लंबी दूरी की बसे नेशनल हाईवे के किनारे ही खड़ी कर यात्रियों को बैठाया जाता है। छतौनी नेशनल हाईवे के किनारे यह नजारा देखने को मिल सकता है। सड़क के किनारे छतौनी नेशनल हाईवे के किनारे अघोषित रुप से टिकट काउंटर बना है। जिससे सरकार को प्रत्येक माह लाखों रुपये राजस्व का नुकसान होता है। पर्व के समय अत्यधिक भीड़ होने पर सीट देने के नाम पर बसों में ठूंस-ठूंस कर यात्रियों को बेंच पर बैठाया जाता है। भोले-भाले यात्रियों को सीट देने के नाम पर दलाल कमीशन पर काम करते है। दिल्ली जाने वाले यात्री नाम नहीं छापने के आधार पर बताया कि आगे का सीट देने के नाम पर बात किया गया है। जब सीट बुकिंग कराया गया तो बीच के सीट को बुक किया गया है। छतौनी नेशनल हाईवे के किनारे दिल्ली से लेकर सिलीगुड़ी, कलकत्ता, रांची सहित अन्य स्थानों के लिए जाने वाली लंबी दूरी की गाड़ियां खड़ी रहती है।
नगर पुलिस ने शहर में गश्ती के दौरान नशे की हालत में दो युवक को हिरासत में लेकर मेडिकल जांच करायी तो अल्कोहल की पुष्टि हुई। हिरासत में लिये गये युवकों में प्रभात कुमार व अभिनव कुमार शामिल हैं।
नगर पुलिस ने जानपुल चौक से बीस बोतल विदेशी शराब के साथ आमोद कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत भेज दिया।
अपग्रेड हुए मिडिल और हाईस्कूल में अलग-अलग इकाई होंगी। मिडिल से प्लस 2 में अपग्रेड स्कूलों को लेकर सरकार ने यह निर्देश दिया है। पहली से 8वीं और 9वीं से 12वीं तक के लिए अलग-अलग शैक्षणिक और प्रशासनिक इकाई होंगी। सरकार ने निर्देश दिया है कि दोनों स्कूल का संचालन भी अलग-अलग समिति के माध्यम से होगा। यही नहीं, दोनों का यू डायस कोड भी अलग-अलग होगा। कई स्कूलों में यू डायस भरने में मिडिल और हाईस्कूल के शिक्षकों के बीच मामला फंसा था। ऐसे स्कूल जो मिडिल से प्लस 2 स्कूल में अपग्रेड हुए हैं और जहां वर्तमान में बीपीएससी के माध्यम से प्रधानाध्यापक की प्रतिनियुक्ति की गई है, वहां नियमित प्रधानाध्यापक को ही यूजर आईडी और पासवर्ड मिला था। इन स्कूलों में मिडिल के शिक्षकों ने शिकायत की थी कि उन्हें छात्रों का डाटा भरने में इस कारण परेशानी आ रही है। शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार ने इसे लेकर निर्देश दिया है।
सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ योग भी सीखेंगे। योग व खेलकूद की कवायद शुरू करने की प्रक्रिया विभाग ने आरम्भ कर दिया है। सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राएं अब पढ़ाई के साथ ही शारीरिक शिक्षा, योग व खेलकूद के भी गुर सीखेंगे। नई शिक्षा नीति को ले हर जिले से एक शारीरिक शिक्षक व शिक्षिका को तीन दिनों का प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिले से भी इसके लिए शिक्षक को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद जिले में मिडिल व हाई स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिए जाने के आसार हैं। स्कूलों में नौवीं तक के बच्चों को शारीरिक शिक्षा, योग व खेलकूृद की गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इसके बाद दक्ष बच्चों को उनकी दक्षता के आधार में रिपोर्ट कार्ड में अंक जोड़ा जाएगा। स्कूल