झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को कई अधिकार प्राप्त हैं जैसे - हिंसा और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुँंच का अधिकार ,संपत्ति रखने का अधिकार ,मतदान का अधिकार और समान काम के लिए समान वेतन का अधिकार शामिल है।

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शीतलहर ठण्ड,घने कोहरे में बच्चे एवं चिर रोगी अनावश्यक घर से न निकलें: डॉ आरसी प्रसाद मेहता ---- हजारीबाग। मेहता हॉस्पिटल के निदेशक एवं कांग्रेस स्वस्थ विभाग के प्रमंडलीय स्वास्थ्य अध्यक्ष डॉ॰ आरसी प्रसाद मेहता ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर झारखंड प्रदेश के लोगों से आह्वान किए की बढ़ती ठंड शीतलहर, कोहरे में चिर रोगी जैसे डायबिटीज हाट एवं किडनी अस्थमा से संबंधित पुराने बीमारी से ग्रसित बच्चे बुजुर्ग व्यक्ति अनावश्यक घर से न निकले।अति आवश्यक हो तो गर्म कपड़े कोट स्वेटर हाथ में दस्ताना एवं टोपी पहनकर निकले। गर्म पानी एवं गर्म तरल पदार्थ पीते रहे। स्कूली छोटे बच्चों के बचाव के लिए सरकार एवं प्राइवेट स्कूल संचालकों से निवेदन है की कोहरे को देखते हुए स्कूल के समय में परिवर्तन किया जाए जरूरत पड़ने पर बंद करें ताकि बच्चे स्वस्थ रहे। क्योंकि स्वस्थ सर्वोपरि है शिक्षा सेकेंडरी है। ठंड के मौसम में गर्म पानी का सेवन करें फ्रिज में रखे हुए सामानों का उपयोग न करें। हृदय रोगी समय समय पर बीपी पल्स ब्लड शुगर का जांच कराते रहे। सर्दी एवं ठंड के मौसम में आग की बोरसी हीटर का ज़्यादातर लोग प्रयोग करते हैं परंतु मैं लोगों निवेदन करूँगा कि सोते समय बोरसी हीटर का प्रयोग बंद कमरे में नही  करें । क्योंकि हीटर अंगीठी का प्रयोग बंद कमरे में करने से ऑक्सीजन की कमी और कार्बन डाइऑक्साइड की वृद्धि से अनेकों मौतें  या दुर्घटनाएं प्रत्येक वर्ष देखने को मिलता है। इसलिए बंद कमरे में सोते समय अंगीठी बोरशी हीटर का प्रयोग कदापि न करें। ठंड के मौसम में शाकाहारी पनीर मटर हरा साख सब्जी। का प्रयोग करें गर्म पानी ज्यादा से ज्यादा पिए। सर्दी के समय में ज्यादातर लोग पानी कम पीते हैं। पानी की कमी से रिहाइडरेशन होने की संभावना रहती है। शीतलहर के समय गर्म पानी से स्नान करें। मांसाहारी व्यक्ति अंडा मांस मछली का प्रयोग सामर्थ्य अनुसार करें। धूम्रपान मदिरापान इत्यादि नशा का प्रयोग नहीं करें। ठंड एवं कोहरे के समय में वाहन चालक सावधानी बरतें। कोहरे के समय वाहन का लैट जलाकर धीरे धीरे चले चालक आगे पीछे दायाँ बाएं देखकर सुरक्षित चले क्योंकि कोहरे के कारण अनेकों दुर्घटनाएं होती हैं जिसका सावधानी बरतें।

ज़िन्दगी के कुछ पलों में लड़को को भी रोने का मन करता है और ऐसे समय में रो लेना कितना ज़रूरी है। पर क्या हमारा समाज इतनी आसानी से लड़कों को रोने की आज़ादी दे दे सकता है ? क्या केबल रोने या न रोने से ही साबित होता है की वो इंसान कितने मज़बूत किरदार का मालिक है ? और क्या इसी एक वाक्य से हम बचपन में ही लिंग भेद का बीज बच्चो के अंदर ने दाल दे रहे है जो पड़े होते होते न जाने कितने और लोगो को अपनी चपेट में ले चूका होता है ! आप के हिसाब से अगर लड़के भी दिलका बोझ हल्का करने के लिए रोयें और दूसरों से नरम बर्ताव करे तो समाज में क्या क्या बदल सकता है ? इस सभी पहलुओं पर अपनी राय प्रतिक्रिया और सुझाव जरूर रिकॉर्ड करें अपने फ़ोन में नंबर 3 दबाकर। और हां साथियों अगर आपके मन में आज के विषय से जुड़ा कोई सवाल हो तो वो भी जरूर रिकॉर्ड करें। हम आपके सवाल का जवाब तलाश कर आप तक पहुंचाने की पूरी कोशिश करेंगे।