आईएमटी मानेसर से हमारे श्रोता साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि लॉक डाउन की वजह से उनके पास कोई काम नहीं है

कर्नाटक राज्य के बैंगलोर से प्रदीप ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि उनकी नौकरी चल गई है। उनके पास राशन और दवाई के लिए पैसे नहीं है

दिल्ली के बहादुरगढ़ हरियाणा से मनोहर ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से ट्रेड यूनियन के सदस्य मुकेश जी से लॉक डाउन के दौरान कंपनियों में मजदूरों को हो रही परेशानियों के विषय में खास चर्चा की। उन्होंने बताया कि पिछले साल की कड़वी यादें ही श्रमिक अभी भूले नहीं है और इस साल भी श्रमिकों को फिर से वही सब झेलना पड़ रहा है। कई श्रमिक इस आस में बैठे हैं कि कम्पनियाँ उन्हें उनके बकाये वेतन देंगे ताकि वे अपने परिवार को लेकर अपने घर वापस जा सके।

दिल्ली एनसीआर के मानेसर से रिंकी देवी ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि काम बंद हो गया है। परिवार बच्चों के साथ मानेसर में फँसी है। साझा मंच से मदद चाहिए।

बिहार से रवि ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि लोग सही से कोरोना नियमों का पालन नहीं कर रहे है जिस कारण उनका चालान काटा जा रहा है। साथ ही दिहाड़ी श्रमिकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। काम बंद हो गया है जिससे उन्हें रोज़मर्रे की समस्या उत्पन्न हो चुकी है। साथ ही अभी चोरी आदि के भी मामलें बढ़ गए है

दिल्ली एनसीआर के मानेसर के खो गाँव से शंकर पाल ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि वो किरण उद्योग कंपनी में कार्य करते है और उन्हें अप्रैल महीनें का वेतन अब तक नहीं मिला है। लॉक डाउन के कारण कंपनियाँ भी बंद हो चुकी है ,बेरोज़गारी की समस्या उत्पन्न हो चुकी है। कंपनी न तनख्वा दे रही है न ही काम दे रही है

दिल्ली के आईएमटी मानेसर गुरुग्राम हरियाणा से दीपक ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि आईएमटी मानेसर में श्रमिकों से अभी भी कोरोना काल में ,जहाँ कम्पनियाँ बंद हो गयी हैं ,मजदूरों को घर चलाना मुश्किल हो रह है वहाँ मकान मालिक श्रमिकों से किराए के लिए काफी परेशान कर रहे हैं।

राजधानी दिल्ली के बहादुरगढ़ हरियाणा से शत्रोहन लाल कश्यप ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि प्रवासी श्रमिकों के लिए सरकार पिछले एक साल में कुछ भी व्यवस्था नहीं कर पायी है

दिल्ली के करावल नगर से शाहनवाज़ की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से प्रवासी श्रमिक अलिब मोहम्मद से हुई। अलिब मोहम्मद ने बताया कि वो मजदूरी का काम करते हैं। लॉक डाउन से पहले 400 से 500 रूपए कमा लेते थे परन्तु अब कुछ कमाई नहीं होती है। वो बदायुँ के रहने वाले है और परिवार के साथ दिल्ली में किराए में रहते है। मज़दूर कार्ड नहीं रहने के कारण इन्हे कोई सरकारी सहायता नहीं मिल रही है। स्कूलों में मिलने वाले भोजन भी इन्हे नहीं मिलता है।

कोरोना संक्रमण को मात देने के लिए लॉकडाउन आखिरी जरिया हो सकता है लेकिन लॉकडाउन के कारण बेरोजगार हो रहे लोगों के सामने विकल्प के रास्ते बंद होते दिख रहे हैं. हम आपसे जानना चाहते हैं कि जो मजदूर शहरों से गांव लौटे ​हैं उन्हें वहां मनरेगा या दूसरी सरकारी योजनाओं की मदद से रोजगार मिल रहा है या नहीं? सरकार गरीबों के लिए नि:शुल्क राशन का एलान कर चुकी है, क्या आपको इस विषय में जानकारी है? क्या गांव में सरकारी राशन दिया जा रहा है या फिर किसी तरह की समस्या आ रही है? क्या बच्चों को अभी भी सरकारी मिड डे मील योजना के तहत राशन या पैसे दिए जा रहे हैं? अगर नहीं तो आप इसकी शिकायत कहां कर रहे हैं? अपनी परेशानी और बात हम तक पहुंचाएं फोन में नम्बर 3 दबाकर.



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