की ओर से अर्द्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षा में शारीरिक शिक्षा, योग व खेलकूद की गतिविधियों का भी मूल्यांकन किया जाएगा एवं इसी आधार पर रिपोर्ट कार्ड में अंक जोड़े जा सकेंगे। बदलते जीवन शैली में योग व शारीरिक शिक्षा तथा खेल का अपना महत्व है। लिहाजा बच्चों में होने वाले तनाव से इससे मुक्ति मिलेगी और छात्र- छात्राएं इससे अपने को तनाव मुक्त अनुभव कर सकेंगे। इसे सिलेबस में भी शामिल किए जाने की विभागीय कवायद शुरू की गई है। स्कूली बच्चों को हर शनिवार को योग व खेलकूद की गतिविधियों में शामिल किया जा सकता है। शनिवार को स्कूलों में योग, व्यायाम, खेलकूद सांस्कृतिक आदि गतिविधियां कराए जाने से बच्चों को काफी फायदा होगा। बच्चों के मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत: खेल और योग मूल्याकंन के आधार पर भी सभी स्टूडेंट्स के रिपोर्ट कार्ड तैयार किए जाएंगे। शारीरिक शिक्षा को लेकर विभाग द्वारा कहा गया है कि आजकल की जीवन शैली में बहुत बदलाव आया है। लोग तरह-तरह की बीमारी का शिकार हो रहे हैं। इन बीमारियों से हमारे बच्चे भी अछुते नहीं है। इस खेल और योग शिक्षा से बच्चों की सेहत में काफी बदलाव आएगा और तनावमुक्त करने का ये एक बहुत ही बढ़िया माध्यम है। इसके लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् को इसपर बिना किसी देरी के लागू करने का निर्देश दिया है।
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डुमरियाघाट थाना क्षेत्र के पूर्वी पकड़ी गांव में युवक की संदिग्ध स्थिति में मौत हो गयी। मृतक का नाम बबलू साह उर्फ मटुक साह है। डुमरियाघाट पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। मौत का कारण पुलिस ने अस्पष्ट बताया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत का वजह सामने आयेगा।
एंबुलेंस के लिए 102 नम्बर पर फोन करने पर अनुमंडलीय अस्पताल से दूर दराज क्षेत्रों में भी एंबुलेंस पहुंच जाती है, लेकिन जो इमरजेंसी मरीज होते हैं उनके परिजन एंबुलेंस का इंतजार नहीं करते हैं। वे निजी सवारी से मरीज को लेकर अस्पताल पहुंच जाते हैं। या फिर जो सड़क दुर्घटना में जख्मी हो जाते हैं उन्हें अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस का इंतजार नहीं करते हैं बल्कि जो निजी सवारी मिलते है उससे मरीजों को अस्पताल भेज दिया जाता है। महंगुआ के राजेश चौधरी, बलुआ के राजेश राम, भवानीपुर के मो. रहमत आदि ने बताया कि सीरियस मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस को फोन करने के बाद जितनी देर में यहां पहुंचकर अस्पताल ले जाएंगें उससे कम समय में निजी संसाधन से अस्पताल पहुंचा जा सकता है। क्योंकि इस गांव की दूरी ढाका अस्पताल से करीब पंद्रह किलोमीटर से ज्यादा है। सीरियस मरीज के लिए एंबुलेंस का इंतजार तो किया नहीं जा सकता है क्योंकि देरी होने पर मरीज के साथ परेशानी बढ़ सकती है। इधर, अस्पताल उपाधीक्षक डॉ कर्नल एन के साह ने बताया कि एंबुलेंस के लिए जैसे ही कहीं से सूचना मिलती है उसी क्षण एंबुलेंस वहां के लिए रवाना हो जाती है। रास्ते में जाम की समस्या होने पर थोड़ी सी विलंब हो जाती है। अस्पताल में तीन एंबुलेंस