झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वर्तमान कानून के द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और बाल विवा निषेध अधिनियम 2006 के तहत लड़कियों के लिए शादी की कानूनी उम्र अठारह साल और लड़कों के लिए इक्कीस साल है। प्रस्तावित बदलाव,केंद्र सरकार ने महिलाओं के लिए कानूनी विवाह की उम्र को लड़कों बराबर 21 साल करने के लिए एक विधेयक पेश किए हैं। जिसे बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के संशोधन के रूप में देखा जा रहा है। उद्देश्य यह है कि इस बदलाव का उद्देश बाल विवाह को रोकना, लड़कियों को शिक्षा और सशक्तिकरण के अवसर देना और उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व होने का समय देना है। समिति की सिफारिशें विधि आयोग और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग जैसे संस्थाओं ने भी लड़के और लड़की के दोनों के लिए समान उम्र,18 साल की सिफ़िश की।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कुछ मामलों में अगर बहु अपने बुजुर्ग सास ससुर को बहुत परेशान करती है जैसे लगातार झगड़े करना तो, अदालतों ने बुजुर्गो के शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार को प्राथमिकता देते हुए बहु को घर से निकालने की अनुमति दी है।लेकिन इसके लिए भी उचित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। प्रोपर्टी का स्वामित्व अगर पति के माता पिता की निजी संपत्ति है और पति का उस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है तो कोर्ट के पुराने फैसले में बहु के अधिकार सीमित किए गए थे। परन्तु हाल के फैसले में ससुराल वाले बहु को आसानी से घर से नही निकाल सकते हैं। ऐसा करने के लिए उन्हें कानूनी रास्ता अपनाना होगा। बहु को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आवास का अधिकार प्राप्त है, जब तक की कोई विशेष न्यायिक स्थिति ना हो।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ससुराल वाले बहु को मनमाने ढंग से घर से नहीं निकाल सकते हैं। क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसलों के अनुसार शादी के बाद बहु का साझा घर में रहने का अधिकार होता है। भले ही घर उनके पति के माता पिता के नाम पर हो, उन्हें घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया के बिना जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता है।हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में जहाँ बहु बुजुर्ग सास -ससुर को परेशान करती है,अदालत ने उनके निष्कान पर विचार किया है। पर सामान्यतः बहु को सुरक्षित रहने का अधिकार है। बहु के अधिकार जैसे की साझा घर का अधिकार, शादी के बाद जिस घर में महिला रहती है वह उसका साझा घर बन जाता है और उसे वहाँ रहने का कानूनी अधिकार होता है। घरेलू हिंसा अधिनियम यह अधिनियम बहु को साझा घर में रहने का अधिकार देता है और उसे बेदखल होने से बचाता है।
झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि गहना अगर ससुराल वाले ले लेते हैं तो उसको वापसी के लिए पति के खिलाफ याचिका दायर कर सकती हैं ।महिला संपत्ति को सुरक्षित रखने का हकदार हैं ।वह कानून का सहारा ले सकती हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि ससुराल में महिलाओं को कई तरह के अधिकार दिए जाते हैं जैसे समान भरण पोषण का अधिकार और पति के संपत्ति में हिस्सा देना ।उनको ससुराल के घर में रहने का अधिकार होता है और घरेलू हिंसा से सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन जीने का हक है ।इसके लिए महिला कानून का सहारा ले सकती हैं ।घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत ससुराल के साजे के घर रहने का अधिकार होता है ।पति के संपत्ति में पत्नी का पूरा अधिकार होता है ।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत की दस महिला स्वतंत्रता सेनानी ने इतिहास को आकार दिया है। जिनका नाम जो है - रानी लक्ष्मी बााई,बेगम हजरत महल,कस्तूरबा गाँधी,विजय लक्ष्मी पंडित, सरोजिनी नायडू,अरुणा आसाफली, मैडम भीकाजी कामा,कमला चटोपाध्याय,कितर चन्नमा और साविती भाई फुले। इन दस महिलाओं के द्वारा भारत में स्वतंत्रता,न्याय और समानता के लिए संघर्ष करने वाली साहसी महिलाओं का लंबा इतिहास है। रानी लक्ष्मी बााई से लेकर सरोजिनी नायडू तक भारत में सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानी हुई।जिन्होंने देश की स्वतंत्रता में अमूल्य योगदान दिया।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सावित्री बााई फूले एक भारतीय समाज सुधारक थी जिन्होंने भारत में महिलाओं और निम्न जातियों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यो और जाति व्यवस्था के खिलाफ उनके संघर्ष के लिए जाना जाता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि विश्व के अधिकांश देशों में प्रमुख सत्ता संरचनाएं, कानून, रीति रिवाज और सांस्कृतिक मापदंड महिलाओं को भूमि पर समान अधिकार से वंचित करते हैं। स्थानीय राष्ट्रीय और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में में अपिहार भूमिका निभाने के बावजूद विश्व भर में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली पंद्रह प्रतिशत से भी कम महिलाओं को भूमि समबंधी सुरक्षित अधिकार प्राप्त हैं।लैंगिक असमानता हर किसी को प्रभावित करती हैं। जब महिलाओं को सुरक्षा और अपनी भूमि पर नियंत्रण मिलता है तो शिक्षा तक पहुंच बढ़ती है। यवा की आयु बढ़ती है, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार होता है,आय बढ़ती है ,गरीबी का चक्र टूटता है और घर और समुदाय के भीतर सत्ता में स्थाायी बदलाव आता है और जब परिवार और समुदाय स्तर पर इन परिणामों में सुधार होता है तो यह जलवायु परिवर्तन ,खाद सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ जैसे वैश्विक गहरे लैंगिक मुद्दे पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को भूमि से बेदखल कर दिया जाता है। कभी कभी तो उनकी जान को भी खतरा होता है। भूमि का अधिग्रहण मिलने के बावजूद महिलाओं को पुरुषों द्वारा किए जाने वाले उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। कई महिलाओं के पास भूमि है लेकिन उनको भूमि एक बोझ जैसी लगती हैं
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