झारखण्ड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाएं खेत में हर तरह की काम करती हैं लेकिन उनको सिर्फ मजदूर ही समझा जाता है। महिलाओं के आवाज़ को दबा दिया जाता है। महिला खुद के खेत में काम करती है और पैसा कमाती है फिर भी उनको मजदूर के रूप में ही देखा जाता है

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भूमि अधिकारों की सुरक्षा महिलाओं को सामाजिक रूप से सशक्त बनाती है। भूमि स्वामित्व की सुरक्षित अधिकार महिलाओं की सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाते हैं और उन्हें सामुदायिक स्तर पर निर्णय लेने में भाग लेने का अवसर प्रदान करते हैं। सामुदायिक शासन में उनकी भागीदारी से उनके ज्ञान और विचारों को निर्णय लेने की प्रक्रिया शामिल किया जा सका है जिससे निर्णयों की गुणवत्ता बढ़ती है और महिलाएं को सशक्त बनाती है।

विष्णुगढ़ प्रखंड के बनासो केंद्रीय सदस्य गौरव पटेल के आवास में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना दिवस मनाने को लेकर बैठक की गई बताते चलें की 4 अप्रैल को हजारीबाग के जिला स्कूल मैदान में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा कार्यक्रम को सफल बनाने को लेकर सभी पंचायत एवं बुथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक किया गया बैठक में मुख्य रूप से गौरव पटेल महताब आलम कपिल देव चौधरी संजय प्रजापति देवी राम हेमरोम समेत बड़ी संख्या में झामुमो के कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि देश में सतत विकास लक्ष्यों को अपनाने के साथ ही विशेष रूप से कृषि भूमि पर महिलाओं के भूमि अधिकारों के महत्व को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसका उल्लेख सत्रह एस बी सी लक्ष्यों में से तीन मिलता है।कानून में बाधाओं को विशेष रूप से कम करना चाहिए

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राहुल रंजन ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारतीय उतराधिकारी अधिनियम 1954 के तहत ईसाई विधवाओं को संपत्ति का एक तिहाई हिस्सा मिलता है और पुरुष एवं महिला वंशजों को इसका दो तिहाई हिस्सा बराबर बराबर मिलता है। आदिवासियों की अपनी प्रथाएं है।जिनके अनुसार कुछ अपवादों को छोड़ कर आमतौर पर महिलाओं को उनकी भूमि का हिस्सा नहीं मिलता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से महेंद्र राणा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में महिलाओं के भूमि अधिकार विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों और प्रथागत व्यवस्थाओं के माध्यम से सुनिश्चित कि जाते हैं। हिंदू कानून अपने वर्तमान स्वरूप में महिलाओं को भूमि का स्वामित रखने और उसके मामलों का स्वतंत्र रूप से प्रबंधन करने का अधिकार देता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में सामाजिक विकास के विमर्श में महिलाओं के भूमि अधिकार हमेशा से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। कृषि गरीबी उन्मूलन लिंग आधारित हिस्सा में कमी महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के संदर्भ में डब्ल्यू ए एल आर के महत्व पर चर्चा की गयी अब व्यापक अकादमी साहित्य और सामाहिक कार्यवाई के अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं के भूमि अधिकार लैंगिक समानता को अधिक प्राप्त करने के महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं थैंक्यू