याश चक्रवाती तूफान के वजह से मोहिउद्दीन नगर में जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है, लगभग 48 घंटों से बिजली गुल है, सड़कों पर जगह-जगह पानी लगा हुआ है कई गरीबों के घर और करकट तेज हवा के वजह से गिर गए हैं।
रोसड़ा विधायक माननीय वीरेंद्र पासवान ने सदर अस्पताल में बन रहे कार्यो का लिया जायजा। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
छात्र राजद समस्तीपुर द्वारा आज छठे दिन लगातार "कोई भूखा ना रहे" अभियान के तहत "लालू की रसोई" जारी रही l आज शुक्रवार को समस्तीपुर प्रखंड के जितवारपुर कॉलेज स्थित कोविड केयर सेन्टर के मरीज के परिजनों तथा स्टेशन चौक पर गरीब व जरूरतमंदो के बीच अंडा-चावल -अचार का लगभग 288 पैकेट भोजन वितरित किया गया l विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
विभूतिपुर हृदयविदारक घटना की त्वरित जांच कर आरोपियों की गिरफ्तारी, सरकारी खर्चे पर महिला का ईलाज, परिजनों की सुरक्षा, 10 लाख रूपये मुआवजा देने की मांग को लेकर शुक्रवार को मोतीपुर वार्ड-12 में ऐपवा के बैनर तले सुनीता देवी, बेबी देवी, शिव देवी, रामदुलारी देवी, शोभा देवी, कृष्णा देवी, कविता देवी के नेतृत्व में धरना दिया गया। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
बिहार राज्य के समस्तीपुर जिले से कौशल कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से यह कहते हैं कि उन्होंने कोरोना टीकाकरण का पंजीयन करवाया था। लेकिन अभी तक उन्हें टीकाकरण की कोई भी सुविधा नहीं मिली है। जिससे वह मोबाइल वाणी से मदद मांग रहे हैं
माध्यमिक शिक्षा को प्राथमिक शिक्षा व उच्च शिक्षा के बीच की कड़ी माना जाता है। प्राथमिक में सीखे गए ज्ञान को माध्यमिक विद्यालयों में ही सही आधार मिलता है तो बच्चे उच्च शिक्षा के लिए बेहतर रूप से तैयार हो पाएंगे। यदि माध्यमिक स्तर पर दसवीं व बारहवी स्तर पर यदि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न मिल सके तो छात्रों के पास मूलभूत ज्ञान की कमी हो जाती है। राज्य सरकारें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था हेतु संकल्पित तो दिखती हैं, प्रत्येक पंचायत में हाई स्कूल खोले गए हाई स्कूलों को प्लस टू में अपग्रेड किया, दूर से आने वाले बच्चों के लिए साइकिल दी गयी इन सभी प्रयासों से बच्चे का नामांकन तो हुआ लेकिन धरातल पर बच्चों को सबकुछ मिलते हुए कुछ न मिला तो वे रह गए छात्र -शिक्षक के अनुपात में योग्य शिक्षक। स्कूलों को तो उत्क्रमित किया गया मध्य विद्यालयों को उच्च विद्यालयों में , उच्च-विद्यालयों को उच्चतर विद्यालयों में लेकिन विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति को पूरी करना चुनौती बनी रही। राज्य में छठे चरण में तीस हजार माध्यमिक शिक्षकों की प्रक्रिया शुरू तो वर्षों पहले शुरू हुई लेकिन आज तक मझदार में ही है। दूसरी बात यह कि इसमें एसटीईटी 2012 उतीर्ण अभ्यर्थी को ही हिस्सा लेना था । अधिकांश विषयों में इनकी संख्या नाम मात्र की थी जिससे आवेदन भी बहुत कम आये।