अशमत अली साझा मंच मोबाईल वाणी के माध्यम से नदीम से बात कर कर लॉक डाउन के बाद और पहले के हालात पर बात कर रहे हैं। नदीम बता रहे हैं कि लॉक डाउन के पहले काम काफ़ी बेहतर था। अब तो काम नहीं मिल पा रहा है। वेतन नगद मिलता है, जबकि मिलना बैंक में चाहिए। पीस रेट पर रेट बहुत कम मिलता है। ऐसी स्थिति में मासिक वेतन पर काम करना अच्छा लगता है। यहाँ कोई यूनियन नहीं होने से ठेकेदार मनमानी करते हैं और कोई यूनियन वाला कभी पूछने भी नहीं आया। जबकि यूनियन बहुत ज़रूरी है। सरकार को काम-धंधों की स्थिति को सुधारना चाहिए, नहीं तो काम नहीं होने से गरीब भूखे मरेगा। लॉक डाउन के बाद पीस रेट बारह रुपए से घट कर दस रुपए हो गए हैं और काम बढ़ गया है। ठेकेदार से कहने पर कहता है कि काम करना है तो करो, नहीं तो कहीं और काम ढूँढ लो।
