झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में संपत्ति खरीदने, बेचने और विरासत में पाने के मामले में महिलाओं को पुरुषों के समान कानूनी संरक्षण प्राप्त है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम उन्नीस सौ छप्पन और हिंदू महिला संपत्ति अधिकार अधिनियम उन्नीस सौ सैंतीस में हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म का पालन करने वाले धार्मिक समुदायों के बीच संपत्ति के विभाजन की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम उन्नीस सौ छप्पन की धारा ए को दो हजार पांच के संशोधन द्वारा संशोधित किया गया था जिसने महिलाओं को सहदायिक व्यवस्था से बाहर रखने की पुरानी भेद भाव की प्रथा को समाप्त कर दिया है और इसे एक सौ चौहतरवें विधि आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों के जवाब में पेश किया गया था। इस संशोधन के तहत एक महिला उत्तराधिकारी को अपने पिता की संपत्ति पर अपने पुरुष अधिकारियों के समान अधिकार प्राप्त हैं
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि संपत्ति में समान अधिकार, मेटर्निटी लीव और प्रजनन अधिकारों जैसे मुद्दों पर महिलाओं को अपने हक के लिए आवाज उठानी पड़ती है। इतिहास गवाह है की महिलाओं के आंदोलन जैसे- माता अधिकार आंदोलन ,कार्यस्थल के अधिकार आदि के कारण ही आज उन्हें बहुत से बुनियादी अधिकार मिल पाए हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं चाहते हैं कि महिलाओं को अपने अधिकारों ,समानता और सुरक्षा के लिए अक्सर सभी क्षेत्रों में आंदोलन इसलिए करने पड़ते हैं क्योंकि सदियों से चली आ रही पित्र सतात्मक सोच और लैंगिक असमानता के कारण उन्हें पुरुषों के बराबर मौके और सम्मान नहीं मिल पाता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भूमि अधिकार एक महत्वपूर्ण मानव अधिकार है। क्योंकि यह भोजन,आश्रय और सुरक्षा जैसे बुनियादी सुविधाओं तक पहुंचने लायक बनाता है।भूमि अधिकार आर्थिक,सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को प्राप्त करने के लिए मूलभूत आवश्यकता है।भूमि का अधिकार महिलाओं को सशक्त बनाता है। साथ ही महिलाओं की गरिमा और सम्मान को ध्यान में रखे बिना भूमि अधिकारों से जुड़ी बातचीत अधूरी है।
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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारतीय संविधान के तहत प्रत्येक महिला को समानता और सुरक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त है। अधिकारों में समान वेतन, शिक्षा और सम्पत्ति का अधिकार भी शामिल है।वर्तमान में महिलाओं को शिक्षा तो मिल रहा है, लेकिन सम्पत्ति के अधिकार से वो वंचित है।कानून ने महिलाओं को जमीन में हक़ दिया है। मगर यथार्थ में महिलाओं के नाम जमीन नही होती है और ना ही जमीन सम्बंधित कोई भी एक्शन लेने का हक या अधिकार होता है। जमीन में नाम ना होने के कारण महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे बैंक से लोन मिलने में कठिनाई,इत्यादि।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में 80 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं कृषि क्षेत्र में हैं।लेकिन भूमि पर मालिकाना हक न होने और पुरुष प्रधान सामाजिक संरचना के कारण उन्हें किसान के रूप में मान्यता नहीं मिलती है।जमीनें आमतौर पर पिता,भाई या पति के नाम होती है।जिससे वे सरकारी योजनाओं,कर्ज और कृषि ऋण माफी जैसे अधिकारों से वंचित रह जाती हैं।भले ही वो खेती का अधिकांश कार्य करती हैं,फिर भी महिलाओं को जमीन का अधिकार नही दिया जाता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को मालिकाना हक़ मिलना चाहिए। महिला कई तरह का काम करती हैं लेकिन उनको किसी भी तरह का अधिकार नहीं दिया गया है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को शिक्षित करना बहुत जरूरी है। उनको उन्हें उनके कानूनी अधिकारों जैसे संपत्ति का अधिकार, कार्यस्थल पर सुरक्षा और भरण पोषण के बारे में जानकारी देना चाहिए दूसरा जो आर्थिक आत्मनिर्भरता -इसमें स्वयं निर्णय लेने की आर्थिक संतत्रता बहुत जरूरी है। महिलाओं को नौकरी स्वरोजगार या किसी न किसी हुनर के माध्यम से आय अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए
