दिल्ली एनसीआर विधानसभा कटेवरा से लाल यादव साझा मच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि उनके साथ 30-40 लोग एक साथ काम करते हैं लेकिन आज तक ठेकेदार द्वारा कभी नहीं भी पीएफ काटा गया
दिल्ली एनसीआर विधानसभा कटेवरा से लाल यादव साझा मच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि उनके साथ 30-40 लोग एक साथ काम करते हैं लेकिन आज तक ठेकेदार द्वारा कभी नहीं भी पीएफ काटा गया
Comments
अगर आपकी कंपनी में 20 या 20 से अधिक मज़दूर काम करते हैं तो आपकी कंपनी को पी.एफ का योगदान देना अनिवार्य है, आप कंपनी केलिए काम करते हैं ना कि ठेकेदार केलिए। पी.एफ एक बच्चत खाता होता है जोकि मज़दूरों का हक़ है। लेकिन अगर कम्पन्यां या कांट्रेक्टर पी.एफ का योगदान करने से मना करते हैं तो आप इसकी शिकायत पी.एफ ऑफिस में जरूर करें। अगर आपकी समस्या का हल नहीं मिलता है तो आप एक लेबर ऑफिस भी जा सकते हैं, जहां लेबर अधिकारी आपके और आपकी कंपनी के बीच सुलह करवाने कि कोशिश करेंगें, और समझौता ना होने पर वे आपका केस लेबर कोर्ट में भेज देंगे। मज़दूरों का शोषण इसलिए होता है क्योंकि कम्पन्यां मज़दूरों को अलग-अलग बाट कर रखना चाहती है, और वे इसमें सफल भी हुऐ हैं, कोई भी मजदूर यूनियनो के साथ नहीं जुड़ते और जिसका सीधा फायदा कम्पन्यां उठाती हैं। दूसरी बात यह है कि मज़दूरों को अपने हकों के बारे में कोई जानकारी नहीं होती और आखिर में जब उन्हें अपना पी.एफ-ईएसआई का लाभ चाहिये होता है तब वो कंपनी से सरकारी दफ़्तर और सरकारी दफ़्तर से कंपनी दौड़ते रहते हैं। मज़दूरों में जबतक एकता और अपने हकों के बारे में जानकारी नहीं होगी तब तक उनका शोषण हर तरफ़ से होता रहेगा। एकता कि ताकत को मज़दूर अभी तक नहीं समझ पाए हैं।
Sept. 30, 2020, 12:36 p.m. | Tags: govt entitlements int-PAJ industrial work workplace entitlements