आज की युवा पीढ़ी महिला अधिकारों को एक नए नजरिए से देख रही है। जहां पहले अधिकारों की लड़ाई सड़क से संसद तक सीमित थी, वहीं अब यह लड़ाई डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुकी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल कैंपेन यह सब उसके नए हथियार हैं.

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दिनेश की हापुड़ निवासी पीड़िता की मां से कोई बातचीत

अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.

दिल्ली के जहांगीरपुरी से मूर्ति ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इनके पड़ोस में एक महिला के पति की मृत्यु हो गयी जिसके बाद उसके ससुराल वालों ने उसे घर ऐ निकाल दिया और अब उसके मायके वाले भी उसे रखने के लिए तैयार नहीं हैं। इसलिए महिला को ससुराल और मायके पक्ष से प्रॉपर्टी में हिस्सा मिलना चाहिए।

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दिल्ली के सीमापुरी से कविता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को माँ के प्रॉपर्टी में हिस्सा मिलना चाहिए क्योंकि पति परेशान और मारते -पीटते हैं। अधिकार मिलने पर वह अपना पालन पोषण कर सकती है

दिल्ली के सीमापुरी से कविता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को प्रॉपर्टी में हिस्सा मिलना चाहिए ताकि वह अपना पालन पोषण कर सकती हैं कई महिलाओं के पति मारते और परेशान करते हैं।