विष्णुगढ़ प्रखंड मुख्यालय सभागार में पंचायती राज विभाग के द्वारा पंचायत सहायक मुखिया पंचायत सचिव को चार दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हो गया जिसे सभी पंचायत को सुदृढ़ीकरण डिजिटल पंचायत के अनुरूप केंद्र सरकार राज्य सरकार के द्वारा चलाए जा रहे हैं कल्याणकारी योजनाओं के बारे में अत्यंत गरीब वर्ग के लोगों को जागरुक करते हुए उन्हें लाभान्वित करने पर बल दिया गया प्रशिक्षण में स्वाति सिंह मुखिया उत्तम महतो चेतलाल महतो चंद्रशेखर महतो पंचायत सहायक उर्मिला कुमारी गीता देवी हेमंती देवी समेत बड़ी संख्या में पंचायत सहायक मौजूद रहे सफल प्रशिक्षण के दौरान मुखिया पंचायत सहायकों को राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत प्रमाण पत्र वितरण किया गया।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं के लिए कई राज्य स्तरीय योजनाएं उपलब्ध हैं।महिला वेबसाइट में जाकर योजनाओं को देख सकती हैं और लाभ ले सकती हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा शिक्षा,स्वास्थ्य, वित्तीय सहायता और सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। जिनमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुद्रा योजना, महिला समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए सखी केंद्र शामिल है। जो बालिकाओं को जन्म से लेकर महिला उद्यमिता और मातत्व स्वास्थ्य तक का ध्यान रखती है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भूमि एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है,जो पौधों और अन्य जीवित जीवों द्वारा उपयोग किए जाने वाले पानी और पोषक तत्वों के भंडारण के रूप में कार्य सके। भूमि का सुधार और उत्पादकता ही खाद है। ऊर्जा और अन्य मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति का आधार भूमि है।यानि भूमि सिर्फ फसल के लिए नहीं बनाया गया है। बल्कि इसमें लगने वाले पेड़ पौधों के जरिए तमाम जीव-जंतु और मानव को लाभ मिलता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि समाज में कृषि कार्य में शामिल महिलाओं को मजदूर के रूप में देखा जाता है।इन लोगों को एक मजदूर के एंगल से देखा जाता है और इन्हें दिन का हाजिरी मिलता है।महिलाओं को कृषि भूमि के अधिकार से दूर रखा जाता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वर्तमान में महिला समाज को भूमि सम्पत्ति सम्बंधी अधिकार से वंचित रखना वास्तव में उस आधी आबादी अथवा आधी दुनिया की अवमानना है, जो एक मां, बहन और पत्नी अथवा महिला के किसान के रूप में दो गज जमीन और मुट्ठी भर संपत्ति की वाजिब हकदार है।भारत में महिलाओं के भूमि तथा संपत्ति पर अधिकार केवल वैधानिक अवमानना के उलझे सवाल पर नहीं है। बल्कि उसका मूल उस सामाजिक जड़ता में है जिसे आज आधुनिक भारत में नैतिकता के आधार पर चुनौती दिया जाना चाहिए।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि दहेज़ और शादी के कारण महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकार नहीं दिया जाता है। लोग यह सोचते हैं कि जब शादी में दहेज़ दे चुके हैं तो संपत्ति में अधिकार क्यों दें। लोगों का कहना है कि महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दहेज़ के रूप में दे दिया जाता है। इसलिए भूमि में अधिकार नहीं मिलना चाहिए। अक्सर भूमि का रिकॉर्ड पुरुषों के नाम पर होता है जिससे महिला का मालिकाना हक कमजोर हो जाता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में पितृ सतात्मक और सामाजिक संरचना रूढ़िवादी परम्पराओं और जागरूकता की कमी के कारण लंबे समय से महिलाओं को भूमि अधिकारों से वंचित रखा गया है। इसमें भूमि का जो अधिकार मिलना चाहिए वह अधिकार ना मिल पाता है। लेकिन ऐसा नहीं है की महिलाएं खेती या भूमि से सम्बंधित कार्य में समय नहीं दे पाती हैं।खेती में ज्यादा रूचि महिलाओं को होती है। फिर भी उनको भूमि के अधिकारों से वंचित रखा गया है। हालांकि दो हजार पाँच में हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम के बाद बेटो और बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार दिए गए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन अभी भी सिमित है
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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत भर में पीएम किसान योजना ,किसान क्रेडिट कार्ड फसल बीमा योजना और सुखा राहत कार्यक्रम जैसी कल्याणकारी योजनाएँ आज भी एक पुराने मापदंड पर निर्भर है। भूमि स्वामित्य लेकिन अधिकांश ग्रामीण परिवारों में भूमि का स्वामित्य पुरुषों के हाथों में है। लाखों महिला किसान विशेष रूप से विधवाएं ,एकल महिलाएं ,दलित ,आदिवासी और मुस्लिम किसान उन योजनाओं से वंचित रह जाती हैं जो कृषि समुदाय के समर्थन के लिए बनाई गयी है
