राजस्थान राज्य के नीमराना से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक अमर से हुई। अमर बताते है कि वो चटनी की फैक्ट्री में काम करते है जहाँ लगभग 200 लोग मज़दूर है। जिसमे अधिकतर मज़दूर ठकेदारी में ही कार्य करते है। कंपनी से सैलरी स्लिप नहीं मिलती है ,वो 12 घंटे काम करते है जिसमें उन्हें 11 हज़ार रूपए मिलते है ।अभी उन्हें ओवरटाइम सिंगल रेट पर ही मिलता है और महीना के 9 -10 तारीख तक वेतन मिल जाता है। राजस्थान सरकार के नए क़ानून के तहत वो कहते है कि वेतन बढ़ना चाहिए तभी 8 घंटे में काम करेंगे ,क्योंकि 8 घंटे काम कर के घर परिवार की जिममेदारी नहीं उठा सकते है। अभी उनके कंपनी में पीएफ व ईएसआई की सुविधा नहीं मिलती है। अगर वेतन बढ़ता है तो क़ानून अच्छा है नहीं तो ओवरटाइम मिलना चाहिए। इस क़ानून को लेकर सरकार को सोच विचार करना चाहिए

राजस्थान राज्य के नीमराना से रफ़ी जी ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से ज्ञानेन जी से बातचीत कर रहे हैं जो ए बी व्योय कंपनी में कार्यरत हैं। ज्ञानेन जी ने बताया कि कंपनी ने बताया कि उनका वित्तीय घाटा है लेकिन ये कम्पनी की सोची समझी साजिश थी। कंपनी ने कोरोना काल में पहले स्थायी श्रमिकों को नौकरी से बाहर किया फिर कोरोना काल के बाद प्लांट को चालु ही नहीं किया। इसके बाद 60 श्रमिकों को उनका हिसाब कर नौकरी से बाहर कर दिया और पांच को सस्पेंड कर दिया। कंपनी ने बिना की जानकारी के 11 मार्च 2021 को शिवरात्रि की छुट्टी के बाद दूसरे दिन गेट पर नोटिस लगा दिया कि श्रमिकों का हिसाब कर दिया गया है और उन्हें उनके पैसे दे दिए गए हैं। जिसके लिए अभी श्रमिक अपने हक़ के लिए संघर्ष कर रहे हैं

राजस्थान राज्य के नीमराना से साझा मंच संवादाता नन्द किशोर प्रसाद जी ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से सुनील पांडेय से बातचीत कर रहे हैं जो ए बी व्योय कंपनी में 2008 से काम करते 13 साल बीत गए। कंपनी में जितने भी श्रमिक हैं उनकी उम्र 25-55 की है। इन श्रमिकों ने अपनी पूरी जिंदगी इस कंपनी को दी है। लेकिन कंपनी ने बिना की जानकारी के 11 मार्च 2021 को नोटिस दे कर श्रमिकों का हिसाब कर नौकरी से निकाल दिया।

राजस्थान राज्य के नीमराना से रफ़ी जी ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से जित्ता राम सैनी जी से बातचीत कर रहे हैं जो ए बी व्योय कंपनी में कार्यरत हैं। जित्ता राम सैनी ने बताया कि कंपनी ने बताया कि उनका वित्तीय घाटा हुआ है इसलिए वे कंपनी से श्रमिकों को निकाल रही है। लेकिन ये कम्पनी की सोची समझी साजिश है । कंपनी ने कोरोना काल में पहले स्थायी श्रमिकों को नौकरी से बाहर किया फिर कोरोना काल के बाद प्लांट को चालु ही नहीं किया। इसके बाद 60 श्रमिकों को उनका हिसाब कर नौकरी से बाहर कर दिया और पांच को सस्पेंड कर दिया। कंपनी ने बिना की जानकारी के 11 मार्च 2021 को शिवरात्रि की छुट्टी के बाद दूसरे दिन गेट पर नोटिस लगा दिया कि श्रमिकों का हिसाब कर दिया गया है और उन्हें उनके पैसे दे दिए गए हैं। जिसके लिए अभी श्रमिक अपने हक़ के लिए संघर्ष कर रहे हैं। राजस्थान सरकार ने जो कानून लागु किये हैं उसके तहत श्रमिकों को कुछ भी हाथ नहीं आएगा क्योंकि सरकार द्वारा दिए गए निर्देश धरातल पर ही नहीं पहुंचते।

राजस्थान राज्य के नीमराना से साझा मंच संवादाता नन्द किशोर प्रसाद ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से पवन कुमार यादव से बातचीत कर रहे हैं जो ए बी व्योय कंपनी में कार्यरत हैं। पवन कुमार यादव ने बताया कि वे व्योय कंपनी में बीते 15 साल से काम कर रहे हैं। लेकिन कंपनी ने अवैध रूप से श्रमिकों को 12 मार्च 2021 से नौकरी से बाहर कर दिया है। जिसके लिए अभी श्रमिक अपने हक़ के लिए धरना प्रदर्शन कर विरोध के साथ संघर्ष कर रहे हैं।

