आरबीआई के फैसले से 2000 के नोट प्रचलन से बंद होने पर क्षेत्र में लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो जाए हो गई है लोगों ने कहा कि 2000 के नोट मार्केट में देखने को नहीं मिली थी इसके बंद हो जाने से लोगों को कोई परेशानी नहीं है नहीं होगी , आरबीआई का यह फैसला सराहनीय है इसे पहले ही बंद हो जाना चाहिए था अब 2000 के नोट को 30 सितंबर तक बैंक से बदला जा सकता है 2000 के नोट बंद होने पर लोगों की प्रतिक्रिया जानते हैं
भीषण गर्मी में ट्रांसफार्मर जलने की लगातार शिकायतों आ रही हैं। बिजली कंपनी द्वारा जले हुए या खराब ट्रांसफार्मर 24 घंटे के अंदर बदलने की तैयारी शुरू की गयी है। सूत्रों के अनुसार सभी विद्युत अंचलों में अधीक्षण अभियंताओं को ट्रांसफार्मर जलने की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जवाबदेही सौंपी गयी है। सभी विद्युत डिवीजन में कनीय अभियंताओं के दिशा-निर्देश में जले हुए ट्रांसफार्मर को चिन्हित करते हुए उसे बदलने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए बिजली कंपनी ने अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की व्यवस्था पहले से रखने को कहा है। जिन अंचलों में आवश्यकता से अधिक ट्रांसफार्मर हैं, उनसे भी इसे लिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार राज्य में वर्तमान में दिन का तापमान 43-44 डिग्री रहने के कारण ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ गया है। 63 केवी व 100 केवी के ट्रांसफार्मर पर उसकी क्षमता से अधिक लोड होने के कारण उसके जल जाने के मामले सामने आ रहे हैं। इन दिनों एसी, कूलर व अन्य बिजली के उपकरणों का उपयोग बढ़ गया है। खासकर, घनी आबादी व मार्केट में स्थित ट्रांसफार्मर में अधिक शिकायतें सामने आ रही है।
बसवरिया गांव में साइड लेने को लेकर हुए विवाद में बाइक सवार अपराधियों ने ट्रैक्टर चालक लक्ष्मण पासवान को गोली मारकर जख्मी कर दिया। उसे आनन-फानन में ग्रामीणों ने इलाज के लिए मोतिहारी के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया है। वहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना रविवार दोपहर की है।गोली चलने की आवाज सुनते ही घटनास्थल पर अफरातफरी मच गई। घटना के बाद ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।चालक लक्ष्मण पासवान बहुआरवा गांव निवासी रामरीत पासवान का पुत्र है।वह तीन दिनों से पूर्व मुखिया ओशी अख्तर का ट्रैक्टर ट्रॉली चला रहा था। घटना के समय वह गांव स्थित दीघा पोखर के पूर्वी किनारे नवनिर्मित छठ घाट पर मिट्टी गिरा कर पोखर में जा रहा था। चिरैया की ओर से बाइक पर सवार होकर आ रहे दो युवकों से साइड लेने को लेकर कहासुनी हो गई।
पिछले साल वर्ष 2021 में आयी बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुयी सड़कों की अबतक पूर्ण रूप से मरम्मत नहीं हो पायी है। और न हीं इसकी कोई योजना है। पुन बाढ़ का सीजन आने को है लेकिन विभागीय स्तर पर कोई तैयारी नहीं है। यहां तक कि ढाका में वर्ष 2017 में आयी बाढ़ में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मती नहीं हो पायी है। ढाका में बाढ़ से क्षतिग्रस्त 48 सड़कों का चयन किया गया था। पिछले साल आयी बाढ़ में जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हो गयी थी वहां ईंट का टुकड़ा गिराकर आवागमन को फिलहाल चालू कर दिया गया था, लेकिन वहां पर पूर्ण रूप से मरम्मत नहीं किये जाने के कारण वह प्वाईंट कमजोर बना हुआ है, जिससे इस साल भी बाढ़ में वहां पर सड़कें फिर टूटने की संभावना बनी हुयी है। सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण बाढ़ के दिनों में कई गांवों का सड़क सम्पर्क प्रखंड मुख्यालय से टूट जाता है इससे लोगों को काफी परेशानी होती है। विधायक पवन जायसवाल ने बताया कि 2017 में आयी बाढ़ में जो सड़कें क्षतिग्रस्त हो गयी थी और उसमें ईंट का टुकड़ा व राबिस गिराकर आवागमन जो चालू किया गया था उसका एक पैसा का भुगतान संवेदक को नहीं मिल पाया है। 81 सड़कों के अनुरक्षक के लिए टेंडर की प्रक्रिया होने जा रही है। उसमें यदि वह सड़क होगी तो उसकी मरम्मत हो जाएगी। इधर, आरडब्लूडी के कार्यपालक अभियंता एस एन मंडल ने बताया कि सभी क्षतिग्रस्त सड़कों का डीपीआर बनाकर विभाग को भेजा गया है। बाढ़ में जो सड़कें क्षतिग्रस्त होगी उसकी मरम्मती के लिए बाढ़ आपदा के तहत मैटेरियल व्यवस्था कर रखा गया है। तुरंत ही वहां मैटेरियल गिरा आवागमन बहाल कर दिया जाएगा।
चंवर क्षेत्र के आर्द्र भूमि में मछली पालन से मत्स्यपालकों की अच्छी कमाई होगी। मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए चंवर क्षेत्र की भूमि में तालाब निर्माण कर मछली पालन किया जाएगा। चंवर विकास योजना के तहत जिले में चंवर क्षेत्र में मछली पालन किये जाने की हरी झंडी राज्य सरकार के द्वारा दी गयी है। इस योजना के लिए मत्स्यपालक किसान विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। तालाब निर्माण पर मिलेगा अनुदान चंवर में बाढ़ व सुखाड़ से रबी या खरीफ फसल नहीं हो पाती है। जिससे किसानों को हर साल नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन अब चंवर में तालाब निर्माण से मछली पालन कर किसान कमाई कर सकेंगे। इसको ले सरकार किसानों को अनुदान मुहैया करा रही है। प्रति हेक्टेयर तालाब निर्माण पर 7 से 11 लाख रुपये इकाई लागत निर्धारित है। इसमें सामान्य वर्ग के किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान का लाभ मिलेगा। इसके अलावा ओबीसी, एससी व एसटी वर्ग के किसानों को 70 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। पिछले साल 38 हेक्टेयर चंवर भूमि के लिए तालाब निर्माण की स्वीकृति विगत वित्तीय वर्ष में जिले में चंवर विकास योजना के तहत 38 हेक्टेयर में तालाब निर्माण कर मछली पालन की स्वीकृति दी गयी है। तालाब निर्माण कार्य चल रहा है। इसके पूर्व 870 हेक्टेयर चंवर भूमि में मछली पालन किया जा रहा है।
रेड क्रॉस में अगले सप्ताह ब्लड सेपरेटर की सुविधा शुरू होने जा रही है। जो मोतिहारी के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। अब प्लाज्मा, प्लेटलेट सहित आरबीसी की सुविधा रेड क्रॉस से ही मिल जाएगी। लाभ मोतिहारी, बेतिया, सिवान, गोपालगंज के अलावा नेपाल को मिलेगा। बताया जाता है कि ब्लड सेपरेटर से एक यूनिट ब्लड से प्लाजमा, प्लेटलेट व आरबीसी अलग कर देगा। जो अलग अलग बीमार मरीज़ों के काम आयेगा। अब होल ब्लड चढ़ाने की ज़रूरत नही पड़ेगी।