बिहार राज्य के जिला समस्तीपुर के विद्यापतिनगर से रतन शंकर मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि विद्यापतिनगर प्रखंड क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय कटहा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के आदेशानुसार बूस्टर डोज वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 169 लोगों ने बूस्टर डोज लगवाई। विद्यालय के संचालक परिवार, प्रधानाध्यापक, विद्यार्थी व नगरवासियों ने टीका लगवाया। 18 से 59 आयु वालों को निजी अस्पतालों में शुल्क देकर डोज लगवानी पड़ रही थी। लेकिन, अब सरकार के निर्देश बाद से जिन्हें दोनों डोज लगवाए हुए 6 माह बीत चुके इस आयु वर्ग को भी निशुल्क बूस्टर डोज लगाना शुरू हो गया है। सोमवार को प्रखंड में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कटहा विद्यालय पर व्यस्कों को बूस्टर डोज लगाने की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा जिन लोगों की प्रथम व दूसरी शेष रही, उनका भी टीकाकरण किया गया।बूस्टर डोज पाने वाले लाभार्थियों ने कहा कि कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन जरूरी है। इसके अलावा बूस्टर डोज लगाने का सरकार का निर्णय सराहनीय है।केंद्र पर स्टाफ की कमी के चलते भी टीकाकरण कार्य तेजी से नहीं हो सका।

विद्यापतिनगर। प्रखंड अंतर्गत खनुआ स्थित वाया नदी पर नवनिर्मित खनुआ पुल का निर्माण पूरा होने के 10 साल बाद भी एप्रोच रोड का कार्य संपन्न नहीं हो पाया। पुल के उत्तर तरफ कार्य पूरा हो गया है, जबकि दक्षिण की तरफ कार्य अधूरा है। इससे राहगीरों को आवागमन में काफी परेशानियां हो रही हैं। विशेषकर, बाढ़ व बरसात के इस मौसम में उनके लिए सफर करना बेहद कष्टदायक हो रहा है। संपर्क पथ बनाने में लगी कंपनी की मानें तो पुल के दक्षिण दिशा में बने एप्रोच रोड का भी पक्कीकरण करने का कार्य एक सप्ताह पूर्व से शुरू कर दिया गया हैं।पुल के दोनों तरफ एप्रोच रोड बनाने में लगी कंपनी धरातल पर कार्यों को मूर्त रूप देने में लगी है। लेकिन, 10 साल बाद भी एप्रोच रोड के पक्कीकरण का कार्य पूरा नहीं हुआ। पुल के उत्तरी छोर के एप्रोच रोड का मिट्टीकरण का कार्य पूरा हो गया है। दक्षिणी छोर के एप्रोच रोड के पक्कीकरण का कार्य अभी अधूरा है। कंपनी के मुंशी ने बताया कि लगभग साढ़े अठारह सौ मीटर लंबे अधूरे एप्रोच रोड के मिट्टीकरण का कार्य एक सप्ताह के अंदर पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि नदी में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए काम युद्धस्तर पर ही रहा हैं। 10 दिनों के अंदर हर हाल में काम पूर्ण कर लिया जाएगा। वैसे पानी के दस्तक देने के बाद दियारावासी आवागमन को लेकर काफी चिंतित हैं। उन्हें बाढ़ की चिंता सता रही है। चूंकि, पुल की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि बरसात में बाढ़ आने पर दक्षिण दिशा के एप्रोच रोड का डूबना लगभग तय है।

विद्यापतिनगर। प्रखंड में मिर्ची की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है क्योंकि ज्यादा उत्पादन के चलते इस मसाला फसल के थोक दाम इस कदर गिर गए हैं कि उनके लिए इसके उत्पादन और इसे खेत से तुड़वाने की लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। दियारा क्षेत्र के किसान शिवशंकर राय द्वारा बृहत पैमाने पर मिर्ची की खेती करते हैं। जिन्होंने पांच एकड़ में मिर्च बोई है। उन्होंने सोमवार को बताया कि इस वक्त हरी मिर्च का थोक खरीदी मूल्य 15 से 17 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच चल रहा है, जबकि हमें एक किलोग्राम मिर्च उगाने में करीब 11 रुपये की लागत आती है और मजदूर इसे खेत से तोड़ने के बदले पांच रुपये किलोग्राम का मेहनताना लेते हैं। मिर्च की खेती से मालामाल दियारा गांव के किसान अब बेहाल हैं। गंगा में बाढ़ आने के डर से सस्ते ने मिर्ची तोर बेचने को मजबूर हैं तो वहीं डीजल की बेतहाश बढ़ती कीमतों ने उन्हें बड़ी मुसीबत में डाल दिया है। इस गांव के करीब 50 किसान करीब 100 बीघे में मिर्ची की खेती करते हैं। मुख्य रूप से टमाटर, मिर्च और मटर की खेती के लिए मशहूर इस गांव के किसानों की मुश्किल यह है कि जुताई, सिंचाई और सब्जियों की ढुलाई का काम डीजल के भरोसे है और उसका दाम आसमान छू रहा है। खेत की जुताई से लेकर मिर्ची की ढुलाई गाड़ियों से होती है, जिसके भाड़े में बीस रोज में भारी बढ़ोतरी हुई है। महंगा हो रहा डीजल कहां तक जाएगा, यह हमें पता नहीं, लेकिन किसानों के लिए यह बढ़ोतरी किसी मुसीबत से कम नहीं है।

