कंटेनर, डिवाइडर भी हैं मौजूद।
दिल्ली एनसीआर श्रमिक वाणी के माध्यम से रीना परवीन की बातचीत कुसुम से हुईं कुसुम बताती है कुसुम जी से हुई बातचीत रिटेश प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में काम करने वाली कुसुम बताती हैं के फैक्ट्री में गार्ड की ड्यूटी करती हूं ड्यूटी लगने से पहले हमें बताया गया था 16500 तनक मिलेगी मगर अब हमें तनख्वाह 12500 रुपए मिलती है हमारे साथ धोखाधड़ी फैक्ट्री द्वारा की गई है और हमारा ₹1600 हर महीने पिएफ काटता है हमें पिएफ भी नहीं मिलता है अब हमारे एचआर ने हमसे कह दिया है कि आपको 16500 ही तनक मिलेगी और हमारे खाते में पिएफ भी आ गया है मैं श्रमिक वाणी की शुक्रगुजारों के उन्होंने हमारी मदद की खबर को हमने लोकल व्हाट्सएप ग्रुप फेसबुक कंपनी के एचआर वे मैनेजर को खबर शेर की गई थी
Farmers feed us, let's feed them and their families with honour and pride
सरहदों का दायरा बढ़ता जा रहा है अंतर्राष्ट्रीय सरहदों से मुल्क भले ही महफूज़ हो, लेकिन इन दिनों अपने ही मुल्क के किसानों को, अपने ही मुल्क की राजधानी में आने के लिए सरहदों का सामना करना पड़ रहा है। अपने ही मुल्क में सरहदें बनाने और इंटरनेट बंद करने वालीं कंपनियों की सरकारें सड़कों को सरहदों में तब्दील करने में लगी हुई है जहाँ प्रजातंत्र के नाम पर कंपनियों की सरकारों ने सड़कों पर कीलें और कटीले तार बिछा रखे हैं। प्रजातंत्र के इस खेल में मजदूरों को जनता बनाने के लिए इस उस कम्पनियों की सरकारों का खेल चल रहा है और जनता अब जनार्दन लगने लगी है मज़दूर कंपनियों में खपने को मजबूर होता जा रहा है, मज़दूर जनता है कि नहीं यह सवाल भी अधूरा ही रह गया है।
राजा पेंटर की बात
निपोनो ऑटो करमचारियो को शासन के आदेश के बाद भी नहीं मिल रहा है काम कर्मचारियों का कहना है कंपनियों का ही है शासन प्रशासन।
हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे।अगर आपके पास है कोई मज़ेदार चुटकुला, तो रिकॉर्ड करें मोबाइल वाणी पर, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर और जीतें आकर्षक इनाम।
घरेलू हिंसा सभ्य समाज का एक कड़वा सच है।आज भले ही महिला आयोग की वेबसाइट पर आंकड़े कुछ भी हो जबकि वास्तविकता में महिलाओं पर होने वाली घरेलु हिंसा की संख्या कई गुना अधिक है। अगर कुछ महिलाएँ आवाज़़ उठाती भी हैं तो कई बार पुलिस ऐसे मामलों को पंजीकृत करने में टालमटोल करती है क्योंकि पुलिस को भी लगता है कि पति द्वारा कभी गुस्से में पत्नी की पिटाई कर देना या पिता और भाई द्वारा घर की महिलाओं को नियंत्रित करना एक सामान्य सी बात है। और घर टूटने की वजह से और समाज के डर से बहुत सारी महिलाएं घरेलु हिंसा की शिकायत दर्ज नहीं करतीं। उन्हें ऐसा करने के लिए जो सपोर्ट सिस्टम चाहिए वह हमारी सरकार और हमारी न्याय व्यवस्था अभी तक बना नहीं पाई है।बाकि वो बात अलग है कि हम महिलाओं को पूजते ही आए है और उन्हें महान बनाने का पाठ दूसरों को सुनाते आ रहे है। आप हमें बताएं कि *-----महिलाओं के साथ वाली घरेलू हिंसा का मूल कारण क्या है ? *-----घरेलू हिंसा को रोकने के लिए हमें अपने स्तर पर क्या करना चाहिए? *-----और आपने अपने आसपास घरेलू हिंसा होती देखी तो क्या किया?
Transcript Unavailable.
बनो नई सोच ,बुनो हिंसा मुक्त रिश्ते की आज की कड़ी में हम सुनेंगे महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और हिंसा के बारे में।

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Transcript Unavailable.
Feb. 24, 2024, 9:08 p.m. | Tags: autopub