राजस्थान राज्य के उदयपुर जिला के संभा प्रखंड से दिनेश मोबाइल वाणी के से यह बताना चाहते है की उनहोंने अपने घर के आस पास 200 से 300 आम के पेड़ लगाए और वो सबसे अनुरोध करते है की हमे भी पेड़ लगन चाहिए और पर्यावरण बचाना चाहिए

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राजस्थान से शालिनी ,श्रमिक वाणी के माध्यम से कह रहीं हैं कि, सूचना के अधिकार की तरह इस क़ानून को भी पास होने के 120 दिनों में लागू कर दिया जाना चाहिए और ये क़ानून पास होना चाहिए।

नमस्कार मेरा नाम मुहम्मद यूसुफ़ है मैं राजस्थान सीकर से बात कर रहा हूँ। मैं पूर्णतः ब्लाइंड हूँ ,मुझे पेंशन नहीं मिल पा रही है। मुझे पेंशन कैसे मिले ,इसके बारे में मुझे बताए

मैं राजेंद्र सिंह राजस्थान धौलपुर से बात कर रहा हूँ। क्या मेरा ई श्रम कार्ड बन सकता है ?

राजस्थान राज्य के उदयपुर ज़िला से हमारे श्रोता ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि गरीबों का पैसा समय पर मिलना चाहिये। अगर समय पर नहीं मिलेगा तो वो क्या खाएंगे। सरकार को इस पर कोई सुनवाई करनी चाहिए ताकि गरीबों को समय पर पैसा मिल सके

राजिस्थान राज्य के नीमराना से गोपाल साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कह रहे है कि वो राजिस्थान में मजदूरी का काम करते है। साथ ही कह रहे है कि सरकार डरा बनाया नया नियम जिसके तहत अब मजदूरों को सिर्फ 8 घंटे ही काम करना है वो उससे संतुष्ट नहीं है कहते है कि 8 घंटों के काम से मजदूर अपने परिवार का खर्चा नहीं चला पाइनहे तथा उन्हें काफी दिक्कतों का भी सामना करना पद सकता हैं। कि इस कानून को लाने के बाद यह पता चलता है कि सरकार मजदूरों और गरीबों के बारे नहीं सोच रही है

राजस्थान के सीटू अध्यक्ष शुक्ला जी बता रहें हैं कि केंद्र व राज्य दोनों ही श्रम कानून मज़दूरों विरुद्ध हैं और यूनियने इसका विरोध कर रहीं है यह दोनों कानून पूंजीपतियों के हित में हैं और इनके लागू होने से मज़दूर गुलाम बन जायेगा।

नन्द किशोर प्रशाद ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वे राजस्थान के नीमराना में उपस्थित हैं। वहाँ उपस्थित श्रमिक जीतेन्द्र ,जो ऑटो मोबाइल के सेक्टर के कम्पनी में कार्यरत हैं। जितेंद्र ने बताया कि वे कम्पनी में गाड़ी के पार्ट्स बनाने में मदद करते हैं। कंपनी में दो हज़ार के करीब श्रमिक कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि श्रमिकों को दस तारिक को वेतन। श्रमिकों को सरकार अच्छी तनख्वा दिलानी चाहिए। साथ ही उन्होंने बताया कि कंपनी द्वारा ईएसआइ ,पीएफ की भी सुविधा प्रदान नहीं की जाती है और ना ही ओवर टाइम का अतिरिक्त वेतन दिया जाता है

राजस्थान राज्य के नीमराना से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक अमर से हुई। अमर बताते है कि वो चटनी की फैक्ट्री में काम करते है जहाँ लगभग 200 लोग मज़दूर है। जिसमे अधिकतर मज़दूर ठकेदारी में ही कार्य करते है। कंपनी से सैलरी स्लिप नहीं मिलती है ,वो 12 घंटे काम करते है जिसमें उन्हें 11 हज़ार रूपए मिलते है ।अभी उन्हें ओवरटाइम सिंगल रेट पर ही मिलता है और महीना के 9 -10 तारीख तक वेतन मिल जाता है। राजस्थान सरकार के नए क़ानून के तहत वो कहते है कि वेतन बढ़ना चाहिए तभी 8 घंटे में काम करेंगे ,क्योंकि 8 घंटे काम कर के घर परिवार की जिममेदारी नहीं उठा सकते है। अभी उनके कंपनी में पीएफ व ईएसआई की सुविधा नहीं मिलती है। अगर वेतन बढ़ता है तो क़ानून अच्छा है नहीं तो ओवरटाइम मिलना चाहिए। इस क़ानून को लेकर सरकार को सोच विचार करना चाहिए