"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू परवल में फूल हो रहे है पर फल नहीं लग रहे की जानकारी दे रहे हैं ।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से सलोनी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने की जरूरत के मुख्य दो कारण हैं लैंगिक समानता और मानवाधिकार। महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार, शिक्षा और अवसर प्रदान करने न केवल एक मौलिक मानवाधिकार है बल्कि एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है। महिलाओं की शिक्षा स्वास्थ्य और कार्य स्थल में भागीदारी बढ़ाकर परिवार और राष्ट्र की आय में वृद्धि की जा सकती है। समुदाय में स्थानीय पुलिस को रात में भीड़ भाड़ वाले इलाकों में तैनात किया जाना चाहिए। कार्यालय और संस्थाओं में सुरक्षित परिवहन के साथ साथ शिफ्ट निर्वाण कार्य का होना अनिवार्य है

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विष्णुगढ़ प्रखंड के मडमो निलकंठवा टोला निवासी धनी महतो के 36 वर्ष से पुत्र खेमलाल महतो का मौत कर्नाटक क्षेत्र में हो गया है इसकी सूचना मिलते हैं परिजन रो-रो कर बुरा हाल हो गया है प्रवासी श्रमिक के हित में काम करने वाले सिकंदर अली ने सरकार से मदद की गुहार लगाये है।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से कूप अंसारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में लगभग अस्सी प्रतिशत कामकाजी महिलाएं कृषि क्षेत्र में हैं।लेकिन भूमि पर मालिकाना हक़ न होने और पुरुष प्रधान सामाजिक संरचना के कारण उन्हें किसान के रूप में मान्यता नही मिलती है।जमीन आम तौर पर पिता,भाई या पति के नाम होती है।खुद के नाम जमीन ना होने के कारण महिलाएं कर्ज,कृषि ऋण,माफ़ी,सरकारी योजनाएं,इत्यादि जैसे अधिकारों से वंचित रह जाती हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पत्ति का हस्तांतरण आमतौर पर केवल बेटों को होता है। बेटियाँ और पत्नी अपने भाई या पति के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने के लिए जमीन पर अपना दावा छोड़ देती हैं।साथ ही महिला किसानों के पास उनके नाम पर जमीन के दस्तावेज नहीं होते हैं,जो सरकारी सहायता और बैंक ऋण के लिए अनिवार्य है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला किसानों के पास उनके नाम पर जमीन के दस्तावेज नहीं होते हैं। सरकारी सहायता और बैंक ऋण के लिए खुद के नाम जमीन होना अनिवार्य है।महिलाओं को कोई कार्य करने के लिए या कृषि लोन नहीं मिल पाता है। महिलाएं खेती में बुआई, रोपाई, कटाई,इत्यादि करती है। मगर इसे खेती ना मान कर अतिरिक्त कार्य माना जाता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि अधिकांश सरकारी नीतियाँ किसान को जमीन के मालिक के रूप में परिभाषा करती है। जिससे खेतिहर,महिला मजदूर या भूमिहीन महिला किसान बहाल हो जाए। भूमि में क़ानूनी अधिकार प्राप्त होने के बावजूद महिलाओं को इस बात की जानकारी या जागरूकता नही रहती है