दिल्ली बहादुरगढ़ हरियाणा से सोनू साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से खान साहब से बिहार सरकार द्वारा दिए गए बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा कर रहे हैं। कोरोना काल में श्रमिक मजदूरों की जिंदगी बद से बदतर होती चली जा रही है। सरकार को सिर्फ और सिर्फ अपनी कुर्सी की चिंता सता रही है

दिल्ली एनसीआर से दिनेश साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कह रहे है कि आजकल पीएफ का पैसा निकालना मानो एक जोखिम का काम सा हो गया है। मजदूरों को इसके लिये बहुत दौड़ना पद रहा है। साथ ही उनहोंने सभी मजदूर भाइयों से अपील किया की कृपया वो पीएफ का पैसा न कटवाए

दिल्ली, एनसीआर से अशमत अली साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से वसीम से बात कर रहे हैं। वसीम बता रहे हैं कि वो एक कंपनी में पीस रेट पर काम करते है। लॉक डाउन के बाद अब उनकी तनख्वाह कम कर दी गई है, जिससे उन्हें बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पहले सिंपल पीस का दस रूपये मिलता था और अब उसी का आठ रूपया मिलता है। लॉक डाउन के बाद पैसे की परेशानी का फ़ायदा फ़ैक्ट्री और ठेकेदार उठा रहे हैं। पैसा साप्ताहिक रूप से मिलना चाहिए। गांधी नगर के पास पैसे लूटने वाले भी खड़े रहते हैं, मगर कोई कारवाई नहीं होती।

अशमत अली साझा मंच मोबाईल वाणी के माध्यम से नदीम से बात कर कर लॉक डाउन के बाद और पहले के हालात पर बात कर रहे हैं। नदीम बता रहे हैं कि लॉक डाउन के पहले काम काफ़ी बेहतर था। अब तो काम नहीं मिल पा रहा है। वेतन नगद मिलता है, जबकि मिलना बैंक में चाहिए। पीस रेट पर रेट बहुत कम मिलता है। ऐसी स्थिति में मासिक वेतन पर काम करना अच्छा लगता है। यहाँ कोई यूनियन नहीं होने से ठेकेदार मनमानी करते हैं और कोई यूनियन वाला कभी पूछने भी नहीं आया। जबकि यूनियन बहुत ज़रूरी है। सरकार को काम-धंधों की स्थिति को सुधारना चाहिए, नहीं तो काम नहीं होने से गरीब भूखे मरेगा। लॉक डाउन के बाद पीस रेट बारह रुपए से घट कर दस रुपए हो गए हैं और काम बढ़ गया है। ठेकेदार से कहने पर कहता है कि काम करना है तो करो, नहीं तो कहीं और काम ढूँढ लो।

दिल्ली एनसीआर से राम साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि कभी भी शराब किसी भी व्यक्ति को नहीं पीना चाहिए यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है साथ ही बता रहे है कि वहां भी नहीं चलाना चाहिए शराब पि कर

कापासेड़ा, दिल्ली से नन्द किशोर साझा मंच मोबाईल वाणी के माध्यम से देवराज से एक्सपोर्ट कम्पनी और फैब्रिकेटर के काम में अंतर के सम्बंध में बात कर रहे हैं। देवराज बता रहे हैं कि इन्हें फैब्रिकेटर में पंद्रह दिन पर पैसा मिलता है, पैसा अच्छा मिलता है, काम का कोई दबाव नहीं रहता है और समय की कोई पाबंदी नहीं है। एडवांस की ज़रूरत होने पर आसानी से मिल जाता है। पीएफ़-ईएसआई तो कटता है कम्पनी में, लेकिन परेशान बहुत करते हैं। इसलिए देवराज जी फैब्रिकेटर में काम करना पसंद करते हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य से हमारे श्रोता तालीम साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि उन्हें कंपनी में समाये से वेतन नहीं मिलता है साथ ही कह रहे है की सरकार द्वारा बनाया गया नया श्रम कानून के बारे भी उन्हें नहीं पता हैं

खुले में डालते है गदगी

सही समय पर सही फैसला

Transcript Unavailable.