दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कंपनियों में काम करने वाले श्रमिक नन्हे से हुई। नन्हे कहते है कि मीटर के हिसाब से पानी मिलता है और पीने के लिए पानी का बोतल खरीदना पड़ता है। 80 रुपया मीटर का पैसा प्रति माह देना पड़ता है। महीने में पीने के पानी के लिए कुल मिला कर 1000-800 रूपए खर्च हो जाते है। वे बताते हैं कि सरकार की ओर से पानी साफ़ करने पर कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। खारा जल इस्तेमाल करने लायक भी नहीं होता है लेकिन भी इसके पैसे देने पड़ते हैं। नहाने ,कपड़ा धोने ,खाना बनाने आदि कार्यों के लिए बाजार से पानी खरीदना पड़ता है।
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कंपनियों में काम करने वाले श्रमिक रमाकांत से हुई। रमाकांत कहते है कि मीटर के हिसाब से पानी मिलता है और पीने के लिए पानी का बोतल खरीदना पड़ता है। 100 रुपया मीटर का पैसा प्रति माह देना पड़ता है। महीने में पीने के पानी के लिए कुल मिला कर 600 रूपए खर्च हो जाते है। वे बताते हैं कि खारा जल के इस्तेमाल से कपड़े साफ़ नहीं होते ,नहाने से बाल झड़ते हैं ,पीने लायक भी नहीं होता है लेकिन भी इसके पैसे देने पड़ते हैं।
दिल्ली गुरुग्राम से नन्द किशोर प्रशाद ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कंपनी में काम करने वाले श्रमिक से बातचीत की। जहाँ श्रमिक ने बताया कि वे छह साल से कंपनी मेंकाम करते हैं और ओपेन्डिक्स होने पर कंपनी मालिक ने उनका इलाज कराया। इसलिए वे अपनी मालिक की बहुत इज़्ज़त करते हैं। वे बताते कि उनके साथ तीन लड़कियां और तीन महिलाये भी उसी कंपनी में कार्यरत है ,उनके साथ भी कंपनी मालिक बहुत विनम्र है।उन्होंने ऐसा कंपनी मालिक पहले कभी नहीं देखा है
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक विकास कुमार से हुई। विकास कहते है कि देश में जिस तरह से महँगाई बढ़ रही है ,उसी प्रकार वेतन में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। कहीं भी खऱीदारी करने जाए तो बिल बहुत बन जाता है। खाद्य पदार्थ के साथ पेट्रोल डीज़ल ,खाद्यान तेल के दाम में बढ़ोतरी होती जा रही है। देखा जाए तो मोबाइल रिचार्ज के भी दाम बढ़ चुके है। लोग महँगाई के कारण पौष्टिक व संतुलित आहार नहीं ले पा रहे है। इस कारण स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और कई बिमारियों के चपेट में भी लोग आ जा रहे है। ऐसे में श्रमिकों को संगठित होना पड़ेगा और अपने वेतन बढ़ोतरी के लिए माँग करनी पड़ेगी। अभी जिस तरह से महँगाई बढ़ रही है ,उसमे हर एक वर्ग के श्रमिकों की न्यूनतम वेतन 25 हज़ार रूपए तक होना चाहिए।
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक जगमोहन से हुई। जगमोहन कहते है कि मीटर के हिसाब से पानी मिलता है और पीने के लिए पानी का बोतल 20 से 25 रूपए का खरीदना पड़ता है। महीने में एक व्यक्ति के पीछे 2500 रूपए खर्च करने पड़ते हैं। वे बताते हैं कि खारा जल के इस्तेमाल से कपड़े साफ़ नहीं होते ,नहाने से बाल झड़ते हैं ,पीने लायक भी नहीं होता है लेकिन भी इसके पैसे देने पड़ते हैं।
