झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारतीय संविधान के तहत प्रत्येक महिला को समानता और सुरक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त है। अधिकारों में समान वेतन, शिक्षा और सम्पत्ति का अधिकार भी शामिल है।वर्तमान में महिलाओं को शिक्षा तो मिल रहा है, लेकिन सम्पत्ति के अधिकार से वो वंचित है।कानून ने महिलाओं को जमीन में हक़ दिया है। मगर यथार्थ में महिलाओं के नाम जमीन नही होती है और ना ही जमीन सम्बंधित कोई भी एक्शन लेने का हक या अधिकार होता है। जमीन में नाम ना होने के कारण महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे बैंक से लोन मिलने में कठिनाई,इत्यादि।

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उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला के श्रीदत्तगंज ब्लॉक के गुमड़ी पंचायत से अठारह वर्षीय आस्था ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के नाम जमीन होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला के श्रीदत्तगंज ब्लॉक के गुमड़ी पंचायत से अठारह वर्षीय उजाला वर्मा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से अठारह वर्षीय आस्था से साक्षात्कार लिया।आस्था जानना चाहती हैं कि महिलाओं के नाम जमीन होनी चाहिए। इसमें सरकार इनकी क्या मदद कर सकती है ?

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला के श्रीदत्तगंज ब्लॉक के गुमड़ी पंचायत से उजाला वर्मा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से अठारह वर्षीय संध्या से साक्षात्कार लिया।संध्या ने बताया कि महिलाओं के नाम जमीन होना चाहिए

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के श्रीदत्तगंज प्रखंड के गुमड़ी ग्राम से 30 वर्षीय गीता यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होनी चाहिए।

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के श्रीदत्तगंज प्रखंड के गुमड़ी ग्राम से 18 वर्षीय उजाला मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से 20 वर्षीय खुशबू की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से 21 वर्षीय चांदनी कुमारी से हुई। उजाला चांदनी कुमारी यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं के नाम से जमीन होना चाहिए

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में 80 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं कृषि क्षेत्र में हैं।लेकिन भूमि पर मालिकाना हक न होने और पुरुष प्रधान सामाजिक संरचना के कारण उन्हें किसान के रूप में मान्यता नहीं मिलती है।जमीनें आमतौर पर पिता,भाई या पति के नाम होती है।जिससे वे सरकारी योजनाओं,कर्ज और कृषि ऋण माफी जैसे अधिकारों से वंचित रह जाती हैं।भले ही वो खेती का अधिकांश कार्य करती हैं,फिर भी महिलाओं को जमीन का अधिकार नही दिया जाता है

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