दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत श्रमिक वाणी के माध्यम से सत्यम से हुई। सत्यम कहते है कि वो कंपनी का पानी पीते है जो रूम के पानी से बिलकुल अलग है। रूम में ज़्यादा पानी इस्तेमाल नहीं होता ,टंकी में ज़्यादा दिनों तक पानी भरे रहता है। एक बार मोटर चला दिया और पानी स्टोर कर के रख दिया गया ,जिसके 1200 तक बिल ले ही लिया जाता है। और इस पानी का इस्तेमाल करने से लोगों में कमज़ोरी भी बढ़ रही है। पानी टंकी की सफ़ाई भी नहीं होती है। सातवीं मंज़िल में कई टंकियाँ रहती है जिसे साफ़ करने कोई नहीं जाएगा। मालिक भी ध्यान नहीं देते है। गंदे पानी से लोगों को खुजली की समस्या होती है व बाल झड़ते है। शुद्ध पानी के इस्तेमाल से शरीर में ऊर्जा रहती है। पानी की ऐसी समस्या का ज़िम्मेदार आम जनता ही है जो पानी का दुरूपयोग अधिक कर रहे है। पानी का बोतल अब 15 रूपए में मिल रही है जिससे नुकसान आम लोगों को ही हो रहा है। अगर आज हम पानी का बचत करेंगे तब ही आने वाली पीढ़ी के लिए पानी ठहरेगी। ज़रुरत अनुसार ही पानी का इस्तेमाल करें ,जल है तो जीवन है। दूषित जल का जाँच के लिए भी कोई कर्मचारी नहीं आते है। ग्रामीण क्षेत्र में प्रखंड के तरफ से दवाई मिलती थी जिसको कुआँ ,नालों में डाला जाता था पर शहर में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिलता है। गन्दगी है तो गन्दगी ही भरी रहती है
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत श्रमिक वाणी के माध्यम से राम से हुई। राम बताते है कि इस दौर में महँगाई से लोग ज़्यादा परेशान है। महँगाई बहुत अधिक है और वेतन काफ़ी कम। कहीं भी जाए ख़र्चा से ज़्यादा महँगाई ही है ,जो कमाते है वो ख़र्च हो जाता है। स्वास्थ्य को लेकर देखभाल नहीं कर पा रहे है केवल दिनचर्या का ख़र्चा निकाल पा रहे है। ऐसे हालात में बच्चों का गुज़र बसर करना मुश्किल है। श्रमिकों का सबसे बड़ा दुश्मन महँगाई है। रूम रेंट भी बहुत ज़्यादा है ,कम सैलरी में महँगाई के दौर में गुज़ारा करना मुश्किल है। सैलरी भी बहुत कम है ,ओवरटाइम भी ख़त्म हो चुकी है ,अगर ओवरटाइम चलता तो श्रमिक के लिए घर चलाना आसान होता। पलायन करने वाले श्रमिकों को बहुत समस्या होती है। अभी के दौर में 17 हज़ार कम से कम सैलरी होनी चाहिए ताकि बच्चों का अच्छे से भरण पोषण होने पाए
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत श्रमिक वाणी के माध्यम से श्रमिक राधेश्याम से हुई। राधेश्याम का कहना है कि पीस रेट पर अच्छी कमाई नहीं हो पा रही है। महँगाई बढ़ गया है पर सैलरी उतनी की उतनी ही है। महीना 12 घंटे का 12 हज़ार कमा रहे है ,महँगाई के दौर पर इतने में गुज़ारा करना मुश्किल है। पीस रेट का काम करने में भी दिहाड़ी के 300 रूपए निकालना मुश्किल हो जा रहा है। क़र्ज़ भी बढ़ जा रहा है। पति पत्नी मिल कर काम कर रहे है तब ही ख़र्चा निकल रहा है। पत्नी को 7 हज़ार रूपए सैलरी मिलती है जिससे महीना का खर्च निकालना मुश्किल है
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत श्रमिक वाणी के माध्यम से एक श्रमिक से हुई। ये बताते है कि चार साल से कंपनी में काम कर रहे है ,तब से पीएफ कट रहा है। पैन कार्ड में पिता का नाम गलत था ,जिसमें अब सुधार हो गया है। लेकिन पीएफ में पेंडिंग है। जिस कारण पीएफ निकलवाने में समस्या हो रही है। जब भी कंपनी जाते है तो कोरोना का बहाना के कारण उनकी मुलाकात साहब से नहीं हो पाई। भागदौड़ करते हुए क़रीब एक साल हो गया है। पीएफ का कोई कार्य नहीं हो पाया है। ऑनलाइन करवाने पर भी कोई काम नहीं हो पा रहा है। जब कंपनी ज्वाइन किये थे तभी से ही कागज़ात में गड़बड़ी हुई थी।
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत श्रमिक वाणी के माध्यम से श्रमिक संजय से हुई। संजय कहते है कि जितना मेहनत करते है उस अनुसार मेहनताना नहीं मिलता है। इस कारण परिवार चलाने में बहुत समस्या आती है। सरकार बढ़ाएगी तो राहत मिलेगी। महँगाई बढ़ रहा है पर वेतन नहीं बढ़ रहा है।साल भर से रह रहे है और किसी तरह क़र्ज़ ले कर काम चला रहे है। इस समस्या के बीच स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पाते है। रूम रेंट ,साग सब्ज़ी ,बिजली बिल आदि के लिए पैसा नहीं हो पाता है ,इस बीच पौष्टिक आहार के लिए पैसे जुटा पाना मुश्किल है।
गुरुग्राम से नंदकिशोर श्रमिक वाणी के माध्यम से एक मज़दूर साथी से बात कर रहें हैं, इनका कहना है की महंगाई से परेशान हैं लोग। लोगों का वेतन कम है और सामानों की क़ीमत ज़ियादा। तथा शहरों में तो लोग आवाज़ उठाने के लिए हैं, लेकिन गांव में देखने वाला कोई नहीं है। दिल्ली सरकार ने पानी मुफ्त दिया है लेकिन वो तो मकान मालिकों को सुविधा मिलती है किरायेदारों को कोई सुविधा नहीं दी जाती है। उन्हें तो वेतन भी कम मिलती है उसी में घर का किराया बिजली का बिल तथा अन्य ज़रूरतों को पूरा करना पड़ता है महंगाई से सबसे ज़ियादा परेशान मज़दूर वर्ग है.