राजस्थान राज्य के नीमराना से रफ़ी जी ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से जित्ता राम सैनी जी से बातचीत कर रहे हैं जो ए बी इन व्योय कंपनी में कार्यरत हैं। ये कंपनी बियर बनाती है जिसमे 60-70 श्रमिकों को बिना नोटिस दिए घर में बैठा दिया गया है। जिन श्रमिकों को नौकरी से निकाला गया वे 18 से 20 साल तक इस कंपनी में काम कर चुके हैं। इन्ही मुद्दों और राजस्थान सरकार द्वारा निकालने गए श्रम कानून के विरोध में श्रमिक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 11 मार्च 2021 को शिवरात्रि की छुट्टी के बाद दूसरे दिन गेट पर नोटिस लगा दिया कि श्रमिकों का हिसाब कर दिया गया है और उन्हें उनके पैसे दे दिए गए हैं। जिसके लिए अभी श्रमिक अपने हक़ के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

राजस्थान राज्य के नीमराना से साझा मंच के संवादाता नन्द किशोर ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से देवदत्त यादव से बातचीत कर रहे हैं जो ए बी इन व्योय कंपनी में कार्यरत हैं। कि उन्होंने 1998 में इस कंपनी में काम करना शुरू किया था। । ये कंपनी बियर बनाती है जिसमे 60-70 श्रमिकों को बिना नोटिस दिए घर में बैठा दिया गया है। जिन श्रमिकों को नौकरी से निकाला गया वे 18 से 20 साल तक इस कंपनी में काम कर चुके हैं। अचानक 11 मार्च 2021 को शिवरात्रि की छुट्टी के बाद दूसरे दिन 12 मार्च को गेट पर नोटिस लगा कर श्रमिकों को नौकरी से निकाल दिया। इन्ही मुद्दों और राजस्थान सरकार द्वारा निकालने गए श्रम कानून के विरोध में श्रमिक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

राजस्थान राज्य के नीमराना से साझा मंच के संवादाता नन्द किशोर ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से इंद्र यादव से बातचीत कर रहे हैं जो ए बी इन व्योय कंपनी में कार्यरत हैं। ये कंपनी बियर बनाती है जिसमे 60-70 श्रमिकों को बिना नोटिस दिए घर में बैठा दिया गया है। जिन श्रमिकों को नौकरी से निकाला गया वे 18 से 20 साल तक इस कंपनी में काम कर चुके हैं। अचानक 11 मार्च 2021 को शिवरात्रि की छुट्टी के बाद दूसरे दिन 12 मार्च को गेट पर नोटिस लगा कर श्रमिकों को नौकरी से निकाल दिया। जब श्रमिकों ने विरोध किया तो उन्हें कंपनी के अंदर जाने से रोका गया। कंपनी में वर्कर्स की तनख्वा 30-35 हज़ार रूपए हैं और अन्य कर्मचारियों को एक से डेढ़ लाख तनख्वा दी जाती है। जिनको ज्यादा वेतन मिलती है उन्हें कंपनी ने दूसरे जगह ट्रांसफर कर दिया और जिनका वेतन कम है उन्हें कंपनी नौरी से निकाल रही है।

राजस्थान राज्य के नीमराना से रफ़ी जी ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक से बातचीत कर रहे हैं जो ए बी इन व्योय कंपनी में कार्यरत हैं। ये कंपनी बियर बनाती है। कंपनी श्रमिकों से 12 घंटे काम करवाती है और तनख्वा भी समय पर नहीं देती है। ठेकेदार ने कोई भी जोइनिंग लेटर या पे स्लिप मजदूरों नहीं दिया है। राजस्थान सरकार जो आठ घंटा काम करने का नियम लागु कर रही है वो मजदूरों के हित के लिए सही है। लेकिन नियोक्ता को आधा पैसा काटने का नियम लागु होने पर श्रमिकों को नुक्सान होगा जिसके लिए अभी श्रमिक अपने हक़ के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

राजिस्थान राज्य से जितेंद्र साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कह रहे है कि सरकार द्वारा मजदूरों के लिए बनाई गई कानून मजदूरों के पक्ष में नहीं है। साथ ही कह रहे है कि है कि इस क़ानून के तहत मजदूरों को बंधुवा मजदूर बना दिया जायगा तथा उनसे मनचाहा ढंग से काम करवाया जाएगा । बताते है कि मजदूर वर्ग के लोग कमजोर और मजबूर है यदि कोई मजदूर कंपनी से अपना हक़ मांगता है तो उन्हें काम से निकल देने की धमकी दी जाती है और यदि प्रशाशन के पास जाता है तो उन्हें उनकी तरफ से कोई मदद नई की जाती हैं। कह रहे है कि वो इस कानून का विरोध करते है और करते रहेंगे