गांव आजीविका और हम के इस कड़ी में हम हमारे विशेषज्ञ जीवदास साहू द्वारा जानेंगे बैगन की अच्छी फसल के लिए कौन कौन से खाद का प्रयोग कर सकते हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
कोनार नहर सिंचाई परियोजना विष्णुगढ़ प्रखंड के जोबर,करगालो पंचायत में कोनार सिंचाई परियोजना के तहत नहर एवं पाइपलाइन निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया गया इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह कार्य होने पर इस क्षेत्र में कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि एवं रोजगार के कई द्वार खुलेंगे।
विष्णुगढ़ प्रखंड के बनासो बाजार टांड में बुधवार को हल्की आंधी तूफान व वर्षा होने से बिजली का खंभा गिरने से 50 वर्षीय सोहगी देवी की मौत घटनास्थल पर हो गया
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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से टेक नारायणा प्रसाद कुशवाहा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पहले किसान खेती बारी के साथ-साथ खुद पौधे और बीज अपने घरों में बनाने के काम करते थे। परन्तु बदलते मौसम के कारण अब किसान आलू,बैंगन,खीरा, गोभी,कद्दू,इत्यादि का फसल तो लगाते हैं,परन्तु खेतों में बीज उत्पन्न नहीं करते है। बीज के लिए कंपनी पर निर्भर रहते हैं। इससे किसान को काफी आर्थिक क्षति होने की संभावना बनी रही है। बदलते मौसम की दौर में किसानों को अपने घर में अपने तरीके से बीज बनाने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए
झारखण्ड राज्य के रांची से शेखर मंडल ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कभी सूखा तो कभी बाढ़भारतीय किसानों के लिए एक बड़ी प्रासदी है। जिससे फसलों के बर्बाद होने पर वे भारी कर्ज और मानसिक तनाव में आ जाते है बेमौसम बारिश बाढ़ और सूखे के कारण कृषि उपज घट रही है और खेती जोखिम भरी होती जा रही है। इससे ना केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि किसानों के अस्तित्व पर भी संकट आ जाता है। इन समस्याओं से निपटने के लिए लोगों को सामूहिक रूप से ग्राम सभा में जाना चाहिए और अपनी समस्याओं को हल करने का आग्रह करना चाहिए।
झारखण्ड राज्य के सिमडेगा ज़िला से सुप्रिया मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए सही फसल का चुनाव बहुत जरूरी हो गया है। मौसम का पैटर्न अनिश्चित है जैसे कभी सूखा, कभी बाढ़। ऐसे में किसानों को ऐसी फसलें अपनानी चाहिए जो कम पानी, गर्मी या नमी जैसी परिस्थितियों में भी अच्छी उपज दें सके । उन्हें सूखा और ताप-सहिष्णु फसलें जैसे ज्वार, बाजरा या चना अपनानी चाहिए। वर्षा जल संचयन से पानी को संरक्षित रखा जा सकता है ताकि जरूरत पड़ने पर सिंचाई की जा सके।मिश्रित खेती अपनाने से एक फसल खराब होने पर दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई संभव होती है।किसानों को फसल बीमा योजनाओं से भी जुड़े रहना चाहिए ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
झारखंड राज्य के लातेहार जिला के चंदवा प्रखंड के लोहसीना गाँव से सविता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि इनके गांव में लाह और पलास की खेती की जाती है ।यहां के किसान बेड़ और पलास के पेड़ पर लाह की खेती करती हैं ।इस गांव के लोग लाह की खेती कर के अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं ।कई लोगों के पास अपना लाह और पलास का पेड़ नहीं हैं जिसके कारण वे लोग दूसरे के लाह के पेड़ पर साझेदारी में माध्यम से खेती करते हैं और लाभ कमाते हैं । लाह की खेती लोग अधिक मात्रा में कर रहे हैं और लाभ कमा रहे हैं ।
झारखंड राज्य के लोहरदगा जिला के कायरो प्रखंड से सुनीता देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि बार बार मौसम के बदलने के कारण इसका प्रभाव खेती और किसानों पर पड़ता है ।इस वर्ष अधिक ठंड पड़ने के कारण मटर और आलू का फसल बर्बाद हो गया ।जिसके कारण किसानों को आर्थिक छती हुई ।अचानक गर्मी और ठंड के कारण किसानों को दोहरा मार झेलना पड़ता है ।जब बारिश ठीक से नहीं होती है तो किसान को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलता है ।उनको अन्य तरीकों से पानी का व्यवस्था करना पड़ता है ।
झारखण्ड राज्य के लोहरदगा जिला के भंडरा प्रखंड से पुष्पा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इन्होने मोबाइल वाणी पर बारिश के पानी बचाने के बारे में सुना और ये जानकारी इनको बहुत अच्छी लगी। भंडरा प्रखंड के कई किसानों ने खेतों में सरकार की मदद से छोटे - छोटे डोभा का निर्माण सिंचाई के लिए किया है।सरकार द्वारा डोभा निर्माण का पहल बहुत अच्छा और सराहनीय है।इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं। साथ ही गर्मी के मौसम में होने वाली पानी की किल्लत दूर हुई है। अब गर्मी में भी डोभा में पानी रहता है। जिससे पशुओं को लोग पानी पीला पाते हैं।बारिश के पानी को बचाने का पहल अन्य क्षेत्रों में भी होना चाहिए।