यदि यह भर्ती हो भी जाती है मुख्य विषयों के पदों का रिक्त रहना तय ही है। शिक्षा विभाग द्वारा माध्यमिक व प्लस टू स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए एसटीईटी परीक्षा 2019 का आयोजन की सहमति बनी । विज्ञापन में इसे एक पात्रता सह भर्ती परीक्षा का प्रारूप दिया गया जिसमें विषय के रिक्तियों के अनुसार कोटिवार श्रेणी में घटते क्रम में रिक्ति के बराबर अभ्यर्थियों को उतीर्ण करना था। परीक्षा होने के बाद एन रिजल्ट के वक़्त इस परीक्षा को अनियमितता का हवाला देते हुए रद्द कर दिया जाता है , फिर ऑनलाइन परीक्षा होती है लंबे इंतजार के बाद रिजल्ट के समय फिर पता चलता है कि माननीय उच्च न्यायालय के आलोक एक सौ छह परीक्षार्थियों के पुनः परीक्षा ली जाय। अब इस परीक्षा में तीन विषय के अभ्यर्थियों को शामिल होना था तो बोर्ड ने मार्च 2021 में तीन विषयो विज्ञान , संस्कृत व उर्दू को छोड़कर सभी विषयों का परीक्षाफल प्रकाशित कर दिया। और शेष विषय का परीक्षा परिणाम एक सौ छह परीक्षार्थियों के अप्रैल में परीक्षा लेकर मई के प्रथम सप्ताह में रिजल्ट जारी करने की आधिकारिक बातें कही गयी। परीक्षा तो अप्रैल में हो गयी किंतु मई पहले सप्ताह में आने वाला परिणाम अभी तक लंबित ही है। यहां बताते चले कि प्लस टू स्कूलों में लगभग बारह हजार रिक्तियों के मुकाबले लगभग आठ हज़ार पाँच सौ एवं हाई स्कूलों के रिक्ति में भी जिन विषयों का रिजल्ट आया है उनमें लगभग सोलह हजार अभ्यर्थी उतीर्ण हुए। अब इस परिणाम के मायने यह हैं कि प्लस टू विद्यालयों में अभी भी सीट भरने की उम्मीद नहीं है। माध्यमिक में यदि सरकार व विभाग तत्परता के साथ बचें तीन विषयों का रिजल्ट देकर बहाली प्रक्रिया शुरू करती है तो कोविड के बाद स्कूलों के खुलने से पहले विद्यालयों को शिक्षक मिल सकेंगे। इस परीक्षा के सभी अभ्यर्थी योग्य ,प्रशिक्षित, व कुशल होंगे क्योंकि बिहार में पहली बार माध्यमिक पात्रता परीक्षा में सिर्फ बीएड प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों को ही शामिल किया गया था। इसमें मात्र सोलह प्रतिशत अभ्यर्थियों का ही औसतन रिजल्ट हो पाया। लेकिन इन सभी के बीच बड़ी बात यह आती है कि आखिर विद्यालयों को कब मिलेंगे ये शिक्षक! दूसरी ओर एसटीईटी परीक्षा 2019 उतीर्ण अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की आस में वर्षों इंतज़ार किया है । अभ्यर्थियों की माने तो बिहार में पिछले पांच - छः वर्षों से कोई भी स्थायी बहाली हुई ही नहीं है। यहां पूरे देश मे सबसे अधिक शिक्षकों के पद लगभग 3 लाख से अधिक रिक्त हैं। इसमें माध्यमिक स्कूलों में छात्र शिक्षक अनुपात और भी दयनीय है, शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर साफ असर पड़ा है, बाँकी किसी तरह कोचिंग करके रिजल्ट बच्चे प्राप्त करते थे जो कि पिछले दो सत्रों में कोविड-19 महामारी में बन्द ही हैं।ऐसे में अब इन बच्चों के भविष्य की जिम्मेवारी कौन तय करेगा। शिक्षक अभ्यर्थियों की प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक नियोजन कि कहानी काफी हैरान करती हैं, दो साल पहले बहाली निकलती है लेकिन हर बार किसी न किसी बजह से आज तक अपने अंजाम तक न पहुंच पाई है और न जाने कब तक पूर्ण होगी। इतने बड़े बेरोजगारी व महामारी आपदा में इन अभ्यर्थियों का दैनिक जीवन काफी प्रभावित हुआ है। कई अभ्यर्थी इस कोरोना काल मे अकाल मृत्यु को प्राप्त हो गए। ऐसे में अब कोरोना की रफ्तार धीमी हो रही है तो राज्य सरकारों को इन अभ्यर्थियों की सुधि लेनी चाहिए । प्राथमिक की बहाली पूरी करने में सरकार द्वारा कुछ तेजी अति जा रही है । इसी प्रकार शिक्षा विभाग आगे एसटीईटी उतीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति माध्यमिक विद्यालयों में शीघ्र कैसे हो इसपर रोडमैप