क्या आपके गाँव या मोहल्ले में किसी महिला ने अपने नाम पर जमीन या घर के कागज़ बनवाने की कोशिश की है? क्या उसका जीवन बदला? क्या परिवार का व्यवहार बदला? क्या बेटियों और बहुओं का नाम जमीन और घर के कागज़ में होना चाहिए? कैसे परिवार मजबूत होगा? आपकी राय भले ही पक्ष में हो विपक्ष में अपनी राय जरूर रिकार्ड करें। राय रिकॉर्ड करने के लिए अपने फोन से 3 नंबर का बटन दबाएँ या मोबाइल वाणी ऐप में लाल बटन दबाकर अपनी बात रिकॉर्ड करें।

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के श्रीदत्तगंज प्रखंड के गोमढ़ि से 21 वर्षीय ज्योति मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होनी चाहिए

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के श्रीदत्तगंज प्रखंड के सोनपुर से 25 वर्षीय अहम जयसवाल मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि गाँव की जमीन महिलाओं के नाम भी होनी चाहिए।

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के श्रीदत्तगंज प्रखंड के ग्राम गुमड़ी से 19 वर्षीय हिमांशी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होनी चाहिए।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को शिक्षित करना बहुत जरूरी है। उनको उन्हें उनके कानूनी अधिकारों जैसे संपत्ति का अधिकार, कार्यस्थल पर सुरक्षा और भरण पोषण के बारे में जानकारी देना चाहिए दूसरा जो आर्थिक आत्मनिर्भरता -इसमें स्वयं निर्णय लेने की आर्थिक संतत्रता बहुत जरूरी है। महिलाओं को नौकरी स्वरोजगार या किसी न किसी हुनर के माध्यम से आय अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को अपने निर्णय स्वयं लेने और सशक्त बनने के लिए शिक्षा, आर्थिक ,आत्मनिर्भरता और कानूनी अधिकारों की जानकारी अत्यंत आवश्यक है। उन्हें आत्मविश्वास बढ़ाने ,आत्म संदेश छोड़ने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की जरूरत है। इसके लिए परिवार और समाज को उनका समर्थन करना चाहिए

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने की बहुत जरुरत है। इसका पहला कारण है लैंगिक समानता और मानवाधिकार।इसमें महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार,शिक्षा और अवसर प्रदान करना ना केवल एक मौलिक मानवाधिकार है,बल्कि एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है। दूसरा कारण है आर्थिक विकास और सशक्तिकरण। महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल में भागीदारी बढ़ाकर परिवार और राष्ट्र की आय में वृद्धि साझा की जा सकती है। जिससे गरीबी कम होती है और आर्थिक विकास को गति मिलती है।

उत्तर प्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से कामिनी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इनको पैतृक सम्पत्ति में हिस्सा नही मिल रहा था।फिर इन्होने मोबाइल वाणी पर महिला सम्पत्ति अधिकार से सम्बंधित कार्यक्रम सुना और मोबाइल वाणी संवाददाता के.सी.चौधरी से इस बारे में बात की।के.सी.चौधरी ने वकील से बात किया और अधिकार के लिए प्रयास शुरू किया। तमाम कठिनाइयों के बाद दो महीने पहले कामिनी को पैतृक सम्पत्ति में हिस्सा मिल गया।इस घटना के बाद भैया से इनका रिश्ता ख़त्म हो गया है। पिता का देहांत पहले ही हो चूका था।कामिनी के पति ने हमेशा इनका ध्यान रखा है। मगर ननद के व्यवहार का जवाब देने के लिए इन्होने अपने पैतृक सम्पत्ति में हिस्सा लेने का मन बनाया था।

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