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक अमित कुमार से हुई। अमित कहते है कि देश में जिस तरह से महँगाई बढ़ रही है ,उसी प्रकार वेतन में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। कहीं भी खऱीदारी करने जाए तो बिल बहुत बन जाता है। खाद्य पदार्थ के साथ पेट्रोल डीज़ल ,खाद्यान तेल के दाम में बढ़ोतरी होती जा रही है। देखा जाए तो मोबाइल रिचार्ज के भी दाम बढ़ चुके है। लोग महँगाई के कारण पौष्टिक व संतुलित आहार नहीं ले पा रहे है। इस कारण स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और कई बिमारियों के चपेट में भी लोग आ जा रहे है। ऐसे में श्रमिकों को संगठित होना पड़ेगा और अपने वेतन बढ़ोतरी के लिए माँग करनी पड़ेगी। अभी जिस तरह से महँगाई बढ़ रही है ,उसमे हर एक वर्ग के श्रमिकों की न्यूनतम वेतन 25 हज़ार रूपए तक होना चाहिए।
गुरुग्राम से नंदकिशोर एक व्यक्ति नसीब खान से बात कर रहें हैं, इनका कहना है की ये बच्चों का मनपसंद मिठाई हवा मिठाई बेचते हैं. तथा ये पिछले दस सालों से ये काम कर रहें हैं.
गुरुग्राम से नन्द किशोर मज़दूर से साझा मंच के माध्यम से बात कर रहें हैं, अजय का कहना है की गर्ववती महिलाओं को काफी गन्दा पानी मिल रहा है जिस कारण उन्हें समस्या होती है. इनका कहना है की ख़रीदा हुआ पानी भी दूषित आता है तथा सरकार की तरफ से कोई भी पानी को चेक करने के लिए नहीं आता है.
दिल्ली के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से गौतम कुमार से हुई।गौतम कुमार कहते है कि दिल्ली एनसीआर के क्षेत्र में पानी की समस्या बहुत है। पानी के लिए सही पानी नहीं रहता है ,पानी खारा रहता है। बाहर से पानी ला कर इस्तेमाल करना पड़ता है। पानी की समस्या का मुख्य कारण उद्योगीकरण है ,जिसमे पानी का खपत ज़्यादा हो रहा है। यहाँ पर जल संचयन का कोई व्यवस्था नहीं है। गाँव में नहर में पानी जमा कर सकते है पर शहर में नाला ही है ,जिससे संचयन नहीं हो पाता है। खारा पानी आता है ,जिस कारण ही लोग अब पानी का व्यापार कर रहे है। लोग पानी का दुरूपयोग भी करते है और इसका व्यापार भी करते है। इसलिए सभी लोगों को जागरूक होना पड़ेगा और पानी का सदुपयोग होना ज़रूरी है
दिल्ली के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से राज कुमार से हुई।राज कुमार कहते है कि वो जिस मकान में रहते है ,वहाँ का पानी बहुत खारा है ,जिसका इस्तेमाल नहीं कर पाते है। हज़ार से बारह सौ रूपए प्रतिमाह पानी पर खर्च होता है लेकिन साफ़ पानी उपलब्ध नहीं हो पाता है। अगर हरियाणा ,दिल्ली में पानी की ऐसे ही स्थिति रही तो आने वाले युग में बहुत समस्या होगी। केवल संपन्न लोग ही पानी खऱीद कर इस्तेमाल कर पाएगे। पानी को साफ़ करना चाहिए ,दूषित नहीं करना चाहिए। पानी की समस्या का ज़िम्मेदार सरकार है। जल संचयन पहलु में तो है लेकिन इस पर कार्य नहीं हो पा रहा है। अगर जल संचयन हो जाता तो पानी का स्तर नहीं घटता। पानी प्राकृतिक साधन है लेकिन इसका भी लोग व्यापार कर रहे है। इसमें केवल गरीब तबके के लोग पिसते है। घर में जो भी फ़िल्टर पानी लगा है वो भी साफ़ नहीं रहता है। इसकी जाँच के लिए कोई कर्मचारी नहीं आते है
