बिहार राज्य के जमुई जिला से संवादाता राजीव गुप्ता ने डॉक्टर रीता झा से साक्षात्कार लिया।रीता झा यह बताना चाहती हैं कि अनचाहा गर्भ और गर्भ समापन महिला के प्रजनन आयु के दौरान और रिप्रोडक्टिव ऐज के दौरान होने वाली सामान्य प्रतिक्रियांए हैं।अंतरष्ट्रीय संस्थान गट मेचर के द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार हमारे देश में हर वर्ष अनुमानतः 4.8 करोड़ गर्भधारण में से लगभग 50 प्रतिशत यानी 2.4 करोड़ गर्भधारण अनचाहे होते हैं और उनमे से लगभग डेढ़ करोड़ का गर्भ समापन करवाया जाता है। सुरक्षित गर्भ समापन या एबॉर्शन सेवाओं का लाभ लेने हेतु महिलाओं को अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। कई महिलाओं के लिए स्वास्थय केंद्रों तक पहुंचाना भी संभव नहीं हैं। बहुत से लोगों को अभी भी पता नहीं है की भारत में गर्भ समापन या एबॉर्शन कानूनी है और ना ही यह जानती है कि गर्भ समापन सुविधा कहाँ उपलब्ध है। झारखण्ड और भी हार में बहुत कम लोगों को पता है कि भारत में गर्भ समापन या एबॉर्शन कानूनी है। कई महिलाओं को लगता है कि भारत में एबॉर्शन सिर्फ 3 महीना तक ही वैध है। अगर अनचाहा गर्भ ठहर जाता है तो अस्पताल में जा कर सुरक्षित और कानूनी एबॉर्शन का सहारा ले सकती हैं। गर्भ समापन जितना जल्दी कराया जाए उतना सुरक्षित होता है। अब तो गोलियों से भी गर्भ समापन होता है। अनचाहे गर्भ से बचने के लिए पति पत्नी को बात करना चाहिए और डॉक्टर से बात करना चाहिए या किसी स्थायी तकनीक का इस्तेमाल कर सकती हैं। कंडोम का इस्तमाल करना चाहिए। बार बार गरब समापन से महिलाओं के स्वास्थय पर असर पड़ता है। अगर महिला बच्चा नहीं चाहती हैं तो गर्भ समापन का निर्णय तुरंत लेना चाहिए