दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक विजय कुमार से हुई।विजय कुमार कहते है कि उनके क्षेत्र में पहले मीठा पानी आता था ,पर अब नहीं आता है और इसी खारा पानी का भी पैसा लगता है। खारा पानी का इस्तेमाल करने के बाल ख़राब हो रहे है ,शरीर में खुजली की समस्या आ जाती है। बोरिंग से खारा जल आता है ,जिसे मकान मालिक द्वारा सफ़ाई नहीं करवाई जाती है। पानी को लेकर आशा कार्यकर्त्ता द्वारा जागरूकता भी नहीं बढ़ाई जाती है। महीना में कुल मिला कर पानी में 1000 रूपए ख़र्च बैठता है। अगर आगे भी पानी की ऐसे ही समस्या बनी रहे तो पानी पर लगभग 2000 रूपए ख़र्च हो जाएगा। भूजल बहुत नीचे चला गया है इसीलिए खारा पानी आ रहा है। इसलिए जल बचाना बहुत ज़रूरी है ,कंपनियों में जिस तरह से जल का अधिक उपयोग होता है उसे कम करना ज़रूरी है। वर्षा जल का संचयन करना बहुत ज़रूरी है। दूषित जल के सेवन से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है। नहाने से जब शरीर में तकलीफ होती है तो यह जच्चा और बच्चा के लिए बहुत हानिकारक है
