सरकार द्वारा पशुपालकों को प्रोत्साहित कर पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए मनरेगा योजना के तहत बनने वाले पशु शेड का लाभ प्रखंड के पशुपालकों को नही मिल कर गैर पशुपालकों को मिल गया। इस योजना से केवल वैसे ही लोग लाभान्वित हुए है। जिनका पशुपालन से कोई सरोकार नहीं है। जिसके कारण सरकार की यह महत्त्वाकांक्षी योजना चिरैया में लूट योजना बन कर रह गई है। निर्मित शेड का उपयोग जलावन अथवा घर के कबाड़ को रखने के रूप में किया जा रहा है। जबकि इसका उपयोग ठंड, गर्मी, बरसात आदि से पशुओं का बचाव करने के लिए होना था। कई जगहों पर यह शेड ऐसे ही बेकार पड़ा है। सरकारी नियमानुसार दो कैटेगरी के शेड का निर्माण किया गया है। दो नाद वाली छोटी शेड के निर्माण पर करीब एक लाख तीस हजार रुपये तथा दो से अधिक नाद वाली बड़ी शेड के निर्माण पर करीब एक लाख अस्सी हजार रुपये खर्च किए गए हैं। प्रखंड के सभी 23 पंचायतों में करीब एक हजार पशु शेड का निर्माण किया गया है। जिस पर करीब साढ़े पन्द्रह करोड़ रुपये खर्च हुए है। इधर पीओ ज्योति कुमार ने बताया कि पशु शेड का निर्माण किया गया है। निर्माण के बाद भी यदि कोई व्यक्ति पशु पालन नहीं करें तो यह उसकी कमजोरी है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जायेगी।
बिहार में मौसम की मार के बावजूद खाद्यान्नों की अच्छी पैदावार की उम्मीद है। अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की ओर से जारी तीसरी पूर्वानुमान रिपोर्ट में वर्ष 2022-23 के दौरान फसलों का उत्पादन पिछले वर्ष के बराबर पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार खाद्यान्न का उत्पादन 180 लाख मीट्रिक टन के करीब होगा। पिछले वर्ष यानी वर्ष 2021-22 में कुल खाद्यान्न का उत्पादन 184 लाख मीट्रिक टन था। अंतिम रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। कृषि विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अंतिम रिपोर्ट आने पर उत्पादन का आंकड़ा और बढ़ेगा। सांख्यिकी निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार 22 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती हुई। इसमें करीब 64 लाख मीट्रिक टन पैदावार हुई। गेहूं की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 29 क्विंटल रहने का अनुमान है। हालांकि, अभी गेहूं की फसल कटनी की रिपोर्ट आनी बाकी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट में इसे शामिल किया जाएगा। विशेषज्ञों का दावा है कि जलवायु अनुकूल खेती और उन्नत तकनीक के साथ किसानों की मेहनत रंग लायी। वहीं, धान की खेती 29 लाख हेक्टेयर में हुई। इससे करीब 77 लाख मीट्रिक टन पैदावार होने की उम्मीद है। धान की उत्पादकता 26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है। मक्का 56 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और दलहन में मसूर की पैदावार आठ क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहने की उम्मीद है। रबी और खरीफ दोनों पर पड़ी थी मौसम की मार इस वर्ष खरीफ और रबी दोनों फसलों पर मौसम की मार पड़ी। खरीफ मौसम में राज्य के दस जिले ज्यादा प्रभावित रहे। रबी मौसम में भी आंधी-बारिश के साथ ओलावृष्टि के चलते सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, रोहतास और मुजफ्फरपुर सहित छह जिलों में फसलों की बर्बादी हुई थी। दो माह पूर्व मार्च में आई आंधी-बारिश से लगभग 54,000 हेक्टेयर में खड़ी फसलों के नुकसान पहुंचा था। बावजूद इसके जलवायु अनुकूल खेती और तकनीकी का उपयोग के साथ किसानों की मेहनत रंग लाई। खाद्यान्न का उत्पादन पिछले साल के बराबर पहुंच गया है। तीसरी पूर्वानुमान रिपोर्ट को देखें तो फसलें प्रभवित नहीं होती तो रिकॉर्ड उत्पादन होता। अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की ओर से कृषि वर्ष के तहत पहली जुलाई से 30 जून तक आंकड़ा संग्रह किया जाता है। प्रथम अग्रिम अनुमान सितंबर में, दूसरा फरवरी में और तीसरा अप्रैल या मई और चौथा अंतिम अनुमान जुलाई-अगस्त में जारी किया जाता है। आंकड़ों और अनुमानों के अनुसार बिहार में मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर धान, गेहूं, मक्का, रागी (मड़ुआ), मूंग, मसूर, चना, सरसों, सूरजमुखी, गन्ना की खेती की जाती है।
बिहार पुलिस में महिलाओं की संख्या देश में सर्वाधिक है। आने वाले दिनों में इनकी और भर्तियां होंगी। इसके मद्देनजर महिला पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी संख्या में बैरक या आवास की अलग व्यवस्था की जा रही है। थाना भवन और बैरक में इनके तमाम सुविधाएं होंगी। दो वर्षों में 300 थाने बन जाएंगे आगामी दो वर्षों में राज्य में 300 थाने बनकर तैयार हो जाएंगे। हाल में हुए बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम लिमिटेड के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 108 थानों का शिलान्यास और 24 का उद्घाटन किया है। सभी थाना भवन चार मंजिला बनाए जा रहे हैं। इनका क्षेत्रफल 14 हजार 258 वर्गफीट है। अधिकतर थानों में गाड़ी, फायर टैंकर रखने के अलावा ड्राइवर के रहने की भी व्यवस्था है। पुलिस ओपी (उट पोस्ट) तीन मंजिला बनाए जा रहे हैं। आने वाले दो वर्ष में सभी थानों और पुलिस लाइन को मिलाकर करीब 19 से 20 हजार महिला कर्मियों के रहने की व्यवस्था हो जाएगी। यह सुविधाएं होंगी सभी चार मंजिला थाना भवनों में 30-35 महिला सिपाहियों के रहने के लिए दूसरी मंजिल पर विशेष बैरक बन रहा है। सुविधाओं से संपन्न इसका क्षेत्रफल करीब साढ़े चार हजार वर्ग फीट होगा। इसमें किचन, डाइनिंग स्पेस, स्टोर, टॉयलेट, बाथरूम के अलावा बच्चों के लिए क्रेच समेत अन्य सभी मूलभूत सुविधाएं मौजूद रहेंगी। यह एक फ्लैट की तरह होगा। सबसे ऊपरी तल पर पुरुष सिपाहियों के लिए बैरक है। नए थाना भवन के निचले तल पर थाना प्रभारी का कार्यालय, सेक्शन कार्यालय, हाजत समेत अन्य चीजें होंगी। पहले तल पर विधि-व्यवस्था से जुड़ी यूनिट समेत अन्य जरूरी कार्यालय रहेंगे। राज्य में अब सभी नए थाने इसी स्वरूप में दिखेंगे। पहले से मौजूद करीब 650 पुलिस थानों में महिला शौचालयों की खासतौर से व्यवस्था कर दी गई है। महिला एवं एससी-एसटी थानों में क्वार्टर राज्य में महिला और एससी-एसटी थाने को एक साथ बनाये गये हैं। इन चार मंजिला थाना भवनों में सबसे ऊपर के भवन पर महिला कर्मियों के लिए क्वार्टर तैयार किए गए हैं। इनमें रहने, भोजन समेत सभी सुविधाएं हैं। बता दें कि हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों के मूलभूत सुविधाओं में बढ़ोतरी की गई है।
