रैयतों को अब ऑनलाइन खतियान का नकल आसान हो जायेगा। अभिलेखागार का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। इसको ले जिला अभिलेखागार के अभिलेख को ऑनलाइन करने के लिए स्कैनिंग का काम तेजी से चल रहा है। अब तक कई अभिलेख की स्कैनिंग कर ली गई है। अबतक साबिक खतियान, हाल सर्वे खतियान व रजिस्टर डी की स्कैनिंग का काम पूरा हो चुका है। अब जमींदारी रिर्टन की स्कैनिंग की जाएगी। अभिलेख की स्कैनिंग के बाद किया जायेगा मिलान सभी अभिलेख की स्कैनिंग के बाद उसका मिलान किया जाएगा। जिसके लिए अधिकारी और कर्मी को लगाया जाएगा। अभिलेख के कस्टोडियन को भी मिलान करने की जिम्मेदारी की जाएगी। अधिकारियों से स्वीकृति मिलने के बाद उसे विभाग को भेजा जाएगा। वहां भी इसकी रैंडमली जांच होगी। जांच में सही पाए जाने के बाद अभिलेख को ऑनलाइन किया जा सकता है। स्कैनिंग करने में बरती जा रही सावधानी स्कैनिंग को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। अभिलेख की सुरक्षा एवं उसकी सही-सही स्कैनिंग के लिए इसकी मॉनिटर लगातार अधिकारी कर रहे हैं। अभिलेखागार के प्रभारी पदाधिकारी के अलावा डीएम भी इसका निरीक्षण कर चुके हैं। होगा फायदा जिला अभिलेखागार में पूर्वी व पश्चिमी चंपारण की भूमि से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख हैं। सर्वे खतियान के अलावा जमींदारी खतियान सहित अन्य महत्वपूर्ण खतियान यहां के अभिलेखागार में हैं। पुराना होने के कारण अभिलेख खराब हो रहे हैं। बार-बार उपयोग होने से भी कई अभिलेख के पन्ने चिथड़े चिथड़े हो चुके है। जिससे कई हल्का का नकल नहीं निकल पाता है। लेकिन अब स्कैनिंग होने के बाद सभी अभिलेख सुरक्षित हो जाएंगे। अभिलेख की हू ब हू कॉपी कंप्यूटर में दर्ज हो जाएगी। जिसे कभी भी उपयोग किया जा सकेगा। इससे बार-बार अभिलेख को निकालकर उसकी फोटो कॉपी करने की झंझट समाप्त हो जाएगी। नकल लेने के लिए सीधे कंप्यूटर से प्रिंट आउट निकाल कर उसे जरूरतमंद को दिया जा सकेगा।
