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बिहार राज्य से मोबाइल वाणी के माध्यम से पूजा कुमारी बता रही हैं की अभी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ रहा है। तो जानना चाहती हैं की किसी को स्वस्थ रहने के लिए क्या करना चाहियें

बिहार राज्य से मोबाइल वाणी के माध्यम से सुमन बता रही हैं की इनके समूह में किसी बच्चे को लूह लग गया है। और चमकी बुखार हो गया है तो ये इलाज के लिए मदद चाहती हैं

गर्मी की छुट्टियों में सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए विशेष समर कैम्प चल रहा है। ग्रीष्मावकाश में आयोजित होने वाले इस कैंप में कक्षा 6 व 7 के विद्यार्थी पढ़ना व लिखना सिख रहे हैं। जिले के सभी मध्य विद्यालयों में समर कैम्प का आयोजन हो रहा है। सबसे अहम बात यह है कि इस समर कैम्प से स्कूलों के शिक्षकों को दूर रखा गया है। समर कैंप का आयोजन गांव टोला स्तर पर 1 से 30 जून तक किया जाना है। कैंप में चिह्नित विद्यार्थियों को प्रथम संस्था द्वारा प्रशिक्षित वॉलेंटियर के माध्यम से प्रतिदिन डेढ़ से दो घंटा की विशेष शिक्षा प्रदान की जा रही है।अपर मुख्य सचिव ने डीईओ व डीपीओ को इस संबंध में निर्देश दिया था। इसके लिए 20 मई तक वैसे कमजोर बच्चों की सूची मांगी गई थी। शैक्षणिक सत्र 2023-24 में मध्य विद्यालयों में कक्षा 6 व 7 में अध्ययनरत वैसे विद्यार्थी जो अपने बुनियादी पढ़ने व सरल गणित करने की दक्षता में अपेक्षाकृत रूप से कमजोर हैं, उनके लिए प्रथम संस्था के सहयोग से समर कैंप का आयोजन ग्रीष्मावकाश में करने का निर्णय लिया गया था।

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एक पिता की लड़ाई और संघर्ष ने असाध्य रोग से लड़ रहे सूबे के 243 बच्चों को पढ़ने का हक मिलने की राह खोल दी है। मांसपेशियों को बेहद कमजोर कर खड़े होने और चलने-फिरने तक में नाकाम कर देने वाले रोग डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित इन बच्चों को घर पर पढ़ाने की व्यवस्था की जाएगी। यह डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से जूझ रहे 12 वर्षीय बच्चे संस्कार के पिता संतोष कुमार की पहल से संभव हुआ है। संतोष ने ऐसे बच्चों को शिक्षा का अधिकार नहीं मिलने को लेकर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी और कोई व्यवस्था नहीं होने पर सवाल उठाए। इसके बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को इस रोग से पीड़ित बच्चों का ब्योरा जुटाकर शिक्षा का हक दिलाने के आदेश दिए हैं। पटना निवासी संतोष ने आरटीआई लगाई तो इन बच्चों के लिए पढ़ाई का कोई इंतजाम नहीं होने की बात सामने आई। सूबे में 243 बच्चों के डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के शिकार होने का पता चला। मामला केंद्र सरकार के संज्ञान में लाए जाने पर स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के अंडर सेक्रेटरी केसी वासुदेवन ने इसे लेकर निर्देश जारी किया है। इसके बाद सूबे में जिलावार ऐसे बच्चों की सूची बनाई गई। राज्य कार्यक्रम अधिकारी ने सभी जिलों से सूची में दर्ज बच्चों के बारे में जरूरी जानकारी भेजने का निर्देश दिया है। मुजफ्फरपुर में 11 और पटना में 40 से अधिक बच्चे इस घातक बीमारी से पीड़ित मिले हैं।