चिरैया थाने के खोड़ा पुल के पास हथियारबंद बाइक सवार अपराधियों ने एक स्वर्ण व्यवसायी पांच लाख रुपये के गहने लूट लिए। इस दौरान व्यवसायी के साथ मारपीट भी की। वारदात रविवार को चिरैया गोलापकड़िया मुख्य मार्ग में हुई। बाद में पुलिस ने घटनास्थल पर जाकर छानबीन की। मामले में महुआवा गांव निवासी स्वर्णकार रविन्द्र कुमार ने एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने में आवेदन दिया है। उन्होंने आवेदन में पुलिस को बताया कि खोड़ा चौक पर उनकी वर्षों पुरानी आभूषण की दुकान है।
शहर में ड्रेनेज सिस्टम के ध्वस्त होने से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसका बड़ा उदाहरण शहर की सबसे बड़ी व्यापारिक मंडी हिंदी बाजार है। व्यवसायियों को बरसात आने के पहले ही चिंता बढ़ जाती है। बरसात के दिनों में मंडी में जलजमाव से यहां का कारोबार काफी प्रभावित हो जाता है। हिन्दी बाजार में छोटी-बड़ी हैं 400 दुकानें हिन्दी बाजार शहर ही नहीं बल्कि पूरे जिले की सबसे बड़ी व्यापारिक मंडी के रूप में चर्चित है। यहां छोटे-बड़े करीब 400 दुकानें हैं। यहां थोक सामान का बाजार अधिक है। जिले के सुदूर बाजारों के अलावे आस-पास के जिलों से भी लोग कारोबार करने पहुंचते हैं। जिससे पूरे दिन मंडी लोगों से गुलजार रहती है। लेकिन यहां पब्लिक सुविधा नाम पर कुछ भी नहीं है। बरसात में दुकानों में प्रवेश कर जाता है पानी बरसात के समय निकासी नहीं होने के कारण कई दुकानों के अंदर पानी प्रवेश कर जाता है। जिससे व्यवसायियों के सामान खराब हो जाते हैं। वहीं कारोबार भी प्रभावित रहता है। व्यवसायियों के अनुसार बरसात के समय ग्राहकों का मंडी की ओर आना भी कम हो जाता है।
रैयतों को अब ऑनलाइन खतियान का नकल आसान हो जायेगा। अभिलेखागार का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। इसको ले जिला अभिलेखागार के अभिलेख को ऑनलाइन करने के लिए स्कैनिंग का काम तेजी से चल रहा है। अब तक कई अभिलेख की स्कैनिंग कर ली गई है। अबतक साबिक खतियान, हाल सर्वे खतियान व रजिस्टर डी की स्कैनिंग का काम पूरा हो चुका है। अब जमींदारी रिर्टन की स्कैनिंग की जाएगी। अभिलेख की स्कैनिंग के बाद किया जायेगा मिलान सभी अभिलेख की स्कैनिंग के बाद उसका मिलान किया जाएगा। जिसके लिए अधिकारी और कर्मी को लगाया जाएगा। अभिलेख के कस्टोडियन को भी मिलान करने की जिम्मेदारी की जाएगी। अधिकारियों से स्वीकृति मिलने के बाद उसे विभाग को भेजा जाएगा। वहां भी इसकी रैंडमली जांच होगी। जांच में सही पाए जाने के बाद अभिलेख को ऑनलाइन किया जा सकता है। स्कैनिंग करने में बरती जा रही सावधानी स्कैनिंग को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। अभिलेख की सुरक्षा एवं उसकी सही-सही स्कैनिंग के लिए इसकी मॉनिटर लगातार अधिकारी कर रहे हैं। अभिलेखागार के