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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में नारीवाद और महिला शक्ति के कारण आ रहे व्यापक बदलाव के साथ साथ युवा पीढ़ी की सोच और राय में भी बदलाव आ रहा है। प्राचीन काल ऐसी ही भारतीय महिलाएं विवाह के बाद अपने पति का उपनाम अपना लेती आई है। पितृ सत्तात्मक परम्परा में हमेशा से यह मान्यता रही है कि एक महिला की पहचान उसके पति ऐसी जुड़ी होती है और केवल उसका उपनाम अपनाने से ही वो अपने पति के परिवार की सदस बनती है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि हजारों वर्षों से समाज में पुरुषों और महिलाओं की भूमिकाओं का संतुलित वितरण होता रहा है।बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में नारीवाद जैसे आधुनिक विचारों और सिद्धांतों ने इस परम्परा को आगे बढ़ाया। जब वैज्ञानिक प्रगति में सभी को प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से जीवन और कार्य का आनंद लेने की अनुमति दी।जैसे-हवाई जहाज उड़ाना, ट्रैक्टर से खेत जोतना या मशीनगन चलाना,इत्यादि।जहाँ शारीरिक शक्ति के बजाय बौद्धिक क्षमता की आवश्यकता होती थी।इन कार्यों के लिए पुरुष सही पात्र थे

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि दुनियां के सभी देशों में पुरुषों का वर्चस्व कायम है और समाज पुरुष प्रधान है।महिलाएं हमेशा पुरुषों की दया पर निर्भर रहती हैं।पौराणिक कथाओं,ऐतिहासिक कहानियों और पश्चिमी एवं पूर्वी समाजों के प्रमाणों से यह सिद्ध होता है कि समाज में पुरुषों का वर्चस्व था। प्राकृतिक व्यवस्था के अनुसार विभिन्न व्यक्तियों की शारीरिक संरचना अलग-अलग होती है।पुरुष मेहनती,ऊर्जावान और अधिक शक्तिशाली होते हैं।यही कारण है कि उनकी कृषि से लेकर व्यापार तक गतिविधियाँ घर के बाहर होती है। दूसरी तरफ महिलाएं शारीरिक बनावट के कारण कोमल,सौम्य और शांत होती हैं। उनका शरीर कम शारीरिक ऊर्जा वाले कार्यों के लिए उपयुक्त होता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में पितृ सत्तात्मक सामाजिक संरचना पुरानी विरासत,परम्पराओं और ऐतिहासिक रूप से दूसरे के बाहर काम में अधिक सक्रिय रहता है। इसके कारण जमीनी हक अक्सर उनके पास ही रहता है। हालांकि अब कानूनों में बदलाव आ रहा है,लेकिन अभी भी पैतृक समपत्ति के हस्तांतरण और सामाजिक मान्यता के कारण अधिकांश सम्पत्ति पुरुषों के नाम पर ही होती है।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से उपेंद्र यादव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में भूमि का उपयोग केवल कृषि के लिए नहीं बल्कि वन और अन्य कृषि कार्य के लिए किया जाता है। ग्रामीण भारत में जमीन को सम्पत्ति और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि हमारे देश में जमीन सिर्फ खेती का साधन नहीं है,बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा, सुरक्षा और आजीविका का मुख्य आधार है। साठ प्रतिशत से अधिक भूमि कृषि के लिए उपयोग होती है। लेकिन यह सम्पत्ति आवास,औद्योगिक विकास,वनीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ऋण प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण जरिया है।