दिल्ली से शाहनवाज़ श्रमिक वाणी के माध्यम से जानकारी दे रहें हैं, पूर्वी दिल्ली नगर निगम शाहदरा जोन श्री राम कॉलोनी वार्ड नंबर 64 ई बी ब्लॉक प्राइमरी स्कूल के गेट पर पुलिया टूटा हुआ होने की वजह से नाले का पानी रोड पर फैल रहा है. तथा स्कूल का एक ही गेट होने के वजह से छात्रों को आने जाने में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है. तथा इस तरफ आला अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है की स्कूल आने जाने वाले बच्चे किस समस्या से दोचार हो रहें हैं.
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक विजय कुमार से हुई।विजय कुमार कहते है कि उनके क्षेत्र में पहले मीठा पानी आता था ,पर अब नहीं आता है और इसी खारा पानी का भी पैसा लगता है। खारा पानी का इस्तेमाल करने के बाल ख़राब हो रहे है ,शरीर में खुजली की समस्या आ जाती है। बोरिंग से खारा जल आता है ,जिसे मकान मालिक द्वारा सफ़ाई नहीं करवाई जाती है। पानी को लेकर आशा कार्यकर्त्ता द्वारा जागरूकता भी नहीं बढ़ाई जाती है। महीना में कुल मिला कर पानी में 1000 रूपए ख़र्च बैठता है। अगर आगे भी पानी की ऐसे ही समस्या बनी रहे तो पानी पर लगभग 2000 रूपए ख़र्च हो जाएगा। भूजल बहुत नीचे चला गया है इसीलिए खारा पानी आ रहा है। इसलिए जल बचाना बहुत ज़रूरी है ,कंपनियों में जिस तरह से जल का अधिक उपयोग होता है उसे कम करना ज़रूरी है। वर्षा जल का संचयन करना बहुत ज़रूरी है। दूषित जल के सेवन से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है। नहाने से जब शरीर में तकलीफ होती है तो यह जच्चा और बच्चा के लिए बहुत हानिकारक है
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक राजु कुमार से हुई। राजु कुमार कहते है कि उनके क्षेत्र में खारा पानी आता है जिसका 100 रूपए यूनिट पैसा लिया जाता है। बाहर से 10 रूपए का बोतल लेकर पानी पीते है। टंकी की सफ़ाई नहीं होती है ,मिट्टी जैसा पानी आता है जिससे नहाने ,बर्तन धोने आदि का काम करते है। खारा पानी का इस्तेमाल मज़बूरन करते है। कुछ सालों से ही पानी ख़राब आ रहा है। पानी के लिए एक व्यक्ति का 100 रूपए लिया जाता है ,लगभग 500 रूपए महीना का ख़र्च हो जाता है।पानी बहुत ज़रूरी है। पानी जागरूकता के लिए आशा कार्यकर्त्ता भी नहीं आती है। प्रशासन द्वारा पानी जाँच के लिए भी कोई कर्मचारी नहीं आते है। अगर ऐसा खारा पानी का इस्तेमाल गर्भवती महिला करेंगी तो जच्चा और बच्चा दोनों को नुकसान होगा। घर में अगर किसी का तबियत ख़राब होती है ,तो चिकित्सकों द्वारा भी स्वच्छ पानी , उबला हुआ पानी का सेवन करने को कहा जाता है। जल का संचयन करना ज़रूरी है ,एक दो व्यक्ति का सोच रहने से जल संरक्षण का कार्य नहीं हो पाएगा
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कारपेंटर बुन्देल ठाकुर से हुई। बुन्देल ठाकुर कहते है कि वो जहाँ रहते है ,वहाँ का पानी पीने योग्य नहीं रहता है ,पानी खारा आता है। जिसका इस्तेमाल केवल नहाने ,धोने में किया जाता है। पानी बाहर से ख़रीद कर पीते है। लेकिन उन्हें इस खारा पानी का भी दो यूनिट के हिसाब से पैसे देने पड़ते है। पानी का लगभग महीना में 600 से 700 रूपए ख़र्च हो जा रहे है। उनके यहाँ जो टंकी से पानी आता है ,उसका सफ़ाई दो महीने में किया जाता है ,अगर जाम लगता है पाइप में तब ही सफ़ाई होती है। आशा कार्यकर्त्ता द्वारा पानी को लेकर कोई जागरूकता अभियान नहीं चलाया जाता है। पानी का अधिक दोहन ,वर्षा कम होना ,ये सब घटते जल का कारण है। इसलिए वर्षा जल संचयन बहुत ज़रूरी है। खारा जल आ रहा है ,जल की बहुत किल्लत है। चिकित्सकों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं ,बच्चों आदि लोगों को स्वच्छ जल का सेवन करना चाहिए। अगर ऐसे जल का सेवन किया जाएगा तो उनके लिए बहुत समस्या है