प्रभारी पदाधिकारी के अलावा डीएम भी इसका निरीक्षण कर चुके हैं। होगा फायदा जिला अभिलेखागार में पूर्वी व पश्चिमी चंपारण की भूमि से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख हैं। सर्वे खतियान के अलावा जमींदारी खतियान सहित अन्य महत्वपूर्ण खतियान यहां के अभिलेखागार में हैं। पुराना होने के कारण अभिलेख खराब हो रहे हैं। बार-बार उपयोग होने से भी कई अभिलेख के पन्ने चिथड़े चिथड़े हो चुके है। जिससे कई हल्का का नकल नहीं निकल पाता है। लेकिन अब स्कैनिंग होने के बाद सभी अभिलेख सुरक्षित हो जाएंगे। अभिलेख की हू ब हू कॉपी कंप्यूटर में दर्ज हो जाएगी। जिसे कभी भी उपयोग किया जा सकेगा। इससे बार-बार अभिलेख को निकालकर उसकी फोटो कॉपी करने की झंझट समाप्त हो जाएगी। नकल लेने के लिए सीधे कंप्यूटर से प्रिंट आउट निकाल कर उसे जरूरतमंद को दिया जा सकेगा।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन कार्ड धारकों को आधार सीडिंग अनिवार्य कर दिया गया है। राशन कार्ड का आधार से लिंक करने की तिथि 30 जून तक निर्धारित की गयी है। उक्त तिथि तक आधार सीडिंग नहीं कराने वाले उपभोक्ता का नाम आपूर्ति विभाग के पोर्टल से डिलीट करते हुए राशन बंद कर दिया जाएगा। यह निर्देश जिला आपूर्ति विभाग ने जारी किया है। डीलर के यहां पॉस मशीन से होगी आधार सीडिंग सभी प्रखंड के पंचायतों में उपभोक्ता को अपने डीलर के यहां राशन कार्ड व आधार नंबर लेकर जाना है। डीलर के द्वारा पॉस मशीन से आधार सीडिंग किया जाएगा। राशन कार्ड में परिवार के जितने सदस्य का नाम अंकित है, सभी सदस्यों का आधार सीडिंग कराना होगा। एक भी सदस्य छूट जाएंगे तो उनका नाम पोर्टल से डिलीट हो जाएगा। इससे उनको मिलनेवाला राशन का लाभ नहीं मिल सकेगा।सभी सदस्यों को आधार सीडिंग कराना अनिवार्य किया गया है। जिनका आधार सीडिंग हो गया है उनको दुबारा नहीं कराना है। जिले में हैं 9 लाख 58 हजार 704 राशन कार्ड जिले में 9 लाख 58 हजार 704 राशन कार्ड धारक हैं। इसमें आदापुर में 37 हजार 436, अरेराज में 25 हजार 856, बंजरिया में 30 हजार 686, बनकटवा में 22 हजार 33, चकिया में 36 हजार 173, छौड़ादानो में 32 हजार 894, चिरैया में 54 हजार 887, ढाका में 59 हजार 364, घोड़ासहन में 31 हजार 513, हरसिद्धि में 36 हजार 531, कल्याणपुर में 54 हजार 807, केसरिया में 33 हजार 864, कोटवा में 31 हजार 506, मधुबन में 34 हजार 194, मेहसी में 32 हजार 864, मोतिहारी में 61 हजार 534, पहाड़पुर में 34 हजार 818, पकड़ीदयाल में 32 हजार 611, पताही में 37 हजार 760, फेनहारा में 17 हजार 784, पीपराकोठी में 16 हजार 20 , रामगढ़वा में 37 हजार 615, रक्सौल में 37 हजार 758,संग्रामपुर में 24 हजार 417, सुगौली में 45 हजार 54, तेतरिया में 22 हजार 465 व तुरकौलिया में 36 हजार 260 राशन कार्ड धारक हैं।
मोतिहारी शहर के एक मोहल्ले में दहेज में सोने का चेन नहीं देने पर दरवाजे पर आयी बारात लौट गयी। लड़की पक्ष के लोगों ने दूल्हा उसके पिता, बहनोई व भाई को बंधक बना लिया। पंचायती के बाद खर्च में पांच लाख रुपये की वसूली हुई उसके बाद दूल्हा को बंधक से मुक्त किया। बारात समय पर पहुंची और दरवाजा लगी। वरमाला हुआ। बराती भोजन किये। शादी भी शुरु हो गयी। सिन्दूर दान के समय दूल्हा सोने के चेन के लिये अड़ गया। बात इतनी आगे बढ़ गयी वह शादी करने से ही इंकार कर दिया।