इस ब्लड सेपरेटर से ब्लड की बहुत बचत होगी। क्योंकि प्लाजमा, प्लेटलेट व आरबीसी के लिये मरीज को होल ब्लड चढ़ाना पड़ता था। मगर अब यह सुविधा रेड क्रॉस ब्लड बैंक मै शुरू होने जा रही है। सुविधा अभी मोतिहारी, बेतिया, गोपालगंज,शिवहर, सीतामढ़ी सहित पड़ोसी राज्य नेपाल के वीरगंज तक नहीं है। जानकर बताते हैं कि डेंगू के मरीज को प्लेटलेट , जले हुये मरीज को प्लाजमा व हीमोग्लोबिन के लिये आरबीसी की जरूरत होती है। विशेष स्थिति में होल ब्लड की जरूरत होती है। इसकी सुविधा नहीं होने के कारण डेंगू , जले हुये मरीज को रेफर किया जाता है। यह सुविधा कैसे मिलेगी यह निर्णय रेड क्रॉस के चेयरमैन जल्द ही खुलासा उदघाटन के साथ करेंगे। जिले में करीब 2 सौ से 250 यूनिट ब्लड की यहां रोज खपत है। यह खपत ब्लड सेपरेटर नहीं रहने के कारण होल ब्लड चढ़ाने से होता है। मगर नई सुविधा से ब्लड के कालाबजारी करने वाले कतिपय दलालों को चोट लगेगी क्योंकि होल ब्लड अब मरीज नहीं चढ़वाएंगे। बीमारी के हिसाब से ब्लड चढ़ेगा। बताया जाता है कि सदर अस्पताल रेड क्रॉस में ब्लड बैंक की सुविधा है। इसके अलावा एक दो और है जहां ब्लड बैंक है। मगर खपत कम है। इसके अलावा जिले में ब्लड की कालाबजारी का बड़ा रैकेट भी चलता है। रेड क्रॉस के अध्यक्ष ई विभूति नारायण सिंह ने बताया कि जल्द ही ब्लड सेपरेटर शुरू कर दिया जाएगा।
भारत नेपाल सीमावर्ती प्रमुख रक्सौल पोस्ट ऑफिस परिसर के आगे की भूमि पर अवैध रुप से दुकान लगा कर अतिक्रमण किये जाने से पोस्ट ऑफिस व एटीएम की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। इससे मेल वाहन व ग्राहकों को आने जाने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। पोस्ट ऑफिस मुख्य गेट से लेकर एटीएम तक आगे अवैध ठेलानुमा दुकान से भूमि का अतिक्रमण किये जाने को लेकर स्थानीय पोस्ट ऑफिस के पदाधिकारी बारबार सम्बन्धित विभाग व पुलिस को पत्र देकर समस्या से अवगत कराया जाता रहा है। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया है।इस बावत पूर्वी चम्पारण डाक डाक अधीक्षक चम्पारण प्रमंडल मोतिहारी ने भी बीस अप्रैल को नगर परिषद कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिख कर उपरोक्त स्थान से अतिक्रमण हटाने की गुजारिश की थी। एक माह होने को है। परन्तु अतिक्रमण नहीं हट पाया है। डाक बिभाग के सूत्रों के अनुसार पूर्व से डाक बिभाग अपराधियों के निशाने पर रहा है। दो दशक पूर्व पोस्ट ऑफिस से मोतिहारी जा रहे सवा छह लाख रुपया को अपराधियों ने स्टेशन रोड में गोलीबारी कर दो पुलिस जवान की हत्या करके लूट लिया था। तब से यह डाक घर पर सदैव अपराधिओं का खतरा बना रहता है।ऐसे में यदि डाक घर की सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद नहीं होती है। तो आपराधिक घटना घटने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि हाल के दिनों में पोस्टल एटीएम से भुगतान लेकर निकले वाले ग्राहक से एटीएम के बाहर अतिक्रमण से भीड़ होने की वजह से छिंनतई की घटना आये दिन सुनने को मिल रही है।
