विद्यापतिनगर। प्रखंड में मिर्ची की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है क्योंकि ज्यादा उत्पादन के चलते इस मसाला फसल के थोक दाम इस कदर गिर गए हैं कि उनके लिए इसके उत्पादन और इसे खेत से तुड़वाने की लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। दियारा क्षेत्र के किसान शिवशंकर राय द्वारा बृहत पैमाने पर मिर्ची की खेती करते हैं। जिन्होंने पांच एकड़ में मिर्च बोई है। उन्होंने सोमवार को बताया कि इस वक्त हरी मिर्च का थोक खरीदी मूल्य 15 से 17 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच चल रहा है, जबकि हमें एक किलोग्राम मिर्च उगाने में करीब 11 रुपये की लागत आती है और मजदूर इसे खेत से तोड़ने के बदले पांच रुपये किलोग्राम का मेहनताना लेते हैं। मिर्च की खेती से मालामाल दियारा गांव के किसान अब बेहाल हैं। गंगा में बाढ़ आने के डर से सस्ते ने मिर्ची तोर बेचने को मजबूर हैं तो वहीं डीजल की बेतहाश बढ़ती कीमतों ने उन्हें बड़ी मुसीबत में डाल दिया है। इस गांव के करीब 50 किसान करीब 100 बीघे में मिर्ची की खेती करते हैं। मुख्य रूप से टमाटर, मिर्च और मटर की खेती के लिए मशहूर इस गांव के किसानों की मुश्किल यह है कि जुताई, सिंचाई और सब्जियों की ढुलाई का काम डीजल के भरोसे है और उसका दाम आसमान छू रहा है। खेत की जुताई से लेकर मिर्ची की ढुलाई गाड़ियों से होती है, जिसके भाड़े में बीस रोज में भारी बढ़ोतरी हुई है। महंगा हो रहा डीजल कहां तक जाएगा, यह हमें पता नहीं, लेकिन किसानों के लिए यह बढ़ोतरी किसी मुसीबत से कम नहीं है।