दिल्ली एनसीआर विधानसभा कटेवरा से लाल यादव साझा मच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि उनके साथ 30-40 लोग एक साथ काम करते हैं लेकिन आज तक ठेकेदार द्वारा कभी नहीं भी पीएफ काटा गया
दिल्ली से नन्द किशोर ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लॉक डाउन के कारण बच्चे घरों में कैद हो गए थे। अनलॉक के दौरान बाजार और कार्यालय तो खुल गए लेकिन एहतियात के तौर पर अभी तक स्कूलों को नहीं खोला गया है। ऐसे में बच्चे ऑनलाइन कक्षा के जरिए ही पढ़ाई कर रहे हैं इस दौरान बच्चों को घर से निकलने का अवसर ही नहीं मिल पा रहा है
दिल्ली से नन्द किशोर ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि रेहड़ी पट्टी वालो को जगह और लाइसेंस मिलना चाहिएं।
दिल्ली से हस्मत अली ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वार्ड 64 में शिकायत करने के बावजूद भी मच्छर नाशक दवा का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। पूरी खबर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
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हरियाणा राज्य के बहादुरगढ़ से अनुभव,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि रेपिड रेल भारत की सभी पब्लिक रुत बदलेगी। पूरी खबर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
बहादुरगढ़, हरियाणा से साझा मंच मोबाईल वाणी के सम्वाददाता एस एन कश्यप बता रहे हैं कि सेक्टर सत्रह में स्थित जूते-चप्पल की कम्पनियाँ मज़दूरों की छँटनी करने के लिए चार-पाँच दिन की छुट्टी कर देती हैं कि जब कॉल करेंगे तब आना। इस स्थिति में मजबूर होकर वे दूसरी जगह काम करने के लिए चले जाते हैं। उन्हें उनके बकाया वेतन के लिए भी परेशान किया जाता है।
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अगर आपकी कंपनी में 20 या 20 से अधिक मज़दूर काम करते हैं तो आपकी कंपनी को पी.एफ का योगदान देना अनिवार्य है, आप कंपनी केलिए काम करते हैं ना कि ठेकेदार केलिए। पी.एफ एक बच्चत खाता होता है जोकि मज़दूरों का हक़ है। लेकिन अगर कम्पन्यां या कांट्रेक्टर पी.एफ का योगदान करने से मना करते हैं तो आप इसकी शिकायत पी.एफ ऑफिस में जरूर करें। अगर आपकी समस्या का हल नहीं मिलता है तो आप एक लेबर ऑफिस भी जा सकते हैं, जहां लेबर अधिकारी आपके और आपकी कंपनी के बीच सुलह करवाने कि कोशिश करेंगें, और समझौता ना होने पर वे आपका केस लेबर कोर्ट में भेज देंगे। मज़दूरों का शोषण इसलिए होता है क्योंकि कम्पन्यां मज़दूरों को अलग-अलग बाट कर रखना चाहती है, और वे इसमें सफल भी हुऐ हैं, कोई भी मजदूर यूनियनो के साथ नहीं जुड़ते और जिसका सीधा फायदा कम्पन्यां उठाती हैं। दूसरी बात यह है कि मज़दूरों को अपने हकों के बारे में कोई जानकारी नहीं होती और आखिर में जब उन्हें अपना पी.एफ-ईएसआई का लाभ चाहिये होता है तब वो कंपनी से सरकारी दफ़्तर और सरकारी दफ़्तर से कंपनी दौड़ते रहते हैं। मज़दूरों में जबतक एकता और अपने हकों के बारे में जानकारी नहीं होगी तब तक उनका शोषण हर तरफ़ से होता रहेगा। एकता कि ताकत को मज़दूर अभी तक नहीं समझ पाए हैं।
Sept. 30, 2020, 12:36 p.m. | Tags: govt entitlements int-PAJ industrial work workplace entitlements