चैती छठ को लेकर श्रद्धालुओं ने रविवार की रात किया खरना चैती छठ पूजा को लेकर रविवार की शाम श्रद्धालुओं ने किया खरना की पूजा अर्चना । व्रतियों ने पूरी दिन उपवास रख कर शाम में करना पर गुड़ वाली खीर और रोटी का प्रसाद बांटा। सगे संबंधियों के साथ पड़ोसी भी जुटे। चारों ओर कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकईते जाय जैसे पारंपरिक गीत गुंजायमान हो उठा। पूजा अर्चना के बाद व्रतियों ने प्रसाद के रूप में गुड़ वाली खीर और रोटी ग्रहण किया। तब जाकर परिवार के अन्य सदस्यों ने प्रसाद ग्रहण किया। चार दिनों का यह सूर्या उपासना का पर्व चैती छठ पूजा को लेकर अगले दिन सोमवार को डूबते सूरज एवं अगले दिन मंगलवार को उदयमान सूर्य के अर्घ अर्पित के साथ ही महापर्व छठ का समापन हो जायेगा। कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलाव को रोकने को लेकर पूरे देश में लांकडाउन है। जिस कारण लोगों ने अपने-अपने घरों के बाहर व छतों पर ही अर्घ अर्पित करने का मन बना रखा है। 
मोबाइल वाणी के लिए पूसा से संजय राजा की रिपोर्ट। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने कोरोना को लेकर जारी राष्ट्र व्यापी लॉक डाउन के कारण बंदी से छात्रों की पढाई बाधित न हो इसके लिये अनूठी पहल करते हुए ऑन लाइन एजुकेशन की व्यवस्था की है। कुलपति कै निर्देश पर आरंभ इस व्यवस्था में सभी विषयों के शिक्षा की योजना है।
पुसा से मोबाइल वाणी के लिए संजय राजा की रिपोर्ट। ग्राहकों को एजेंसी कार्यालय या गोदाम पर आने की जरूरत नहीं है। उक्त बातें शहर के स्थित राजम इण्डेन सर्विस के प्रोप्राइटर अतुल राज ने संवाददाता से कहीं। उन्होंने कहा कि अगर किसी को बुकिंग के दूसरे दिन सिलेंडर मिलने में कोई दिक्कत होती है, या भेंडर से कोई शिकायत हो तो 6204035692, 7782817021, या 06274225223 नंबरों पर सूचना दे सकते हैं। उनकी परेशानी के तुरंत समाधान किया जाएगा ।
जलालपुर जन वितरण प्रणाली के दुकानों पर सोशल डिस्टेसिंग की उड़ाई जा रही धज्जियां
डॉ. आरपी मिश्रा स्वास्थ्य सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष सह आरपी मिश्रा हॉस्पिटल के निदेशक व मुख्य चिकित्सक डॉ. राजीव कुमार मिश्रा ने कहा कि जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बने, अफवाहों से बचें, लोगों को जागरूक करें साधारण निमोनिया कोराेना नहीं है। सामान्य कफ खांसी बुखार की स्थिति में घबराएं नहीं। याद रखिए कफ, बुखार, गला खराब होना और नाक बहने के लक्षण निमोनिया में भी होते है। इसलिए घबराएं नहीं बेझिझक अपने डॉक्टर को बुलाए या मिलें। यदि निमोनिया के लक्षणों के साथ सांस लेने में तकलीफ, सीने में लगातार दर्द या भारीपन, भ्रम या जागने में असमर्थता, होंठ या चेहरा का नीला पड़ना या कोई ऐसा लक्षण, दिखे तो तत्काल चिकित्सक से मिले। यह ध्यान रखें 10 वर्ष से कम और 65 साल से अधिक उम्र के लोग, अस्थमा, मधुमेह तथा कैंसर के रोगी या फेफड़े, ह्रदय, किडनी, रोग से पीड़ित लोगों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि इनमें रोग रोधी क्षमता कमजोर होती है। तत्काल अपने डॉक्टर से संपर्क करें। आपके डॉक्टर आपकी हालत देख कर उचित परामर्श देंगे कि कहां और कैसा इलाज चाहिए। लॉक डाउन का अनुपालन करें, सतर्क रहें, सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें।
वैनी मे बीती रात व्यवसाई पर चली गोली। महज संयोग ही था कि गोली कांच और सीट फड़ती हुई दूसरी और से निकाल गई। बताते है कि विशनपुर कैंजिया निवासी हार्डवेयर सह इलेक्ट्रिक गुड्स व्यवसाई चंदन सिंह रोज के तरह बीती देर शाम अपनी कार से घर लौट रहे थे। इसी बीच बैनी कैंजीया सीमा स्थित जमुआरी नदी के निकट पहले से घात लगाए अपराधियों ने उनपर गोली चला दी। पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है।
