दिल्ली, एनसीआर, बहादुरगढ़, हरियाणा से साझा मंच मोबाईल वाणी के सम्वाददाता मनोहर लाल कश्यप सीटू के रामनाथ पंडित, जो मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार से हैं, उनसे बात कर रहे हैं। रामनाथ पंडित बता रहे हैं कि कोविड संकट का इतने कष्टपूर्वक सामना करने के बाद भी श्रमिकों, ग़रीबों की सुध लेनेवाला कोई नहीं है। जो सुविधाएँ मिलती भी हैं, वे सुविधाएँ श्रमिकों तक नहीं पहुँच पातीं। लॉक डाउन के बाद श्रमिकों की स्थिति बहुत दयनीय हो गयी है। लॉक डाउन में हम बेघर हो गए हैं। श्रमिकों को एक तरफ़ काम नहीं मिल रहा, दूसरी तरफ़ मज़दूरी बहुत कम मिलती है, इस तरह कैसे हमारा घर-परिवार चलेगा! हमलोगों की कहीं-कोई सुनवाई नहीं है, तो आख़िर हम कहाँ जाएँ! इसलिए साझा मंच से आग्रह है कि हमारी बात सरकार तक पहुँचाएँ, जिससे हमारा कुछ भला हो। श्रमिकों की समस्याओं को सरकार के सामने रखने और उनके समाधान के लिए हमलोग गाँव-गाँव घूमकर, प्रखंड-ज़िला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन भी करते हैं। ताकि हमें मज़दूरी अच्छे से मिले और घर-परिवार अच्छे से चले। इस दौरान दबंग लोग दबाव बनाने की भी कोशिश करते हैं, जिससे हम ये सब बंद कर दें और जितना मिलता है, उतने में ही काम करें। लॉक डाउन के बाद कम मिल रही मज़दूरी के कारण श्रमिक आर्थिक रूप से बहुत परेशानी में हैं। लॉक डाउन के बाद पैसा काम मिलने के कारण श्रमिकों ने पीएफ़ और ईएसआई कटवाना भी बंद कर दिया है। जब पैसा ही नहीं बचेगा, तो श्रमिक कहाँ से पीएफ़ और ईएसआई कटवाएगा।
