के बीच वेतन वृद्धि और काम करने की स्थिति में सुधार की मांग को लेकर पिछले साल दिसम्बर में कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर हड़तालें आयोजित की थीं। अब जानते हैं काम करने की समय अवधि किस प्रकार से  कामकाजी लोगों के जीवन पर असर डालती है .. आईएलओ की रिपोर्ट के अनुसार कामकाजी लोगों के लिए कम काम के घंटे और अधिक फ्लेक्स वर्क बेहतर कार्य-जीवन संतुलन को बढ़ावा दे सकते हैं।अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने वर्किंग टाइम एंड वर्क-लाइफ बैलेंस अराउंड द वर्ल्ड (Working time and Work-life Balance around the World) शीर्षक से 171 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की है।यह रिपोर्ट एक ऐसी पृष्ठभूमि में आई है जब ILO के सर्वेक्षण के अनुसार, समस्त श्रमिकों में एक तिहाई से अधिक नियमित रूप से प्रति सप्ताह 48 घंटे  या प्रतिदिन 8 घंटे से अधिक से अधिक काम कर रहे हैं, जबकि वैश्विक कार्यबल का पाँचवे हिस्से को प्रति सप्ताह 35 घंटे से कम समय अनिश्चित रूप से  काम करना होता है।

दिल्ली के मानेसर से रफ़ी ने श्रमिक वाणी के माध्यम से अतुल से बातचीत किया। बातचीत के दौरान अतुल ने बताया की फैक्ट्री में काम करते वक़्त मशीन में फस कर उनकी ऊँगली कट गयी है। ऊँगली कटने के बाद कंपनी के द्वारा इनका इलाज करवाया गया और इलाज के पैसे भी कंपनी ने दिया है। अतुल का कहना है की ईएसआई कार्ड बनवाने के लिए इन्होने ठेकेदार से कई बार कहा था, लेकिन ठेकेदार के द्वारा बार बार बात को टाल दिया जा रहा है

दिल्ली एनसीआर के ाआईएमटी मानेसर से रवि श्रमिक वाणी के माध्यम से एक मज़दूर महिला से बात कर रहें हैं। नेहा सिंदे का कहना है की लेबर चौक में यदि सॉ लोग काम की तलाश में आते हैं तो दो या तीन लोग को ही काम मिलता है। तथा कई बार तो लोग गाड़ियों पर मज़दूरों को दूर दूर ले जाते हैं और आधे दिन में ही बिना पइसे दिए वापस कर देते हैं ऐसे में मज़दूर को पैदल ही लेबर चौक तक वापस आना पड़ता है

दिल्ली एनसीआर के मानेसर से मनीष कुमार पांडेय श्रमिक वाणी के माध्यम से कह रहें हैं कि, इन्होने के लिए कैसी करवाया था जो की हो चूका है लेकिन पीएफ में पिता का नाम गलत होने के कारण पीएफ से पैसे नहीं निकल रहा है। जबकि इन्होने काफी बार ऑफिस में जा कर आवेदन जमा किया है। तो ये लोगों से मदद चाहते हैं यदि किसी को जानकारी हो की इनकी समस्या कैसे दूर हो सकती है तो श्रमिक वाणी के माध्यम से जानकारी दें

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2023 आईटी कर्मचारियों के लिए मंदी का भयानक दौर लेकर आया है। जनवरी के पहले कुछ हफ्तों में ही 101 कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर 25,436 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। ज्ञात हो कि 2023 की शुरुआत में ही ई- कॉमर्स की प्रमुख कंपनी अमेज़ॅन ने लगभग 18,000 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। जिसमें से भारत में लगभग 1,000 कर्मचारियों की छंटनी की गई है। यह अमेज़न की सबसे बड़ी छंटनी है। वहीं 2022 में दुनिया भर में लगभग 1,024 टेक कंपनियों, जिनमें बड़ी टेक फर्म और स्टार्टअप ने 1,54,336 कर्मचारियों की छंटनी की, जो तकनीकी के क्षेत्र में इस एक दशक की सबसे ज्यादा छंटनियों को दर्शाता है। पिछले साल हुई छंटनियों की संख्या पुराने सभी रिकॉर्डों को पार कर गई है। अब रुख करते हैं फ्रांस की और जहाँ "नई रिटायरमेंट व पेंशन योजना के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन" फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पेंशन सुधार नई योजना के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। नई पेंशन योजना के विरोध में पेरिस समेत शहरों में प्रदर्शन हुए। फ्रांस की सरकार ने 2030 तक रिटायरमेंट की आयु 62 से बढ़ाकर 64 करने की घोषणा की है। नई योजना के तहत पूर्ण पेंशन पाने के लिए न्यूनतम आयु को धीरे-धीरे हर साल तीन महीने बढ़ाने का प्रावधान है। साल 2030 तक रिटायरमेंट की आयु 64 तक बढ़ाने के लक्ष्य के साथ इस योजना की शुरुआत 2023 से हो रही है। प्रधानमंत्री एलिजाबेथ बोर्न द्वारा इस महीने की शुरुआत में उल्लिखित नई पेंशन योजना के प्रस्तावों के तहत 2027 से लोगों को पूरी पेंशन लेने के लिए कुल 43 साल काम करना होगा। अभी तक ये न्यूनतम सेवा काल 42 साल था। इसके विरोध में पूरे फ्रांस में जोरदार प्रदर्शन हुए।

हरियाणा राज्य के झज्जर ज़िला के बहादुरगढ़ से एस एन कश्यप ,श्रमिक वाणी के माध्यम से कहते है कि कंपनियों में जो टारगेट रहता है ,वो कंपनी पूरा कर लेती है लेकिन इस बीच श्रमिक बेरोज़गार होते जा रहे है। पीस रेट का प्रचलन में श्रमिकों को महीनें में 15 दिन ही काम मिल पाता है। बाकि दिन वो घर बैठे रहते है। ऐसे में श्रमिकों को जीविकोपार्जन करने में समस्या हो रही है

उत्तरप्रदेश राज्य से भगवतश्रम यादव ,श्रमिक वाणी के माध्यम से कहते है कि वो एक कंपनी में काम करते थे जहाँ उन्हें वेतन नहीं दे रहे है। उसके लिए ये क्या करें ?

दिल्ली एनसीआर के मानेसर से मनीष कुमार की बातचीत श्रमिक वाणी के माध्यम से प्रभाकर से हुई। प्रभाकर बताते है कि आईएमटी मानेसर में काम की स्थिति बहुत ख़राब है। अभी महँगाई भी बढ़ी हुई है। स्थिति बहुत ख़राब है। लेबर चौक जाते है तो कभी 400 तो कभी 300 रूपए दिहाड़ी मिलती है। कई कम्पनियाँ बंद हो गई है। ठेकेदार के माध्यम से काम भी करेंगे तो 7000 तो कभी 8000 रूपए वेतन देने की बात करते है