समस्तीपुर आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष केशव किशोर प्रसाद के माता का देहांत दिल का दौरा पड़ने से हो गया वे 75 साल की थे आज सिमरिया घाट पर मुखाग्नि दिया गया।इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
कोरोना के भय से नागरिकता कानून के खिलाफ जारी सत्याग्रह आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा. इससे बचाव हेतु कोशिश अवश्य की जाएगी. सरकार कोरोना का आतंक दिखाकर देश में जारी आंदोलन के साथ मंदी से निबटने चाहती है. रेल, फ्लाइट, जेल, कल- कारखाने, कंपनी, प्रखंड, अंचल, मंडी, हाट आदि में बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता है. इस पर सरकार अपनी रणनीति का खुलासा करे. कोरोना से डरने के बजाय इसे निपटने के लिए सरकार एवं प्रशासन को कोशिश करनी चाहिए. इसका डर दिखाकर मास्क, सेनीटाइजर आदि का कालाबाजार खुलेआम जारी है और सरकार एवं प्रशासन मौन है. जहां तक सत्याग्रह आंदोलन समाप्त करने का सवाल है. यह जारी रहेगा. सत्याग्रह आंदोलन को सुरक्षा मानक को ध्यान में रखकर कम से कम लोगों द्वारा भी जारी रखा जाएगा. फिर हमारा नजर दिल्ली शाहीन बाग समेत देश के अन्य आंदोलनों पर भी है. इसके लिए जल्द बैठक बुलाकर निर्णय लिया जाएगा।
9 जनवरी को मानव श्रृंखला में मृत महिला(जितवारपुर, हक़ीमबाद) के परिजनों को चेक देकर अब तक राशि देने से बैंक को समस्तीपुर सीओ रोक रखें हैं । पीड़ित परिवार ने डीएम के साथ साथ स्थानीय विधायक से लगा चुका हैं कई बार न्याय की गुहार। दो बार चेक बैंक के द्वारा वापस किया गया हैं। और बैंक वाले ने कहा हैं कि सीओ के द्वारा रोक लगाया गया हैं। पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटक रहा हैं।इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। संस्कृत में एक श्लोक है- 'यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता:। अर्थात्, जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। किंतु वर्तमान में जो हालात दिखाई देते हैं, उसमें नारी का हर जगह अपमान होता चला जा रहा है। उसे 'भोग की वस्तु' समझकर आदमी 'अपने तरीके' से 'इस्तेमाल' कर रहा है। यह बेहद चिंताजनक बात है। लेकिन हमारी संस्कृति को बनाए रखते हुए नारी का सम्मान कैसे किय जाए, इस पर विचार करना आवश्यक है। मां अर्थात माता के रूप में नारी, धरती पर अपने सबसे पवित्रतम रूप में है। माता यानी जननी। मां को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है, क्योंकि ईश्वर की जन्मदात्री भी नारी ही रही है। मां देवकी (कृष्ण) तथा मां पार्वती (गणपति/ कार्तिकेय) के संदर्भ में हम देख सकते हैं इसे। अगर आजकल की लड़कियों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि ये लड़कियां आजकल बहुत बाजी मार रही हैं। इन्हें हर क्षेत्र में हम आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है । विभिन्न परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में लड़कियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। किसी समय इन्हें कमजोर समझा जाता था, किंतु इन्होंने अपनी मेहनत और मेधा शक्ति के बल पर हर क्षेत्र में प्रवीणता अर्जित कर ली है। इनकी इस प्रतिभा का सम्मान किया जाना चाहिए। किंतु बदलते समय के हिसाब से संतानों ने अपनी मां को महत्व देना कम कर दिया है। यह चिंताजनक पहलू है। सब धन-लिप्सा व अपने स्वार्थ में डूबते जा रहे हैं। परंतु जन्म देने वाली माता के रूप में नारी का सम्मान अनिवार्य रूप से होना चाहिए, जो वर्तमान में कम हो गया है, यह सवाल आजकल यक्षप्रश्न की तरह चहुंओर पांव पसारता जा रहा है। इस बारे में नई पीढ़ी को आत्मावलोकन करना चाहिए। नारी का सारा जीवन पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में ही बीत जाता है। पहले पिता की छत्रछाया में उसका बचपन बीतता है। पिता के घर