होने से एंबुलेंस को भेजने में समस्या नहीं होती है। सरकारी एंबुलेंस के भरोसे जा सकती है मरीजों की जान,नहीं लगता सरकारी नंबरआदापुर। अगर सरकारी एंबुलेंस के भरोसे कोई रहे तो समय से अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो जायेगा और मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। यह कहना है सुदूर ग्रामीण गांव लतियाही के सुरेश कुमार का। बलुआ के हरिनंदन कहते हैं कि सरकारी नंबर पर फोन लगना ही कठिन है। सिरिसिया माल के प्रदीप बैठा कहते हैं कि सरकारी नंबर 102 और 112 से ही अधिकांश लोग अनभिज्ञ हैं,जिन्हें पता है वे मरीज की स्थिति देख पहले से ही नंबर डायल करना शुरू कर देते हैं और नंबर लग जाने के बाद आदापुर सीएचसी का एंबुलेंस पहुंच जाता है। बिसुनपुरवा के श्यामाकांत कहते हैं कि इमरजेंसी हो तो सरकारी नंबर जल्दी नहीं लगता,जिसके वजह से प्राइवेट गाड़ियों का ही सहारा लेना पड़ता है। सीएचसी में तीन एंबुलेंस उपलब्ध है। जो पीपीपी मोड में संचालित है। इसमें दो एंबुलेंस अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा से लैस है। एंबुलेंस कर्मी अमित कुमार बताते हैं कि जैसे ही सूचना मिलती है प्रखंड के किसी भी कोने में एंबुलेंस बीस से पच्चीस मिनट में पहुंच जाता है। सीएचसी प्रभारी डॉ.संतोष कुमार बताते हैं कि अधिकांश ग्रामीणों को सरकारी नंबर ही नहीं पता है।इस वजह से भी उन्हें एंबुलेंस सेवा नहीं मिल
पिछले 1 वर्षों के अंदर रेड क्रॉस के अंतर्गत आईसीटीसी में 6725 निशुल्क एचआईवी की जांच और वीडीआरएल की जांच की गई है । जिसमें 80 एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की पहचान की गई जिसकी दवा आईटी सेंटर के द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।नई कार्यकारिणी समिति ने नए ब्लड यूनिट को लगाया है जिसका उद्घाटन संभवत अगले सप्ताह राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ के द्वारा किया जाएगा। इस मशीन के लगने से लगभग 8 जिलों के लोगों मेें गोपालगंज, छपरा ,सिवान ,पूर्वी व पश्चिमी चंपारण ,शिवहर, सीतामढ़ी तथा नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा ।शिविर में निशुल्क जांच चिकित्सा के लिए व्यवस्था की गई है।इसके साथ उचित परमर्श भी दिया गया।मौके पर दिलीप कुमार सिंह ,महेश प्रसाद सिन्हा आदि थे।
बिहार बंगाल व नेपाल को रेल सेवा से जोड़ने वाली प्रमुख मिथिला एक्सप्रेस ट्रेन में स्लीपर व जेनरल कोच की कटौती किये जाने से इस रेल खंड पर यात्रा करने वाले आम यात्रियों को भारी कठिनाई का सामना करने के साथ सफर से वंचित होना पड़ रहा है।रेल यात्रा से जुड़े इस गंभीर समस्या का खुलासा हुआ। जब ट्रेन में यात्रा करने वाली एक महिला यात्री ने शिकायत दर्ज करा कर रेलवे विभाग को समस्या से अवगत कराया। शिकायत में कहा गया है कि ट्रेन में कोच न होने से साधारण यात्रियों की मुजफ्फरपुर स्टेशन पर भीड़ होने की वजह से स्लीपर एस एक से चार तक भीड़ अप्रत्याशित हो गई व आरक्षित सीट नहीं मिल पायी। यहां तक कि टॉयलेट तक आने जाने का रास्ता अवरुद्ध हो गया।भीड़ इतनी की सांस लेना तक नहीं लिया जा रहा था। बर्थ पर छह यात्री के स्थान पर 25 यात्री सफर को लाचार थे।
