सरकार द्वारा पशुपालकों को प्रोत्साहित कर पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए मनरेगा योजना के तहत बनने वाले पशु शेड का लाभ प्रखंड के पशुपालकों को नही मिल कर गैर पशुपालकों को मिल गया। इस योजना से केवल वैसे ही लोग लाभान्वित हुए है। जिनका पशुपालन से कोई सरोकार नहीं है। जिसके कारण सरकार की यह महत्त्वाकांक्षी योजना चिरैया में लूट योजना बन कर रह गई है। निर्मित शेड का उपयोग जलावन अथवा घर के कबाड़ को रखने के रूप में किया जा रहा है। जबकि इसका उपयोग ठंड, गर्मी, बरसात आदि से पशुओं का बचाव करने के लिए होना था। कई जगहों पर यह शेड ऐसे ही बेकार पड़ा है। सरकारी नियमानुसार दो कैटेगरी के शेड का निर्माण किया गया है। दो नाद वाली छोटी शेड के निर्माण पर करीब एक लाख तीस हजार रुपये तथा दो से अधिक नाद वाली बड़ी शेड के निर्माण पर करीब एक लाख अस्सी हजार रुपये खर्च किए गए हैं। प्रखंड के सभी 23 पंचायतों में करीब एक हजार पशु शेड का निर्माण किया गया है। जिस पर करीब साढ़े पन्द्रह करोड़ रुपये खर्च हुए है। इधर पीओ ज्योति कुमार ने बताया कि पशु शेड का निर्माण किया गया है। निर्माण के बाद भी यदि कोई व्यक्ति पशु पालन नहीं करें तो यह उसकी कमजोरी है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जायेगी।
