झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत प्रदेश की पहचान एक कृषि प्रधान देश के तौर पर जानी जाती है।किसानो के हाल बेहाल हैं। आज किसानों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नेतागण किसानों की समस्याओं को नहीं समझते हैं। किसानो को सिर्फ दौड़ाया जाता है और समाधान नहीं होता है।
Transcript Unavailable.
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि नई पीढ़ी का कहना है कि अकेले कृषि क्षेत्र उन्हें एक आरामदायक जीवन नहीं दे सकता है। भारत में कृषि क्षेत्र जिस गंभीर संकट से गुजर रहा है उसका एक संकेत ऐसे किसानों की बढ़ती जमात से मिल रहा है जो कृषि छोड़कर दूसरे पैसे चुन रहे हैं। लोगों का कहना है कि कृषि में मेहनत अधिक और आय कम हैं। इसलिए लोग कृषि नहीं करना चाहते हैं
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राजकुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कृषि सबसे अधिक पुरुषों के द्वारा किया जाता है। कृषि कार्य में अधिक शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है। जिसे पुरुष महिलाओं की तुलना में अधिक आसानी से कर सकती हैं। कृषि में सबसे अधिक पुरुषों की भागीदारी होती है। इसलिए महिलाओं को कम अधिकार दिया जाता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अवधेश केसरी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला किसान योजना का उद्देश्य महिला किसानों के विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना है। जिसमें इनपो ट्रेन प्रौद्योगिकी और बाजार तक उनकी पहुंच में सुधार करना शामिल है।कृषि सम्बन्धी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।जैसे कृषि सामग्री बीज,उपकरण आदि को खरीदने में मदद प्रदान करना।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वार्षिक आधिक श्रम बल सर्वेक्षण रिपोर्ट दो हजार बाईस से सताईस के अनुसार कृषि क्षेत्र में महिला श्रमिकों का अनुमानित प्रतिशत वितरण सबसे अधिक था।अन्य 64.3 प्रतिशत,जिनमे ग्रामीण क्षेत्रों में 76.2 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 11.7 प्रतिशत है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि हमारे देश में बड़ी संख्या में महिलाएं खेतों में काम करते हैं।कृषि कार्य के साथ - साथ वो घर के काम, पढ़ाई,पशुपाल,इत्यादि भी करती हैं।लेकिन जब खेत में नाम देखा जाता है तो महिला का नाम नही दीखता है।क्योंकि खेत पुरुषों के नाम ही होता है।महिलाओं को अधिकार के लिए तो इसके लिए महिलाओं को संगठित होकर इकट्ठा होकर अपने अधिकार के लिए आवाज उठाना चाहिए और आंदोलन करना चाहिए ,ताकि महिलाओं को भी संपत्ति का अधिकार खेत में मिल सके
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से वीरेंद्र रविदास ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के अधिकार मानवाधिकार है। इनमें हिंसा और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार है।शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उच्चतम संभव स्तर का आनंद लेने काअधिकार है। शिक्षित होने का अधिकार है। संपत्ति रखने का अधिकार है। मतदान करने का भी अधिकार है और समान वेतन अर्जित करने का भी अधिकार शामिल है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से पंकज कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि माता - पिता की सम्पत्ति पर बेटी का पूरा हक़ होता है।खासकर पैतृक सम्पत्ति में उसे जन्म से ही बेटों के बराबर अधिकार मिलता है।साथ ही माता - पिता की स्वअर्जित सम्पत्ति में भी बिना वसीयत की उसकी हिस्सेदारी होती है।हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 ने बेटियों को समान अधिकार दिए हैं
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के सम्पत्ति अधिकार वे सम्पत्ति और उत्तराधिकार अधिकार हैं जिनका आनंद समाज में एक वर्ग के रूप में महिलाएं उठाती हैं। सम्पत्ति अधिकार,सम्पत्ति पर वे दावे हैं जिन्हें क़ानूनी और सामाजिक रूप से मान्यता प्राप्त है
