"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिलदेव शर्मा पपीता के फसल में वृक्ष रोपण के छह महीने बाद प्रति पौधा उर्वरक देना चाहिए की जानकारी दे रहें हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ अशोक झा ऑर्गेनिक बीज उपचार विधि के बारे में जानकारी दे रहे हैं। सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.

नमस्कार दोस्तों, मोबाइल वाणी पर आपका स्वागत है। तेज़ रफ्तार वक्त और इस मशीनी युग में जब हर वस्तु और सेवा ऑनलाइन जा रही हो उस समय हमारे समाज के पारंपरिक सदस्य जैसे पिछड़ और कई बार बिछड़ जाते हैं। ये सदस्य हैं हमारे बढ़ई, मिस्त्री, शिल्पकार और कारीगर। जिन्हें आजकल जीवन यापन करने में बहुत परेशानी हो रही है। ऐसे में भारत सरकार इन नागरिकों के लिए एक अहम योजना लेकर आई है ताकि ये अपने हुनर को और तराश सकें, अपने काम के लिए इस्तेमाल होने वाले ज़रूरी सामान और औजार ले सकें। आज हम आपको भारत सरकार की विश्वकर्मा योजना के बारे में बताने जा रहे हैं। तो हमें बताइए कि आपको कैसी लगी ये योजना और क्या आप इसका लाभ उठाना चाहते हैं। मोबाइल वाणी पर आकर कहिए अगर आप इस बारे में कोई और जानकारी भी चाहते हैं। हम आपका मार्गदर्शन जरूर करेंगे। ऐसी ही और जानकारियों के लिए सुनते रहिए मोबाइल वाणी,

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिलदेव शर्मा कृषि में जैव उर्वरक एज़ोला के उपयोग के बारे में बता रहे हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें

तमाम गैर सरकारी रिपोर्टों के अनुसार इस समय देश में बेरोजगारी की दर अपने उच्चतम स्तर पर है। वहीं सरकारें हर छोटी मोटी भर्ती प्रक्रिया में सफल हुए उम्मीदवारों को नियुक्त पत्र देने के लिए बड़ी-बड़ी रैलियों का आयोजन कर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों को भी आमंत्रित कर रही हैं, जिससे की बताया जा सके कि युवाओं को रोजगार उनकी पार्टी की सरकार होने की वजह से मिल रहा है।

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा ग्रीष्मकालीन भिंडी की खेती कैसे करे सम्बंधित जानकारी दे रहे हैं । विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें...

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा गेँहू की फसल को चूहों के आक्रमण से होने वाले नुकसान एवं उपचार सम्बंधित जानकारी दे रहे हैं । विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें...

एक सामान्य समझ है कि कानून और व्यवस्था जनता की भलाई के लिए बनाई जाती है और उम्मीद की जाती है कि जनता उनका पालन करेगी, और इनको तोड़ने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके उलट भारतीय न्याय संहिता में किये गये हालिया बदलाव जनता के विरोध में राज्य और पुलिस को ज्यादा अधिकार देते हैं, जिससे आभाष होता है कि सरकार की नजर में हर मसले पर दोषी और पुलिस और कानून पूरी तरह से सही हैं।

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ अशोक झा ऑर्गनिक खेती में केचुवा खाद बनाने की विधि की जानकारी दे रहे है। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें...

बिहार राज्य के जमुई जिला से संवादाता राजीव गुप्ता ने डॉक्टर रीता झा से साक्षात्कार लिया।रीता झा यह बताना चाहती हैं कि अनचाहा गर्भ और गर्भ समापन महिला के प्रजनन आयु के दौरान और रिप्रोडक्टिव ऐज के दौरान होने वाली सामान्य प्रतिक्रियांए हैं।अंतरष्ट्रीय संस्थान गट मेचर के द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार हमारे देश में हर वर्ष अनुमानतः 4.8 करोड़ गर्भधारण में से लगभग 50 प्रतिशत यानी 2.4 करोड़ गर्भधारण अनचाहे होते हैं और उनमे से लगभग डेढ़ करोड़ का गर्भ समापन करवाया जाता है। सुरक्षित गर्भ समापन या एबॉर्शन सेवाओं का लाभ लेने हेतु महिलाओं को अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। कई महिलाओं के लिए स्वास्थय केंद्रों तक पहुंचाना भी संभव नहीं हैं। बहुत से लोगों को अभी भी पता नहीं है की भारत में गर्भ समापन या एबॉर्शन कानूनी है और ना ही यह जानती है कि गर्भ समापन सुविधा कहाँ उपलब्ध है। झारखण्ड और भी हार में बहुत कम लोगों को पता है कि भारत में गर्भ समापन या एबॉर्शन कानूनी है। कई महिलाओं को लगता है कि भारत में एबॉर्शन सिर्फ 3 महीना तक ही वैध है। अगर अनचाहा गर्भ ठहर जाता है तो अस्पताल में जा कर सुरक्षित और कानूनी एबॉर्शन का सहारा ले सकती हैं। गर्भ समापन जितना जल्दी कराया जाए उतना सुरक्षित होता है। अब तो गोलियों से भी गर्भ समापन होता है। अनचाहे गर्भ से बचने के लिए पति पत्नी को बात करना चाहिए और डॉक्टर से बात करना चाहिए या किसी स्थायी तकनीक का इस्तेमाल कर सकती हैं। कंडोम का इस्तमाल करना चाहिए। बार बार गरब समापन से महिलाओं के स्वास्थय पर असर पड़ता है। अगर महिला बच्चा नहीं चाहती हैं तो गर्भ समापन का निर्णय तुरंत लेना चाहिए