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दिनेश की हापुड़ निवासी पीड़िता की मां से कोई बातचीत
अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
दिल्ली के जहांगीरपुरी से मूर्ति ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इनके पड़ोस में एक महिला के पति की मृत्यु हो गयी जिसके बाद उसके ससुराल वालों ने उसे घर ऐ निकाल दिया और अब उसके मायके वाले भी उसे रखने के लिए तैयार नहीं हैं। इसलिए महिला को ससुराल और मायके पक्ष से प्रॉपर्टी में हिस्सा मिलना चाहिए।
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दिल्ली के सीमापुरी से कविता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को माँ के प्रॉपर्टी में हिस्सा मिलना चाहिए क्योंकि पति परेशान और मारते -पीटते हैं। अधिकार मिलने पर वह अपना पालन पोषण कर सकती है
दिल्ली के सीमापुरी से कविता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को प्रॉपर्टी में हिस्सा मिलना चाहिए ताकि वह अपना पालन पोषण कर सकती हैं कई महिलाओं के पति मारते और परेशान करते हैं।
दिल्ली के नई सीमापुरी से रेनू ने मोबाइल वाणी के माध्यम से महिला संपत्ति अधिकार पर राय साझा किया।रेनू ने बताया कि इनके पति इनको बहुत परेशान करते हैं। लड़कियों को मायके से अपना हिस्सा ले लेना चाहिए।
आपदा राहत के दौरान भी महिलाओं की स्थिति चुनौतीपूर्ण रहती है। राहत शिविरों में कई बार अकेली महिलाओं, विधवाओं या महिला-प्रधान परिवारों की जरूरतें प्राथमिकता में नहीं आतीं। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- जब किसी महिला के नाम पर घर या खेत होता है, तो परिवार या समाज में उसे देखने का नज़रिया किस तरह से बदलता है? *--- आपके हिसाब से एक गरीब परिवार, जिसके पास ज़मीन तो है पर कागज नहीं, उसे अपनी सुरक्षा के लिए सबसे पहले क्या कदम उठाना चाहिए?"? *--- "सिर्फ 'रहने के लिए छत होना' और उस छत का 'कानूनी मालिक होना'—इन दोनों स्थितियों में आप एक महिला की सुरक्षा और आत्मविश्वास में क्या अंतर देखते हैं?"