गर्मी सितम ढाह रही है। इसका असर खेती पर भी पड़ रहा है। मूंग की फसल भी पानी के अभाव में सुख रही है। गरमा धान भी बारिश नहीं होने से पीले पड़ रहे हैं। किसान हर दो दिन पर सिंचाई कर रहे हैं। खेतों में नमी नहीं होने के कारण धान के बिचड़ा तैयार करने में भी देरी हो रही है।किसान बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे है। बारिश नहीं होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खीच रही है। आखिर किसान कितना सिंचाई कर धान का बिचड़ा गिराये। किसान धान का बिचड़ा गिरा भी देते है तो उसे बिना बारिश के बचाना संभव नहीं होगा। दुकानों में धान का बीज आ चुका है, लेकिन बारिश नहीं होने से इसकी बिक्री अभी शुरू नहीं हो पायी है। किसान रामबिहारी सिंह, सरफराज आलम, बिपिन बिहारी प्रसाद आदि का कहना है कि धान का बिचड़ा गिराने के लिए खेतों में नमी है ही नहीं। बिचड़ा गिर भी जाता है तो वह जम नहीं पाएगा क्योंकि खेतों में नमी नहीं है। बारिश हुए कई महीने हो गए। सिंचाई की व्यवस्था माकूल नहीं होने से किसानों को खरीफ खेती के लिए परेशानी हो रही है। वर्षा नहीं होने से मूंग की फसल पर गहराने लगे हैं संकट के बादल मधुबन। वर्षा नहीं होने से मधुबन में मूंग की फसल पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। किसान फसल को बचाने के लिए 7 दिनों के अंतराल पर मूंग की फसल में पानी का पटवन कर रहे हैं। किसान बच्चालाल सहनी,पप्पू यादव,भरत महतो,रंजीत पटेल, सत्यनारयण भगत आदि ने बताया कि मूंग की फसल में पानी का पटवन करने के बाद उसमें कीड़ा लग जा रहा है। जो फसल को बर्बाद कर रहा है। दवा का छिड़काव करने के बाद कीड़ा मर जा रहा है। किंतु अगला पटवन करने के बाद फिर से फसल में कीड़ा पकड़ ले रहा है। मूंग की कई खेतों में दरारें पड़ गयी हैं। वहीं वर्षा के अभाव में धान की खेती के लिए बिचड़ा को तैयार करना भी किसानों के लिए संभव नहीं हो पा रहा है। बताया कि नमी के अभाव में खेतों को जुताई नहीं हो पा रही है। तपती धूप व गर्मी से गरमा फसलें खेतों में सूख रही है। किसान सब्जी के साथ मूंग की फसल को बचाने के लिए बार-बार पटवन कर रहे हैं।
राज्य सरकार असिंचिंत क्षेत्रों में सिंचाई की नई वैकल्पकि व्यवस्था देने के लिए नई योजना ला रही है। किसान अपने खेतों में पटवन के लिए निजी नलकूप लगा सकेंगे। इसमें राज्य सरकार किसानों को भरपूर अनुदान देने जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर लघु जल संसाधन विभाग इस योजना के प्रारूप को लगभग अंतिम रूप दे चुका है। मुख्य सचिव आमिर सुबहानी के समक्ष दो दिन पूर्व ही इस नई योजना का प्रस्तुतीकरण विभागीय प्रमुख ने किया है। अब शीर्ष स्तर पर मंजूरी मिलने के साथ ही इसे लागू करने की तैयारी है। राज्य सरकार के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक सात निश्चय-2 के प्रमुख अवयव ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ के तहत 90 हजार निजी नलकूपों के लिए राज्य सरकार अनुदान देगी। ये नलकूप 70 मीटर तक के होंगे। योजना लागू हुई तो 90 हजार निजी नलकूपों पर अनुदान के रूप में राज्य सरकार 630 करोड़ रुपए खर्च करेगी। अनुदान की व्यवस्था को एक तय समयसीमा (90 दिन) में लागू करने के लिए एनआईसी द्वारा पोर्टल का निर्माण अंतिम चरण में है। ऑनलाइन आवेदन मांगे जायेंगे और डीबीटी के माध्यम से अनुदान की राशि किसानों के खाते में जाएगी। गौरतलब है कि लघु जल संसाधन विभाग द्वारा बिहार शताब्दी नलकूप योजना पहले से संचालित थी, लेकिन