झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से गीता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि आज के जमाने में महिलाओं को सम्मान तभी मिलता है जब वो कम खाती,कम बोलती,कम हंसती और कम रोती है। जो महिला गाली सुनकर भी कुछ नही कहती है वो अच्छी है। मगर यदि महिला सम्पत्ति,अपने हक़,कानून और खुद को आगे बढ़ाने की बात बोलती है,उसे प्रताड़ित किया जाता है तथा दबाया जाता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से आलम अंसारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि मानवाधिकारों की 1948 की सार्वभौमिक घोषणा में कहा गया है कि सभी मनुष्य स्वतंत्र और समान अधिकारों के साथ पैदा होते हैं।इसलिए लिंग की परवाह किए बिना सभी लोगो को संतरता,गरिमा और समान अधिकारों का हक है।फिर भी हर दिन और पूरी दुनिया में महिलाओं और लड़कियों को भेदभाव और मानवाधिकारों के गंभीर उलंघन का सामना करना पड़ता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि एसिड हमले की व्यापक घटना,दहेज हत्याएं,कन्या भ्रूण हत्या,ऑनर किलिंग,कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, इत्यादि इक्कीसवीं सदी में भी महिलाओं द्वारा सामना की जाने वाली सामाजिक बुराईयों और चुनौतियों के संदर्भ में मात्र कुछ उदाहरण है। भारत में कई दुर्भाग्यपूर्ण मामलों में धार्मिक परंपराएं, व्यक्तिगत कानून और अन्य सांस्कृतिक धारणाएं अक्सर भारतीय संविधान द्वारा महिलाओं को प्रदान की गई सुरक्षा के विरुद्ध कार्य करती है।
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झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में खेती में सबसे ज्यादा पसीना बहाने के बावजूद महिलाओं के नाम जमीन न होने का मुख्य कारण पितृसत्तात्मक सोच,सांस्कृतिक परंपराएं और अज्ञानता है । उन्हें पुरुष प्रधान समाज में संपत्ति का उत्तराधिकारी नहीं माना जाता और जागरूकता व कानूनी अधिकारों की जानकारी ना होने के कारण भी वे हक से वंचित रह जाती है ।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अर्जुन मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला किसान के समक्ष कई चुनौतियाँ होती हैं।जैसे - घर के काम,बच्चों की देखभाल और पानी ईधन,जुटाने की जिम्मेदारी भी महिलाओं पर होती है। जानकारी और शिक्षा की कमी भी एक वजह है। साक्षरता की निम्न दर और पुरुष प्रधान कृषि विस्तार सेवाओं के कारण उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी कम मिल पाती है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं घर के काम,बच्चों की देखभाल एवं पशुपालन के साथ - साथ खेती भी करती हैं।खेती में पूंजी की आवश्यकता पड़ती और अगर पूंजी ना रहे तो कर्ज लिया जाता है।जरुरत पड़ने पर महिला किसान स्वयं सहायता समूह से कर्ज ले सकती है।गहने गिरवी रख सकती हैं। बैंक से लोन ले सकती हैं।महिला खेत के लिए लोन लेती है और उसे चुकाती है।लेकिन जब खेत पर मान्यता की बात आती है,तो कह दिया जाता है कि वह महिला किसान नहीं है। दुर्भाग्यवश यह कहने वाले उसके परिवार के लोग होते हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से श्यामदास ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के भूमि स्वामित्व से आर्थिक,सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ प्राप्त होती है।कुछ समुदायों में महिलाओं को केवल अपने पतियों या पुरुष रिश्तेदारों से प्राप्त समुदायिक भूमि तक ही पहुँच प्राप्त होती है,जो अक्सर उनकी वैवाहिक स्थिति से जुड़ी होती है।इससे महिला का भूमि स्वामित्व असुरक्षित हो जाता है।जिसका अर्थ यह है कि पति की मृत्यु या तलाक होने पर महिला भूमि पर अपना अधिकार खो सकती है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि आज की दुनिया में महिलाओं और लड़कियों के लिए समानता पहले से कहीं अधिक है।लेकिन प्रगति अभी भी बहुत धमी है।श्रमबल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व दशकों से अपरिवर्तित है।जलवायु परिवर्तन में महिलाओं और लड़कियों का योगदान सबसे कम है।फिर भी वे इसके सबसे बुरे परिणामों से पीड़ित हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से असलम अंसारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में सामने आया कि दुनिया में 50 प्रतिशत महिलाओं को अपने ही शरीर पर अधिकार नही है।महिलाएं इसे लम्बे समय से महसूस करती रही है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में पहली बार आया है