में भी उसे घर का कामकाज करना होता है तथा साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखनी होती है। उसका यह क्रम विवाह तक जारी रहता है। उसे इस दौरान घर के कामकाज के साथ पढ़ाई-लिखाई की दोहरी जिम्मेदारी निभानी होती है, जबकि इस दौरान लड़कों को पढ़ाई-लिखाई के अलावा और कोई काम नहीं रहता है। कुछ नवुयवक तो ठीक से पढ़ाई भी नहीं करते हैं, जबकि उन्हें इसके अलावा और कोई काम ही नहीं रहता है। इस नजरिए से देखा जाए, तो नारी सदैव पुरुष के साथ कंधेसे कंधा मिलाकर तो चलती ही है, बल्कि उनसे भी अधिक जिम्मेदारियों का निर्वहन भी करती हैं। नारी इस तरह से भी सम्माननीय है। विवाह पश्चात तो महिलाओं पर और भी भारी जिम्मेदारियां आ जाती है। पति, सास-ससुर, देवर-ननद की सेवा के पश्चात उनके पास अपने लिए समय ही नहीं बचता। वे कोल्हू के बैल की मानिंद घर-परिवार में ही खटती रहती हैं। संतान के जन्म के बाद तो उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। घर-परिवार, चौके-चूल्हे में खटने में ही एक आम महिला का जीवन कब बीत जाता है, पता ही नहीं चलता। कई बार वे अपने अरमानों का भी गला घोंट देती हैं घर-परिवार की खातिर। उन्हें इतना समय भी नहीं मिल पाता है वे अपने लिए भी जिएं। परिवार की खातिर अपना जीवन होम करने में भारतीय महिलाएं सबसे आगे हैं। परिवार के प्रति उनका यह त्याग उन्हें सम्मान का अधिकारी बनाता है। बच्चों में संस्कार भरने का काम मां के रूप में नारी द्वारा ही किया जाता है। यह तो हम सभी बचपन से सुनते चले आ रहे हैं कि बच्चों की प्रथम गुरु मां ही होती है। मां के व्यक्तित्व-कृतित्व का बच्चों पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार का असर पड़ता है। इतिहास उठाकर देखें तो मां पुतलीबाई ने गांधीजी व जीजाबाई ने शिवाजी महाराज में श्रेष्ठ संस्कारों का बीजारोपण किया था। जिसका ही परिणाम है कि शिवाजी महाराज व गांधीजी को हम आज भी उनके श्रेष्ठ कर्मों के कारण आज भी जानते हैं। इनका व्यक्तित्व विराट व अनुपम है। बेहतर संस्कार देकर बच्चे को समाज में उदाहरण बनाना, नारी ही कर सकती है। अत: नारी सम्माननीय है। आजकल महिलाओं के साथ अभद्रता की पराकाष्ठा हो रही है। हम रोज ही अखबारों और न्यूज चैनलों में पढ़ते व देखते हैं, कि महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की गई या सामूहिक बलात्कार किया गया। इसे नैतिक पतन ही कहा जाएगा। शायद ही कोई दिन जाता हो, जब महिलाओं के साथ की गई अभद्रता पर समाचार न हो। क्या कारण है इसका? प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिन-पर-दिन अश्लीलता बढ़ती जा रही है। इसका नवयुवकों के मन-मस्तिष्क पर बहुत ही खराब असर पड़ता है। वे इसके क्रियान्वयन पर विचार करने लगते हैं। परिणाम होता है दिल्ली गैंगरेप जैसा जघन्य व घृणित अपराध। नारी के सम्मान और उसकी अस्मिता की रक्षा के लिए इस पर विचार करना बेहद जरूरी है, साथ ही उसके सम्मान और अस्मिता की रक्षा करना भी जरूरी है। कतिपय 'आधुनिक' महिलाओं का पहनावा भी शालीन नहीं हुआ करता है। इन वस्त्रों के कारण भी यौन-अपराध बढ़ते जा रहे हैं। इन महिलाओं का सोचना कुछ अलग ढंग का हुआ करता हैं। वे सोचती हैं कि हम आधुनिक हैं। यह विचार उचित नहीं कहा जा सकता है। अपराध होने यह बात उभरकर सामने नहीं आ पाती है कि उनके वस्त्रों के कारण भी यह अपराध प्रेरित हुआ है। देवी अहिल्याबाई होलकर, मदर टेरेसा, इला भट्ट, महादेवी वर्मा, राजकुमारी अमृत कौर, अरुणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी और कस्तूरबा गांधी आदि जैसी कुछ प्रसिद्ध महिलाओं ने अपने मन-वचन व कर्म से सारे जग-संसार में अपना नाम रोशन किया है। कस्तूरबा गांधी ने महात्मा गांधी का बायां हाथ बनकर उनके कंधे से कंधा मिलाकर देश को आजाद करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
