गुरुग्राम से नन्द किशोर और इनके साथ एक मजदुर साथी है वे साझा मंच के माध्यम से बताते हैं कि लॉक डाउन के दौरान उन्हें कपंनी या सरकार की ओर से कोई राहत नहीं मिला जिसके कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा
दिल्ली एनसीआर के गुडगाँव के डूंडाहेड़ा से बीरेंदर कुमार ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि वो 2007 से 2009 तक एनसीओ कंपनी में कार्य किया था। उन्होंने यूएएन नंबर की माँग कंपनी से की तो कंपनी वाले मना कर दिए वहीं मैन्युअल की भी बात बोलने पर कंपनी से मनाही हो गई। उन्हें पीएफ निकलवाने में समस्या हो रही थी जिस पर कंपनी ने उन्हें एक नंबर दिया जो वैध नहीं था।दूसरी कंपनी में काम करने पर भी उनका 2012 तक का पीएफ नहीं निकल रहा है
दिल्ली गुरुग्राम से नन्द किशोर साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बीरेंद्र से 'मेरा मुखिया कैसा हो' पर चर्चा कर रहे हैं। बीरेंद्र का कहना है कि मुखिया पढ़ा-लिखा व ईमानदार होना चाहिए जिससे पंचायत विकास की ओर बढ़ सके। पूर्व के प्रधानों ने लाभुकों को इंद्रा आवास का लाभ नहीं दिलाया साथ ही नल जल योजना ,सड़क ,गली-नली को भी दुरस्त नहीं किया
दिल्ली उद्योग विहार गुरुग्राम से नन्द किशोर साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कंपनी में काम करने वाले श्रमिक से मोबाइल वाणी पर चलाये जा रहे कार्यक्रम 'मेरा मुखिया कैसा हो' के तहत ,बातचीत कर रहे हैं। श्रमिक चाहते हैं कि मुखिया ऐसा हो जो ईमानदार ,सभी का विकास ,रोजगार देने की पहल कर सके ,जिससे समाज भी उन्नत हो सके
दिल्ली के गुरुग्राम के सेक्टर 44 से दीपक ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है पीएफ ऑफिस के लंबित कार्य से श्रमिक परेशान है। अभी पीएफ ऑफिस में हर एक समस्या के लिए रजिस्टर बनाई गई है जिसमे एंट्री की जाती है । यहाँ देखना को मिलता है कि श्रमिकों के समस्या का हल होने में 40 से 50 दिन का समय लगता है। कभी कभी तो उनका समय और ज़्यादा बढ़ जाता है इससे श्रमिकों को बहुत समस्या होती है।
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम से राम करण ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि कंपनियों में जब जाँच के लिए टीमें आती है तो कम्पनियाँ अच्छे तरह से कंपनियों में सफ़ाई की जाती है। श्रमिकों के लिए सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। वहीं जाँच टीम के चले जाने के बाद कंपनियां दोबारा से अपने पुराने रवैये पर लौट आती है।कंपनियों की स्थितियाँ बद्द्तर हो जाती है
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम से राम करण ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि रविवार के दिन भी सड़कों पर सूनापन छाया हुआ था। श्रमिक लोग आज कल सड़कों पर नज़र नहीं आते है। काम की कमी के कारण बेरोज़गारी छाई हुई है
दिल्ली एनसीआर के उद्योग बिहार से नन्द किशोर साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से मोबाइल वाणी हमारा मुखिया कैसा हो के तहत युवा अनिल से बात कर रहे हैं। अनिल का कहना है की मुखिया वैसा होना चाहिए जो गाँव बेरोजगारी को दूर करे। साथ ही कह रहे है कि मुखिया का पढ़ा लिखा भी बहुत जरूरी है तभी गाँव का विकास संभव हो सकता हैं।
दिल्ली गुरुग्राम से नन्द किशोर साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से एक श्रमिक भाई बाबू लाल से वार्ता कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लॉक डाउन के दौरान सरकार द्वारा मनरेगा में दिए जाने वाले योजना के तहत उन्हें काम नहीं मिला। लॉक डाउन खत्म होने के बाद भी उन्हें काम नहीं मिल रहा है ।
दिल्ली गुरुग्राम से नन्द किशोर साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से एक श्रमिक भाई से वार्ता कर रहे हैं। श्रमिक ने बताया कि उन्हें गांव में भी काम नहीं मिला और शहर वापस आने के बावजूद उन्हें काम नहीं मिल रहा है

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यदि नियोक्ता आपके वेतन से पी.एफ काट रहा है, तो उसे आपको यू.ए.एन प्रदान करना अनिवार्य है, जैसे- आपकी वेतन पर्ची में आपका यू.ए.एन और पी.एफ कटौती का विवरण। लेकिन यदि आपके नियोक्ता आपको जवाब नहीं देता है, तो आप ई.पी.एफ.ओ की वेबसाइट पर "नो योर यू.ए.एन" विकल्प पर क्लिक कर इसे ऑनलाइन प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपके नियोक्ता द्वारा आपके पी.एफ खाते के साथ आपका आधार कार्ड या पैन कार्ड लिंक होना चाहिए या कम से कम आपके पास आपका पी.एफ नंबर होना चाहिए। दूसरा तरीका यह है कि आप अपने पी.एफ खाते के साथ पंजीकृत मोबाइल नंबर से 7738299899 पर "EPFOHO UAN" एस.एम.एस भेजकर आप अपना यू.ए.एन प्राप्त करने के साथ ही अपने पी.एफ खाते की शेष राशि की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। अगर ये चीजें भी काम नहीं कर रही हैं, तो आप पी.एफ कार्यालय से संपर्क कर उस कम्पनी में कार्यरत होने के सबूत के तौर पर अपना पहचान पत्र या अन्य कोई दस्तावेज़ संलग्न करते हुए इस संबंध में एक लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हम आपको सुझाव देना चाहते हैं कि यू.ए.एन प्राप्त करने के बाद आप अपना पी.एफ बैलेंस शीट भी निकालें ताकि आपको पता चले कि आपका पी.एफ सही तरीके से जमा हुआ है कि नहीं। कई बार कम्पनियाँ बिना पी.एफ का योगदान किये बिना अपने मजदूरों का पी.एफ काटती है और अंत में यू.ए.एन नहीं देती।
March 30, 2021, 4:29 p.m. | Tags: govt entitlements int-PAJ workplace entitlements