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झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला के कसमार प्रखंड से हमारे श्रोता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जीपीडीपी ग्राम विकास पंचायत कार्यक्रम सरकार की एक बहुत महत्वपुर्ण योजना है। इसके माध्यम से गांव के विकास के लिए योजनायें बनाई जाती है। कौन सी योजना किस जरूरत के अनुसार होगी। इन सभी बातों का निर्णय ग्राम पंचायत लेता है। इसलिए गांव के सभी वयस्कों को जो 18 वर्ष से ऊपर के हैं। उन सभी को ग्राम सभा में शामिल हो कर अपना योगदान देना चाहिए। जब भी पंचायत में जीपीडीपी के तहत योजना बने या बैठक हो तो उसमें भाग ले कर अपने प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल और किन लोगों को सामजिक सुरक्षा योजना का लाभ मिलना चाहिए। कहाँ पर सड़कें,नली गली,अस्पताल,स्कूल बनना चाहिए। सभी की प्लानिंग पंचायत में ही होती है। इसलिए ग्राम सभा में भाग ले कर गांव के विकास में अपनी भूमिका निभानी चाहिए

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विष्णुगढ़ प्रखंड मुख्यालय सभागार में पंचायती राज विभाग के द्वारा पंचायत सहायक मुखिया पंचायत सचिव को चार दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हो गया जिसे सभी पंचायत को सुदृढ़ीकरण डिजिटल पंचायत के अनुरूप केंद्र सरकार राज्य सरकार के द्वारा चलाए जा रहे हैं कल्याणकारी योजनाओं के बारे में अत्यंत गरीब वर्ग के लोगों को जागरुक करते हुए उन्हें लाभान्वित करने पर बल दिया गया प्रशिक्षण में स्वाति सिंह मुखिया उत्तम महतो चेतलाल महतो चंद्रशेखर महतो पंचायत सहायक उर्मिला कुमारी गीता देवी हेमंती देवी समेत बड़ी संख्या में पंचायत सहायक मौजूद रहे सफल प्रशिक्षण के दौरान मुखिया पंचायत सहायकों को राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत प्रमाण पत्र वितरण किया गया।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत प्रदेश की पहचान एक कृषि प्रधान देश के तौर पर जानी जाती है।किसानो के हाल बेहाल हैं। आज किसानों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नेतागण किसानों की समस्याओं को नहीं समझते हैं। किसानो को सिर्फ दौड़ाया जाता है और समाधान नहीं होता है।

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झारखण्ड राज्य के खूंटी जिला के तोरपा प्रखंड के कोंडा गांव से सुमित टोपनो मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कार्यक्रम "हाट बात " में लोगों से सम्बंधित बातें की गईं हैं। मौसम में अधिक परिवर्तन हो रहे हैं। कभी अधिक गर्मी और कभी अधिक बारिश हो जाता है जिसके कारण फसल बर्बाद हो रहे हैं। लेकिन लोगों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि कई लोग बाहर जा कर काम करते हैं और सरकार के द्वारा भी उनको राशन दे दिया जाता है।इनको इस कार्यक्रम के माध्यम से यह सिखने के लिए मिला कि प्रखंड स्तर पर कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पंचायत भी होती है। इनको लगता है कि इनके गांव में डेवलपमेंट के लिए कोई प्लान नहीं है और न ही कोई विकास हुआ है।गांव के लोगों को पता ही नहीं है कि अपनी समस्याओं को पंचायत में कैसे रखना है। इनको कार्यक्रम के माध्यम से पंचायत में समस्याओं को रखने की प्ररेणा मिली है और वह अब अपनी बातों को पंचायत में रखेंगे