उत्तर प्रदेश से दिनेश कुमार साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि वे दिल्ली के उत्तम नगर में लॉक डाउन से पहले काम करते थे। ठेकेदारी ने उन्हें वेतन काट कर दिया ,जिसकी शिकायत अप्रेल माह में ही उन्होंने कर दी है लेकिन आप तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
दिल्ली एनसीआर से हमारे श्रोता दीनानाथ साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि कोर्ट या कचहरी में गरीब मजदूरों की बात नहीं मानी जाती है उनहोंने साथ ही कहा की पैसे वालों को उनका बात बोलने का मौका दिया जाता है पर एक गरीब को नहीं।अंत में कह रहे है की सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिये
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दिल्ली, एनसीआर, बहादुरगढ़, हरियाणा से साझा मंच मोबाईल वाणी के सम्वाददाता मनोहर लाल कश्यप सीटू के रामनाथ पंडित, जो मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार से हैं, उनसे बात कर रहे हैं। रामनाथ पंडित बता रहे हैं कि कोविड संकट का इतने कष्टपूर्वक सामना करने के बाद भी श्रमिकों, ग़रीबों की सुध लेनेवाला कोई नहीं है। जो सुविधाएँ मिलती भी हैं, वे सुविधाएँ श्रमिकों तक नहीं पहुँच पातीं। लॉक डाउन के बाद श्रमिकों की स्थिति बहुत दयनीय हो गयी है। लॉक डाउन में हम बेघर हो गए हैं। श्रमिकों को एक तरफ़ काम नहीं मिल रहा, दूसरी तरफ़ मज़दूरी बहुत कम मिलती है, इस तरह कैसे हमारा घर-परिवार चलेगा! हमलोगों की कहीं-कोई सुनवाई नहीं है, तो आख़िर हम कहाँ जाएँ! इसलिए साझा मंच से आग्रह है कि हमारी बात सरकार तक पहुँचाएँ, जिससे हमारा कुछ भला हो। श्रमिकों की समस्याओं को सरकार के सामने रखने और उनके समाधान के लिए हमलोग गाँव-गाँव घूमकर, प्रखंड-ज़िला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन भी करते हैं। ताकि हमें मज़दूरी अच्छे से मिले और घर-परिवार अच्छे से चले। इस दौरान दबंग लोग दबाव बनाने की भी कोशिश करते हैं, जिससे हम ये सब बंद कर दें और जितना मिलता है, उतने में ही काम करें। लॉक डाउन के बाद कम मिल रही मज़दूरी के कारण श्रमिक आर्थिक रूप से बहुत परेशानी में हैं। लॉक डाउन के बाद पैसा काम मिलने के कारण श्रमिकों ने पीएफ़ और ईएसआई कटवाना भी बंद कर दिया है। जब पैसा ही नहीं बचेगा, तो श्रमिक कहाँ से पीएफ़ और ईएसआई कटवाएगा।
साझा मंच मोबाईल वाणी के सम्वादादाता अशमत अली बता रहे हैं वे कि बाबूलाल जी के मामले में हरिनगर के श्रम कार्यालय के बाहर खड़े हैं, जहाँ बहुत भीड़ लगी है और सामाजिक दूरी का थोड़ा भी पालन नहीं हो रहा है। यहाँ इकट्ठी भीड़ से पता चलता है कि लॉक डाउन के बाद काफ़ी लोगों की नौकरी चली गयी है और श्रमिक काफ़ी परेशान हैं, क्योंकि कम्पनी ने उनके पैसे नहीं दिए हैं। लगभग दो करोड़ लोगों के रोज़गार छीन गए हैं। वास्तव में श्रमिक वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर ख़ासा परेशान है। बाबूलाल जी को भी साढ़े नौ हज़ार रुपए में बारह घंटे की ड्यूटी कराकर बिना किसी पूर्व सूचना के काम से निकाल दिया गया। अब ये अपने बकाया पैसे को लेने के लिए श्रम न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं और आज हरिनगर स्थित श्रम न्यायालय में इनकी सुनवायी है।
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हमारे श्रोता राहुल यादव साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से एक गीत की प्रस्तुति कर रहे हैं।
दिल्ली से हसमत अली साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से नोयडा अध्यक्ष से 2 अक्टूबर के अवसर पर चर्चा कर रहे हैं। नोयडा अध्यक्ष ने बताया कि आज देश में 2 अक्टूबर का महत्व बढ़ गया है। बीते दिनों शर्म कानूनों में काफ़ी बदलाव किये गए जिससे बहुत से मजदुर ,किसान व श्रमिक संगठनों ने इसके विरोध में आंदोलन किया। पूरी खबर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
दिल्ली से हसमत अली साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि टोल टैक्स प्लाजा में भारी जाम होने से लोगों की परेशानी बढ़ गयी है। पूरी खबर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करे
हमारे श्रोता राहुल यादव साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से एक गीत की प्रस्तुति कर रहे हैं।

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हम आपसे जानना चाहते हैं कि क्या आपकी कंपनी लॉकडाउन से पहले की तनख्वाह ठीक तरीके से दे रही थी ? या फिर आप अभी लॉकडाउन के दौरान तनख्वाह ना देने की बात कह रहे हैं। यदि आप लॉकडाउन से पहले की बात कर रहे हैं तो आप अपने यूनियन या खुद भी लेबर ऑफिस में एक लिखित शिकायत दे सकते हैं और इस शिकायत के साथ अपनी कंपनी के द्वारा दी गई आई.डी कार्ड, सैलरी स्लिप, अप्वाइंटमेंट लेटर का जेरोक्स अटैच करें। लॉकडाउन के दौरान सैलरी की बात करें तो ग्रह मंत्रालय ने अपनी 29 मार्च की अधिसूचना में घोषणा की है कि लॉकडाउन अवधि को ऑन-ड्यूटी माना जाएगा, और नियोक्ता को लॉकडाउन के दौरान अपने कर्मचारियों को भुगतान करना होगा। लेकिन एसोसिएशन ऑफ़ इंडस्ट्रियल एम्प्लॉयर्स ने एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें सरकार को लॉकडाउन के दौरान पूर्ण वेतन देने के निर्देश को चुनौती दी गई थी, इस सब के बीच सरकार ने 17 मई को एक और अधिसूचना की घोषणा की, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी 29 मार्च की अधिसूचना समाप्त हो गई है। दूसरी ओर एक और जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें कर्मचारियों की समाप्ति और वेतन कटौती से सुरक्षा की मांग की गई थी, लेकिन आप अभी भी 29 मार्च से 17 मई तक अपना वेतन मांग सकते हैं। इसलिए श्रमिक को जागरूक होना होगा, संगठन बनाना होगा यह नियोक्ता के खिलाफ खड़े होने का एकमात्र तरीका है। अगर आप यूनियनो के बारे मैं और जानकारी चाहते हैं तो आप 3 दबाकर इसके बारे में पूछ सकते हैं।
Oct. 12, 2020, 12:20 p.m. | Tags: lockdown governance collective action int-DT coronavirus govt entitlements int-PAJ wages workplace entitlements