शहर में दो जगहों पर फ्लाईओवर निर्माण की मंजूरी मिली है। इसके तहत शहर के छतौनी चौक व अवधेश चौक पर फ्लाईओवर का निर्माण होगा। दोनों जगह फोरलेन फ्लाईओवर निर्माण पर 76 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके निर्माण से चिरप्रतीक्षित फ्लाईओवर निर्माण की मांग पूरी होगी। पूर्व केन्द्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री सह सांसद राधामोहन सिंह के प्रयास से इसकी मंजूरी मिली है। फ्लाईओवर निर्माण से जाम से मिलेगी मुक्ति दिनभर भारी वाहनों के परिचालन से छतौनी चौक पर जाम से लोग परेशान रहते हैं। इस चौक पर एनएच से गुजरनेवाले सैकड़ों वाहनों के कारण चौक पर पार करने में लोगों को पसीने छूट जाते हैं। शहर से होकर लोग इस चौक को पार करते हैं। एनएच से वाहनों के परिचालन का दिनभर तांता लगा रहता है। घोड़ासहन, ढाका, चिरैया व पकड़ीदयाल आदि प्रखंडों से प्रतिदिन शहर में प्रवेश करने का यह चौक क्रॉसिंग स्थल है। लेकिन अब फ्लाईओवर निर्माण की स्वीकृति मिलने से लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी।
भारत माला परियोजना के तहत होनेवाले सड़क निर्माण को लेकर सर्वे का कार्य शुरू हो गया है। अब लोगों में इस सड़क बनने की उम्मीद जगी है। केन्द्र प्रायोजित परियोजना के तहत भारत माला परियोजना में चकिया से चोरमा, पकड़ीदयाल, रामपुरवा, धनौजी, ढाका होते हुए बैरगनिया तक सड़क के विस्तार निर्माण की योजना है। यह सड़क टू लेन की होगी। 27 गांवों से होकर यह सड़क गुजरेगी। कार्य की जिम्मेवारी एनएचएआइ को दी गयी है। वहीं, सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर गजट का प्रकाशन हो चुका है। सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर जमीन मालिकों के यहां नोटिस निर्गत भी होना शुरू हो गया है। 45 किलोमीटर सड़क निर्माण की स्वीकृति भारत माला परियोजना के तहत चकिया से चोरमा-पकड़ीदयाल, ढाका होते हुए बैरगनिया तक करीब 45 किलोमीटर सड़क निर्माण की स्वीकृति दी गयी है। सड़क निर्माण का ठेका हरियाणा की धारीवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास है। सड़क निर्माण को लेकर प्लांट तैयार किया जा चुका है। कंपनी द्वारा सड़क के सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। दो से तीन माह के अंदर सड़क का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। सड़क निर्माण से ढाका में जाम से मिलेगी मुक्ति इस परियोजना के तहत सड़क निर्माण होने से ढाका में जाम से बहुत हद तक मुक्ति मिल जाएगी। क्योंकि यह सड़क ढाका मोतिहारी पथ में रूपहारा नहर से थोड़ी दुर आगे से रोड क्रॉस होकर गुजरेगी तथा ढाका शहर को छोड़ चैनपुर ढाका होते हुए बैरगनिया रोड में औरैया के समीप मुख्य सड़क में मिलेगी। इस कारण घोड़ासहन, बैरगनिया व सीतामढ़ी की ओर जानेवाली गाड़ी इस सड़क से चली जाएगी। सड़क निर्माण से ढाका में जाम की समस्या नहीं होगी।
