-राशन कार्ड धारकों को ऋण कैसे मिलेगा? -आधार कार्ड कैसे बनेगा? -इन प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।

किसी भी समाज को बदलने का सबसे आसान तरीका है कि राजनीति को बदला जाए, मानव भारत जैसे देश में जहां आज भी महिलाओं को घर और परिवार संभालने की प्रमुख इकाई के तौर पर देखा जाता है, वहां यह सवाल कम से कम एक सदी आगे का है। हक और अधिकारों की लड़ाई समय, देश, काल और परिस्थितियों से इतर होती है? ऐसे में इस एक सवाल के सहारे इस पर वोट मांगना बड़ा और साहसिक लेकिन जरूरी सवाल है, क्योंकि देश की आबादी में आधा हिस्सा महिलाओं का है। इस मसले पर बहनबॉक्स की तान्याराणा ने कई महिलाओँ से बात की जिसमें से एक महिला ने तान्या को बताया कि कामकाजी माँओं के रूप में, उन्हें खाली जगह की भी ज़रूरत महसूस होती है पर अब उन्हें वह समय नहीं मिलता है. महिलाओं को उनके काम का हिस्सा देने और उन्हें उनकी पहचान देने के मसले पर आप क्या सोचते हैं? इस विषय पर राय रिकॉर्ड करें

-अंत्योदय कार्ड की जानकारी दें -आयुष्मान कार्ड कैसे बनेगा --इन प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।

राजस्थान राज्य के अजमेर जिले से मोबाइल वाणी के माध्यम से राम चंद्र रावत कीजानना चाहते हैं कि यूनियन आईडी कार्ड कैसे बनाया जाता है, इसे कैसे अपलोड किया जाता है और दूसरा आयुष्मान कार्ड के बारे में भी जानना चाहते हैं

मेरा नाम मुकेश है और मै उत्तर प्रदेश के हरदोई जिला से बात कर रहा हूँ। मै यह जानना चाहता हूँ की आयुष्मान कार्ड कैसे बनेगा ?

गुजरात से मुकेश मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि स्वच्छता अभियान शुरू होने से अब घरों में मच्छर कम आते हैं और बीमारियाँ भी नहीं होती है

-नरेगा किसे कहते है ? -आयुष्मान कार्ड बनाने की जानकारी चाहिए -इन प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।

नासिक में रहने वाली मयूरी धूमल, जो पानी, स्वच्छता और जेंडर के विषय पर काम करती हैं, कहती हैं कि नासिक के त्र्यंबकेश्वर और इगतपुरी तालुका में स्थिति सबसे खराब है। इन गांवों की महिलाओं को पानी के लिए हर साल औसतन 1800 किमी पैदल चला पड़ता है, जबकि हर साल औसतन 22 टन वज़न बोझ अपने सिर पर ढोती हैं। और ज्यादा जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" के नारे से रंगी हुई लॉरी, टेम्पो या ऑटो रिक्शा आज एक आम दृश्य है. पर नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च द्वारा 2020 में 14 राज्यों में किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि योजना ने अपने लक्ष्यों की "प्रभावी और समय पर" निगरानी नहीं की। साल 2017 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में हरियाणा में "धन के हेराफेरी" के भी प्रमाण प्रस्तुत किए। अपनी रिपोर्ट में कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ स्लोगन छपे लैपटॉप बैग और मग खरीदे गए, जिसका प्रावधान ही नहीं था। साल 2016 की एक और रिपोर्ट में पाया गया कि केंद्रीय बजट रिलीज़ में देरी और पंजाब में धन का उपयोग, राज्य में योजना के संभावित प्रभावी कार्यान्वयन से समझौता है।

-आधार कार्ड से वोट कर सकता हूं या नहीं? -विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत मिलने वाले लोन की विस्तृत जानकारी चाहिए ? -इन प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।