विद्यापतिनगर प्रखंड क्षेत्र में नीलगाय के उत्पात के कारण किसानों के खेतीबाड़ी महंगा सौदा बन गया है। किसानों काे अपनी फसलाें काे बचाने के लिए प्रति एकड़ 50 से 60 हजार रुपए तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। खेतों में कंटीले तारों की बाड़बंदी से लेकर तरह-तरह के जुगाड़ किसानों को करने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद फसल बच जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है। बाड़ लगाने के लंबे समय बाद उसके पुराने हाेने या किसी भी हिस्से के क्षतिग्रस्त हाेने पर नीलगाय खेत में घुस जाते हैं और फसल को बर्बाद कर देते हैं। जिससे अंतिम समय में फसल काे बचाना मुश्किल हाे जाता है। गढ़सिसई के किसान हरेराम महतो ने बताया कि पहले खेतों में कपड़े पहनाकर पुतला खड़ा कर देने पर नीलगाय नहीं आता था। लेकिन, अब उसका काेई असर नहीं है। अब खेत को चाराें तरफ से घेराबंदी करनी पड़ रही है। बांस-बल्ले व तार घुसकर फसल बर्बाद कर देते हैं। इसको देखते हुए खेतों के चाराें ओर से नेट (जाल) से घेरना पड़ रहा है। नेट के अंदर मजबूत खूंटा देने के कारण इसपर औैर अधिक खर्च आता है। घेराबंदी कराने पर प्रति एकड़ 50 से 60 हजार रुपए तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।