दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर ,श्रमिक वाणी के माध्यम से बताते है कि श्रमिक अमरजीत जो 24 वर्ष के है और सेल्समेन का काम करते है ,उनके अनुसार उन्होंने कोविशील्ड के दोनों टीका लगवा चुके है। टीका लगवाने के बाडी हल्का बुखार आया लेकिन दवा लेने के बाद वो ठीक हो गया। कोरोना से सुरक्षा के लिए टीका एक अच्छा विकल्प है इसलिए समय रहते ही उन्होंने टीका लगवा लिए। अगर टीका नहीं लगवाते तो स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहते है। कोरोना के गंभीर प्रभाव से बचने के लिए टीका लगवाना ज़रूरी है

दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम से नन्द किशोर ,श्रमिक वाणी के माध्यम से बताते है कि इनकी बात ओम प्रकाश से हुई ,उन्होंने कोरोना टीका का दोनों खुराक लगवाया है। कंपनी में श्रमिकों पर दबाव था की वो कोरोना का टीका लगवाए। कंपनी से एक दिन की छुट्टी भी दी गई थी ताकि कोरोना का डोज़ श्रमिक ले सके।

दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम से नन्द किशोर ,श्रमिक वाणी के माध्यम से बताते है कि इनकी बात तुलसी दास से हुई ,जिनकी उम्र 49 वर्ष है ,उन्होंने कोरोना टीका का दोनों खुराक लगवाया है। कोरोना से सुरक्षित रहे इसलिए टीका के दोनों डोज़ लगवाए है। खुद को परिवार को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए टीका लिए है

दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत श्रमिक वाणी के माध्यम से धर्मेंद्र से हुई। धर्मेंद्र बताते है कि उन्होंने जब कोरोना कोविशिलड का पहला टीका लगवाया था तब उन्हें दूसरे दिन से कुछ दिनों तक बहुत नींद आयी थी। उन्होंने टीका कोरोना से बचने के लिए लगाया था

मिस्त्री से बातचीत

राज मिस्त्री से बातचीत

दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत श्रमिक वाणी के माध्यम से राजमिस्त्री से हुई। ये बताते है कि पांच सालों से राज मिस्त्री का काम कर रहे है। पहले ग्राम में 400 रूपए मिलता था अब शहर में 600 रूपए दिहाड़ी मिलती है। गाँव में काम कर सकते है लेकिन काम प्रतिदिन नहीं मिलती है। जहाँ काम करने जाते है तो कार्यक्षेत्र में सुरक्षा का पूरा प्रबंध रहता है। हेलमेट ,जूता ,सेफ्टी बेल्ट आदि मिलता है। फर्स्ट ऐड की सुविधा है।चोटिल होने पर मालिक इलाज करवाते है। ये ठेकेदार द्वारा दिहाड़ी पर काम कर रहे है। महीना में इन्हे वेतन मिलता है। कभी वेतन को लेकर समस्या नहीं हुई।अगर बीच में पैसे की ज़रुरत पड़ती है तो ठेकेदार सप्ताह में 2000 रूपए दे देते है। इन्हे 30 दिन काम मिलता है। काम की कोई समस्या नहीं है।

दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत श्रमिक वाणी के माध्यम से श्रमिक लाल बाबू बैठा से हुई। लाल बाबू बैठा प्रेस का काम करते है ,यह कार्य दिहाड़ी पर करते है। ठेके में काम करते है जिसके 450 से 500 रूपए तक दिहाड़ी मिलता है। अभी एक्सपोर्ट कंपनी का काम कम चल रहा है। दिहाड़ी में अगर फिक्स हो गए तो परमानेंट काम चलता है। अगर तो काम प्रतिदिन मिल रहा है। अगर जिस दिन ठेकेदार के माध्यम से काम नहीं मिले तो उस दिन की दिहाड़ी नहीं मिलती है। 5 से 10 दिन ही फिक्स मान कर चलते है,तो मिल जाता है दिहाड़ी। जिस दिन काम ज़्यादा होता है तो ओवरटाइम मिलता है। ठेकेदार के माध्यम से खाने पीने के लिए 50 रूपए मिलते है

दिल्ली से रामकरण ने श्रमिक वाणी के माध्यम से बताया कि गुरुग्राम हरयाणा स्थित इन्फो सिटी कंपनी के द्वारा मजदूर को दिसंबर माह का पैसा नहीं दिया जा रहा है। मैनेजर सुपरवाइजर के द्वारा भी कोई सहायता नहीं की जा रही है।

दिल्ली, गुरुग्राम के उद्योगविहार से नन्द किशोर श्रमिक वाणी के माध्यम से एक राजमिस्त्री से बात कर रहें हैं. इनका नाम गौतम है और ये कह रहें हैं की लेबर चौक से ये काम करते हैं. तथा कंपनी तथा घरों में काम करने से पैसे बराबर मिल जाते हैं लेकिन यदि ठेकेदार के साथ काम करें तो ठेकेदार पैसा फंसा देता है अगर बात सुरक्षा की करें तो यदि किसी के पास बेल्ट आदि हो तो दे देता है वर्ण मज़दूर बिना सुरक्षा के ही काम करता है. साथ ही ये कह रहें हैं की राजमिस्त्री का काम बारिश के मौसम में बंद हो जाता है तो ऐसे में ये अपने घर चले जाते हैं.