दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत श्रमिक वाणी के माध्यम से श्रमिक लाल बाबू बैठा से हुई। लाल बाबू बैठा प्रेस का काम करते है ,यह कार्य दिहाड़ी पर करते है। ठेके में काम करते है जिसके 450 से 500 रूपए तक दिहाड़ी मिलता है। अभी एक्सपोर्ट कंपनी का काम कम चल रहा है। दिहाड़ी में अगर फिक्स हो गए तो परमानेंट काम चलता है। अगर तो काम प्रतिदिन मिल रहा है। अगर जिस दिन ठेकेदार के माध्यम से काम नहीं मिले तो उस दिन की दिहाड़ी नहीं मिलती है। 5 से 10 दिन ही फिक्स मान कर चलते है,तो मिल जाता है दिहाड़ी। जिस दिन काम ज़्यादा होता है तो ओवरटाइम मिलता है। ठेकेदार के माध्यम से खाने पीने के लिए 50 रूपए मिलते है