साझा मंच मोबाईल वाणी के सम्वादादाता अशमत अली बता रहे हैं वे कि बाबूलाल जी के मामले में हरिनगर के श्रम कार्यालय के बाहर खड़े हैं, जहाँ बहुत भीड़ लगी है और सामाजिक दूरी का थोड़ा भी पालन नहीं हो रहा है। यहाँ इकट्ठी भीड़ से पता चलता है कि लॉक डाउन के बाद काफ़ी लोगों की नौकरी चली गयी है और श्रमिक काफ़ी परेशान हैं, क्योंकि कम्पनी ने उनके पैसे नहीं दिए हैं। लगभग दो करोड़ लोगों के रोज़गार छीन गए हैं। वास्तव में श्रमिक वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर ख़ासा परेशान है। बाबूलाल जी को भी साढ़े नौ हज़ार रुपए में बारह घंटे की ड्यूटी कराकर बिना किसी पूर्व सूचना के काम से निकाल दिया गया। अब ये अपने बकाया पैसे को लेने के लिए श्रम न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं और आज हरिनगर स्थित श्रम न्यायालय में इनकी सुनवायी है।