सदर अस्पताल जमुई इन दिनों मौत का कारण बनता जा रहा है आए दिन प्रसूता की मौत हो रही है और विभाग मौन धारण कर बैठा हुआ है कई माताएं अपनी जान गवां चुकी है जबकि कई शिशु अनाथ हो चुका है फिर भी सरकार का ध्यान इस ओर नहीं है सरकार भले ही कह रही है कि सरकारी अस्पताल में हर तरह की सुविधाएं प्रदान की जा रही है लेकिन सुविधा के नाम पर बहुत बड़ा धोखा हो रहा है इसका खामियाजा गरीब वर्ग के लोग भुगत रहे हैं। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
जमुई जिले में भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूल संचालन के समय में बदलाव किया गया है विस्तार पूर्वक खबर सुनने के लिए ऑडियो क्लिक करें
जमुई जिले भर में भीषण गर्मी से लोग परेशान नजर आ रहे हैं खबर सुनने के लिए ऑडियो क्लिक करें
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
आज आपके क्षेत्र में कैसा गुजरा है दिन? क्या है सबसे अहम खबर? क्या है दिनभर की हलचल? जानने के लिए अभी करें क्लिक
गायत्री परिवार के 24 कुंडीय नवचेतना जागरण गायत्री महायज्ञ की शुरुआत सोमवार को गिद्धौर बाजार में निकले भव्य कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ विस्तार पूर्वक खबर सुनने के लिए ऑडियो क्लिक करें
बिहार राज्य के गिद्धौर से भीम राज मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि गिद्धौर थाना क्षेत्र के रतनपुर चौक पर स्थित एक दुकान का ताला तोड़कर अज्ञात चोरों ने चोरी की खबर सुनने के लिए ऑडियो क्लिक करें
Transcript Unavailable.
हिदू सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति का प्राचीनतम त्योहार सतुआनी किसानों के लिए वैशाख महीने में नए रबी फसलों की सौगात वाला त्योहार है। रबी फसल की कटाई एवं नई फसल आने की खुशी में किसान यह पर्व मनाते हैं। चैत्र मास की संक्रांति तिथि को मनाया जाने वाला पर्व सतुआनी आज शुक्रवार को जमुई जिले में श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। इस मौके पर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में घर की बुजुर्ग महिलाओं ने चना एवं जौ से तैयार सत्तू, आम की चटनी व आम का टिकोला, गुड़ भगवान को भोग लगाकर सपरिवार उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। सतुआनी पर्व को लोग विसुआ के नाम से भी जानते हैं। हिदू सनातन धर्म का पर्व सतुआनी पर स्नान एवं दान का महत्व है। वही मंदिर के पुजारी के अनुसार मेष संक्रांति में स्नान-दान का काफी महत्व है। इससे धन, सुख, ऐश्वर्य, शांति, निरोगता, बल, बुद्धि एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर सत्तू, आम, गुड़, घी, पंखा, मिट्टी के बर्तन, ठंडा जल, छाता, अन्न दान एवं पंचांग दान करने का विधान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुरूप संक्रांति तिथि को ही शिवलिग पर मिट्टी के घट (घड़ा) के माध्यम से निरंतर बूंद-बूंद जलाभिषेक की व्यवस्था की जाती है। जो एक माह तक चलता है। कथा पुराण के अनुसार वैशाख महीने की तपती धूप में शिव को तृप्त करने के लिए यह व्यवस्था की जाती है।