अनुदान कम होने और योजना की जटिलताओं से इसका फलाफल वैसा नहीं निकला है। इसीलिए नई योजना लायी जा रही है। इसके तहत किसान ऑनलाइन आवेदन कर स्वीकृति मिलने पर निजी बोरिंग कराकर अनुदान का लाभ पा सकेंगे। योजना के तहत असिंचिंत क्षेत्र के लघु, सीमांत कृषक, जिनके पास स्वयं के नाम से 0.40 एकड़ कृषि भूखंड हो, उन्हें ही लाभ मिलेगा। एक कृषक को एक ही बोरिंग एवं मोटर पम्प सेट के लिए अनुदान मिलेगा तथा न्यूनतम 15 मीटर गहराई तक बोरिंग करने पर ही यह लाभ दिया जाएगा।
भीषण गर्मी के कहर का असर निजी नलकूपों पर दिखने लगा है। भूजल स्तर नीचे जाने से निजी नलकूप सूखने लगे हैं।नलकूपों के सूखने से पानी नहीं निकल रहा है। इससे सिंचाई पर ग्रहण लगने लगा है। ऐसा वाक्या मोतिहारी प्रखंड के आधा दर्जन गांवों में दिखने लगा है। जिससे सैकड़ों में सिंचाई कार्य प्रभावित हो गया है। खरीफ मौसम के लिए धान का बिचड़ा गिराने के लिए खेत में सिंचाई कार्य पर काफी असर पड़ा है। सब्जी उत्पादक किसानों को सब्जी फसल की सिंचाई के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। पंपसेट से पानी निकालने के लिए मशक्कतनिजी नलकूपों से सिंचाई के लिए किसान पंपसेट का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन पंपसेट चालू करने के बाद भी बोरिंग से पानी नहीं निकल रहा है। कुछ जगह काफी मशक्कत के बाद बोरिंग से पानी निकल भी रहा है तो उससे सिंचाई करने में अधिक समय लग रहा है। जिससे डीजल पंपसेट से सिंचाई करना किसानों को महंगा पड़ रहा है। मोतिहारी प्रखंड के कई गांव हुए प्रभावितभूजल स्तर नीचे चले जाने से सिंचाई कार्य प्रभावित होने का असर कई गांवों पर पड़ा है। मोतिहारी प्रखंड के बसवरिया, मठिया, सिरसा,गोढ़वा आदि गांवों में निजी नलकूपों से सिंचाई प्रभावित हुआ है। बसवरिया के किसानश्री ललन प्रसाद शुक्ला ने बताया कि भूजल स्तर नीचे जाने से निजी नलकूपों से सिंचाई कार्य बाधित हो गया है। लाख मशक्कत के बाद भी कई निजी नलकूपों से पानी नहीं निकल रहा है। जिससे धान का बिचड़ा गिराने के लिए खेत की सिंचाई नहीं हो पा रही है। बसवरिया के किसान छोटेलाल सहनी ने बताया कि पानी का लेयर नीचे चले जाने से निजी बोरिंग से पानी नहीं निकल रहा है। गोढ़वा के किसान हरेन्द्र प्रसाद,कृष्णा प्रसाद आदि ने बताया कि गर्मी ज्यादा पड़ने से सब्जी की खेती में सिंचाई की अधिक जरूरत है। लेकिन भूजल स्तर नीचे चले जाने से सिंचाई में अधिक समय लग रहा है। गर्मी अधिक पड़ने से रोज रोज सिंचाई की आवश्यकता पड़ रही है लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। भूजल-स्तर गिरने से किसानों की बढ़ी परेशानी मधुबन। भूजल-स्तर नीचे गिरने से चापाकलों के साथ निजी नलकूप भी हकलाने लगे हैं। इससे खेतों में लगी फसल व आम लीची के बाग के फलों को बचाने में किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मूंग व सब्जी की खेती पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। वर्षा नहीं होने से खेतों की नमी भी सूख गयी है। खेतों की नमी सूखने से खरीफ की खेती के लिए खेतों को तैयार करने में किसान अक्षम साबित हो रहे हैं। किसान कृष्णा राउत,बच्चालाल सहनी,अनिल कुमार यादव आदि बताते हैं कि सूखे खेतों की जुताई नहीं हो पा रही है।
