झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला किसानों को योजनाओं की जानकारी नही होती है।उनको पता ही नहीं होता है कि उनके लिए कोई योजना भी है,जिससे उन्हें फायदा मिल सकता है।अगर हम महिला सशक्तिकरण योजना की बात करें तो इसका मतलब है की महिलाओं को अलग अलग पद पर नियुक्त करना है और उन्हें सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर करना है। लेकिन यह कैसा सशक्तिकरण है जब महिला के पास उसके नाम का जमीन ही नही है?
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं घर के काम,बच्चों की देखभाल एवं पशुपालन के साथ - साथ खेती भी करती हैं।खेती में पूंजी की आवश्यकता पड़ती और अगर पूंजी ना रहे तो कर्ज लिया जाता है।जरुरत पड़ने पर महिला किसान स्वयं सहायता समूह से कर्ज ले सकती है।गहने गिरवी रख सकती हैं। बैंक से लोन ले सकती हैं।महिला खेत के लिए लोन लेती है और उसे चुकाती है।लेकिन जब खेत पर मान्यता की बात आती है,तो कह दिया जाता है कि वह महिला किसान नहीं है। दुर्भाग्यवश यह कहने वाले उसके परिवार के लोग होते हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लोग लोग रजिस्ट्री के पैसे बचाने के लिए महिलाओं के नाम जमीन दर्ज करवाते हैं।जिस भी जमीन को यदि हम महिला के नाम पर लेंगे या खरीदेंगे,तो उसमें पैसों की बचत होती है।जिनके पास ज्यादा सम्पत्ति है और उन्हें सरकार को अपनी सम्पत्ति का लेखा - जोखा पेश करना होता है,तो उस समय वो सरकार से अपनी अर्जित सम्पत्ति छिपाने के लिए या पैसा बचाने के लिए,जमीन महिला के नाम कर देते हैं।अगर पति पिता या ससुर नहीं है तब मजबूरी में जमीन महिला के नाम की जाती है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से सोमर मुंडा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जब महिलाओं को भूमि पर अधिकार और पहुँच प्राप्त होती है,तो इसका आर्थिक लाभ उनके परिवार और समुदाय तक पहुँचाता है।शोध से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं अपनी कृषि और भूमि आधारित आय का अधिक हिस्सा अपने परिवार के लिए योगदान करती है।जिसके परिणाम स्वरूप खाद्य सुरक्षा,बच्चों के स्वास्थ और शिक्षा में सुधर होता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से श्यामदास ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के भूमि स्वामित्व से आर्थिक,सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ प्राप्त होती है।कुछ समुदायों में महिलाओं को केवल अपने पतियों या पुरुष रिश्तेदारों से प्राप्त समुदायिक भूमि तक ही पहुँच प्राप्त होती है,जो अक्सर उनकी वैवाहिक स्थिति से जुड़ी होती है।इससे महिला का भूमि स्वामित्व असुरक्षित हो जाता है।जिसका अर्थ यह है कि पति की मृत्यु या तलाक होने पर महिला भूमि पर अपना अधिकार खो सकती है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि ग्रामीण भारत को संपत्ति के अधिकार प्रदान करना और भूमि विवादों को सुलझाना यह ग्रामीण संपत्ति के लिए सबसे महत्व बिंदु है।गाँव में संपत्ति के सीमांकन के लिए आधुनिक ड्रोन सर्वेक्षण का उपयोग किया जा रहा है। संपत्ति के मालिकों को संपत्ति कार्ड या अधिकारों का अभिलेख जारी किया जाता है।
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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को अधिकार मिलना चाहिए