केंद्र सरकार की लेटलतीफ से परेशान नौवीं-दसवीं के पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग के छात्रों को राज्य सरकार ने अपने मद से छात्रवृत्ति देने की योजना को अंतिम रूप दे दिया। जल्द ही प्रदेश के राजकीय और राजकीयकृत माध्यमिक विद्यालयों के नौवीं-दसवीं के पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग के 12 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति की राशि दी जाएगी। शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। इस मद में 287 करोड़ रुपये स्वीकृत भी कर दिये गये हैं। पहली बार राज्य सरकार इस मद में सौ फीसदी राशि खर्च करेगी। हर एक विद्यार्थी के खाते में एकमुश्त 1800 रुपये का भुगतान होगा। 150 रुपये महीने के हिसाब से यह छात्रवृत्ति दी जाती है। इस योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कराने की कोशिश शिक्षा विभाग कर रहा है। विभाग इस पर शीघ्र मुख्यमंत्री की सहमति लेगा। इसके साथ ही राशि का भुगतान शुरू कर दिया जाएगा। मालूम हो कि केंद्र सरकार द्वारा राशि कम मिलने अथवा समय पर नहीं प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना’ का शुभारंभ किया है। इस योजना के तहत वर्ष 2022-23 शैक्षणिक सत्र से छात्रवृत्ति दी जानी है। इस संबंध में विभाग के पदाधिकारी बताते हैं कि केंद्र सरकार से राशि समय पर नहीं मिलने और कम देने के कारण जनवरी, 2022 में राज्य सरकार ने अपने कोष से पूरी राशि देने का फैसला किया। इसके बाद राज्य योजना मद से पैसे का इंतजाम किया गया। इस कारण मार्च, 2023 में राशि की स्वीकृति मिली। यही कारण है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उक्त छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति की राशि का भुगतान नहीं हो सका।

सूबे के स्कूलों में मानसिक दिव्यांगों की संख्या बढ़ रही है। पिछले दो वर्षों में मानसिक दिव्यांग बच्चों की संख्या लगभग दुगुनी हुई है। वर्ष 2021 में राज्यभर में जहां 25 हजार 207 मानसिक दिव्यांग बच्चे नामांकित थे, वहीं 2022 में इनकी संख्या 44 हजार 578 हो गई। हालांकि वर्ष 2019-2020 और 2020-2021 में कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल बंद के दौरान बच्चे चिह्नित नहीं किए गए। इधर, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की मानें तो मानसिक दिव्यांग बच्चे स्कूल तो जाते हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने और उनकी मानसिक स्तर को समझने के लिए कोई विशेष शिक्षक नहीं हैं। दूसरी तरफ समग्र शिक्षा के तहत स्कूलों में कुल 44578 मानसिक दिव्यांग बच्चों का नामांकन है और इनके इलाज के लिए कोई इंतजाम नहीं है। यही नहीं विशेष चिकत्सकों की कमी के कारण इनका दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूडीआईडी कार्ड भी नहीं बन रहा है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की मानें तो राज्य में कुछ विशेष चिकित्सकों को ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूडीआईडी कार्ड बनाने का अधिकार है। इसमें जेनरल सर्जन, आर्थोपेडिक, आई स्पेशलिस्ट, ईएनटी और मनोचिकित्सक शामिल हैं। ये सभी सरकारी होने चाहिए, लेकिन इनकी संख्या इतनी कम है कि सभी जिलों के स्कूलों में नामांकित बच्चों का कार्ड बनाने का काम भी पूरा नहीं हो पाता है।

बंजरिया पंडाल चौक पथ पर तीन जून की रात ढाई बजे यात्री बस पर सवार व्यवसायी से तीस लाख रुपये की लूट मामले में पुलिस ने बुधवार को 18.50 लाख रुपये बरामद कर लिया। लूट की राशि के साथ दो बदमाशों को भी दबोच लिया। बदमाशों के पास से तीन सेलफोन भी बरामद किया गया है। एसपी कांतेश कुमार मिश्र का कहना है कि गिरफ्तार बदमाशों में राकेश झा आजीवन कारावास की सजा काट चुका है। गिरफ्तार बदमाशों में सुगौली थाना क्षेत्र के फुलवरिया गांव के राकेश झा व प्रशांत सिंह शामिल है।