विद्यापतिनगर। गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से सहायक वाया नदी के दक्षिणी बांध की ओर बसे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। इसी रफ्तार से अगर जलस्तर में वृद्धि होती रही तो दो से तीन दिनों में पुन: एक बार बाढ़ की विभीषिका विद्यापतिनगर प्रखंड की 3 पंचायत के लोगों को झेलनी पड़ेगी। गंगा नदी के जलस्तर में अचानक आयी उफान से बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है। गंगा अब विकराल रूप धारण कर ली है। रविवार की शाम से जलस्तर बढ़ने की खबर मिलने के बाद अब गंगा चेतावनी बिंदु के पास पहुंच आंखें दिखाना शुरू कर दिया है और जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए गंगा के सहायक वाया नदी किनारे रहने वाले अपना आशियाना समेटकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचने लगे है। बता दें की प्रखंड के इलाकों के लगभग दर्जनों गांव के लोग बाढ़ का नाम सुनते ही सहम जाते हैं। बाढ़ की आपदा में सरकारी महकमा भी पूरी तरह फेल हो जाता है। घरों के अंदर घुसे पानी के बीच हजारों लोगों की जिंदगानी होती है। छत पर या सड़क किनारे लोग तिरपाल टांग कर किसी तरह शरण लेते हैं। बहुत से लोग घरों में ही पानी के बीच जमे रहते हैं। गंंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। गंगा की स्थिति पिछले साल की तरह, इस साल भी होता देखकर ग्रामीण सतर्क होने लगे है। इससे इस बात की आशंका जतायी जा रही है कि आने वाले कई दिनों में जलस्तर अभी लगातार बढ़ता ही रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में दियारावासियों के लोगों को बाढ़ की मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है।

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सेना में अग्निवीरों की तर्ज पर अब बैंकों में भी कर्मचारियों की बहाली होगी। यह कर्मचारी कॉन्ट्रेक्ट पर रखे जाएंगे । देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई अपना खर्च कम करने को मानव संसाधन संबंधित मुद्दों के लिए अलग कंपनी शुरू करने जा रहा है। स्टेट बैंक की ऑपरेशन और सपोर्ट सब्सिडियरी को हाल ही में आरबीआई से सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। कंपनी ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंक शाखाओं में कर्मचारियों का प्रबंधन करेगी।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

राज्य के सरकारी और प्राइवेट बीएड कॉलेजों में नामांकन लेने वाले हजारों छात्र परेशान हैं। उनकी परेशानी का कारण बीएड नामांकन की काउंसिलिंग में स्लाइडअप (स्विचओवर या विकल्प छोड़ना) का मौका नहीं दिया जाना है। नोडल विश्वविद्यालय ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने पहली बार काउंसिलिंग में स्लाइडअप और स्पॉट राउंड की छूट खत्म कर दी है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

आज़ादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत दिनांक 20.08.2022 को समस्तीपुर महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना के नेतृत्व में दो कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पूर्वाह्न में 'आपदा सुरक्षा प्रशिक्षण' कार्यक्रम में श्री सुरेंद्र सिंह एवं उनकी टीम (अग्निशमन सेवा समस्तीपुर), ने विभिन्न प्रकार की आपदाओं, उनसे बचाव एवं विभिन्न कार्य-प्रणालियों की जानकारी दी। एनसीसी कैडेट्स, एनसीसी उड़ान के स्वंयसेवक , राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक तथा अन्य विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर प्रशिक्षण का लाभ उठाया।

विद्यापतिनगर प्रखंड क्षेत्र में नीलगाय के उत्पात के कारण किसानों के खेतीबाड़ी महंगा सौदा बन गया है। किसानों काे अपनी फसलाें काे बचाने के लिए प्रति एकड़ 50 से 60 हजार रुपए तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। खेतों में कंटीले तारों की बाड़बंदी से लेकर तरह-तरह के जुगाड़ किसानों को करने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद फसल बच जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है। बाड़ लगाने के लंबे समय बाद उसके पुराने हाेने या किसी भी हिस्से के क्षतिग्रस्त हाेने पर नीलगाय खेत में घुस जाते हैं और फसल को बर्बाद कर देते हैं। जिससे अंतिम समय में फसल काे बचाना मुश्किल हाे जाता है। गढ़सिसई के किसान हरेराम महतो ने बताया कि पहले खेतों में कपड़े पहनाकर पुतला खड़ा कर देने पर नीलगाय नहीं आता था। लेकिन, अब उसका काेई असर नहीं है। अब खेत को चाराें तरफ से घेराबंदी करनी पड़ रही है। बांस-बल्ले व तार घुसकर फसल बर्बाद कर देते हैं। इसको देखते हुए खेतों के चाराें ओर से नेट (जाल) से घेरना पड़ रहा है। नेट के अंदर मजबूत खूंटा देने के कारण इसपर औैर अधिक खर्च आता है। घेराबंदी कराने पर प्रति एकड़ 50 से 60 हजार रुपए तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।

विद्यापतिनगर। थाना परिसर में भूमि विवाद से संबंधित मामलों के निष्पादन के लिए सीओ अजय कुमार एवं थानाध्यक्ष प्रसुनजय कुमार की मौजूदगी में शनिवार को जनता दरबार का आयोजन किया गया। जिसमें दाखिल परिवाद की सुनवाई सीओ एवं थानाध्यक्ष ने संयुक्त रूप से किया। नए मामलों में जहां संबंधित दूसरे पक्ष को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के अगली सुनवाई में बुलाया गया। वहीं पूर्व में दाखिल परिवाद में दोनों पक्षों की बात सुनने के साथ ही भूमि विवाद के मामले में प्रस्तुत कागजात का अवलोकन किया गया। आयोजित जनता दरबार में कुल तीन मामले आये जिसमें तीनों मामलों का भी निष्पादन किया गया। सीओ ने बताया कि जनता दरबार में तीन मामले देखें गए। जिनका जनता दरबार में तीनों मामलों का निष्पादन हुआ। इस मौके पर सीआइ गोपाल गिरधारी एवं क्षेत्र के फरियादी मौजूद रहे।