झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अर्जुन मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला किसान के समक्ष कई चुनौतियाँ होती हैं।जैसे - घर के काम,बच्चों की देखभाल और पानी ईधन,जुटाने की जिम्मेदारी भी महिलाओं पर होती है। जानकारी और शिक्षा की कमी भी एक वजह है। साक्षरता की निम्न दर और पुरुष प्रधान कृषि विस्तार सेवाओं के कारण उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी कम मिल पाती है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं घर के काम,बच्चों की देखभाल एवं पशुपालन के साथ - साथ खेती भी करती हैं।खेती में पूंजी की आवश्यकता पड़ती और अगर पूंजी ना रहे तो कर्ज लिया जाता है।जरुरत पड़ने पर महिला किसान स्वयं सहायता समूह से कर्ज ले सकती है।गहने गिरवी रख सकती हैं। बैंक से लोन ले सकती हैं।महिला खेत के लिए लोन लेती है और उसे चुकाती है।लेकिन जब खेत पर मान्यता की बात आती है,तो कह दिया जाता है कि वह महिला किसान नहीं है। दुर्भाग्यवश यह कहने वाले उसके परिवार के लोग होते हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से श्यामदास ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के भूमि स्वामित्व से आर्थिक,सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ प्राप्त होती है।कुछ समुदायों में महिलाओं को केवल अपने पतियों या पुरुष रिश्तेदारों से प्राप्त समुदायिक भूमि तक ही पहुँच प्राप्त होती है,जो अक्सर उनकी वैवाहिक स्थिति से जुड़ी होती है।इससे महिला का भूमि स्वामित्व असुरक्षित हो जाता है।जिसका अर्थ यह है कि पति की मृत्यु या तलाक होने पर महिला भूमि पर अपना अधिकार खो सकती है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि आज की दुनिया में महिलाओं और लड़कियों के लिए समानता पहले से कहीं अधिक है।लेकिन प्रगति अभी भी बहुत धमी है।श्रमबल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व दशकों से अपरिवर्तित है।जलवायु परिवर्तन में महिलाओं और लड़कियों का योगदान सबसे कम है।फिर भी वे इसके सबसे बुरे परिणामों से पीड़ित हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से असलम अंसारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में सामने आया कि दुनिया में 50 प्रतिशत महिलाओं को अपने ही शरीर पर अधिकार नही है।महिलाएं इसे लम्बे समय से महसूस करती रही है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में पहली बार आया है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारतीय किसान यूनियन और बुंदेलखंड किसान यूनियन का कहना है वह कभी महिलाओं को अधिकार देने के सम्बन्ध में सोचे ही नहीं थे। महिलाओं को योजनाओं के बारे में पता ही नहीं है। लोगों को गूगल में सर्च करने के बाद योजनाओं के बारे में पता चला
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिला किसान के रूप में काम करती हैं लेकिन उनको अधिकार नहीं दिया जाता है। लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं खेती करती हैं। महिलाओं को न तो किसान के रूप में देखा जाता है और न ही किसान के रूप में अधिकार दिया जाता है
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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं में राजनितिक मुद्दों पर उपयोगी राय देने के लिए मानसिक क्षमता की कमी होती है। कुछ लोगों का कहना हैं कि महिलाओं के वोट से मतदाताओं की संख्या बढ़ जाएगी। मतदान में कोई नया लाभ जोड़े बिना ही खर्च बढ़ जायेगा
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