तेजी से तैयार करें , साथ ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से अभ्यर्थियों ने मार्मिक अपील की है कि मात्र 106 अभ्यर्थियों के रिजल्ट के साथ तीन विषयो के सम्पूर्ण रिजल्ट प्रभावित हो रहें हैं तो इसपर शीघ्रता से अमल करते हुए एसटीईटी के बचें विषयों का रिजल्ट जारी करें ताकि आगे हाई स्कूलों व प्लस टू स्कूलों को छात्रों को 37000 योग्य विषयवार शिक्षक मिल सकें। यदि ये नियोजन शीघ्र पूरी हो जाती है तो कोविड बंदी से बेपटरी हुई शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर ला जाने में ये शिक्षक अपने राज्य सरकार व शिक्षा विभाग के साथ मिलकर बिहार की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ करने में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं।। पूरी खबर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
यास तूफान व बारिश ने मचाया अपना आतंक ,कई गरीबों का झुग्गी झोपड़ी तूफानों में उड़ गया,वही पेड़ पौधे टूट कर जमीन पर गिर गया
भारी बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त मवेशी से लेकर सब्जी किसानों को अधिक कठिनाई हो रहा है भिंडी की फसलें खराब हो रही है वही मक्के अभी भी किसानों के खेत में पड़ा हुआ है
जाप सुप्रीमो पप्पू यादव की रिहाई को लेकर समस्तीपुर में जाप के जिलाध्यक्ष मनीष यादव के नेतृत्व में युवाओं ने उनको जल्द रिहाई को को लेकर प्रदर्शन किया
# महामारी के समय में कोविड़ हेल्प लाइन सेंटर कोरोना एवं सामान्य बीमारियों के मरीज के लिए बना सहारा- सुनील कुमार #कोविड़ हेल्पलाइन सेंटर का एक महीना हुआ पूरा पीड़ित परिवार तक सहायता जारी- बंदना सिंह # प्रत्येक दिन डॉक्टरों की सलाह, ऑक्सीजन सिलेंडर एवं मेडिसिन के लिए लोग करते हैं संपर्क- सुरेन्द्र प्रसाद सिंह आइसा, इनौस, ऐपवा एवं माले द्वारा शहर के विवेक-विहार मुहल्ला में पिछले 26 अप्रैल से शुरू जिला स्तरीय कोविड़ हेल्पलाइन सेंटर का पीड़ितों की लगातार सेवा कर मिशाल कायम करते हुए गुरूवार को एक महीना पूरा हुआ। कोविड़ हेल्पलाइन सेंटर के संचालक सदस्य आइसा जिला सचिव सुनील कुमार ने बताया कि कोविड़ सेंटर द्वारा जारी सेवा की सराहना लोगों एवं बुद्धिजीवियों में सिर्फ जिला, राज्य ही नहीं बल्कि संपूर्ण देश में चर्चा का विषय है। उन्होंने बताया कि जब कोविड़ के डर से लोग एक दूसरे से दूरी बना रहे थे, शहर के अनेकानेक निजी डॉक्टर अपना क्लिनिक बंद कर दिए थे। कोविड एवं सामान्य बीमारियों के मरीज इधर-उधर भटक कर दर- दर की ठोकरें खा रहे थे। कोविड से अधिक अन्य गंभीर बीमारी के रोगी चिकित्सा के आभाव में मर रहे थे! कोरोना महामारी का दूसरा स्टेज चरम पर था। निजी अस्पताल के संचालक और डॉक्टर रोगी को सरकारी अस्पताल में जाकर इलाज कराने की सलाह दे रहे थे जबकि सामान्य दिनों में सरकारी अस्पताल के मरीजों को बिचौलियों के माध्यम से अपने निजी क्लिनिक में बुला लिए जाते थे। ऐसे परिस्थितियों को देखते हुए आइसा, इनौस, ऐपवा एवं माले ने आम जनों के सहायता के लिए सबसे पहले शहर में जिला स्तरीय कोविड सेंटर खोल कर लोगों की इलाज के लिए शहर के निजी डॉक्टरों से हेल्पलाइन सेंटर के माध्यम से संपर्क किया गया और लोगों को तत्काल फोन के माध्यम से ही ट्रीटमेंट कराने में सहयोग करते रहे और जरूरतमंद लोगों को हेल्प लाइन सेंटर के सदस्य लोकेश राज, दीपक यादव, दीपक यदुवंशी, वंदना सिंह के द्वारा मेडिसिन, ऑक्सीजन सिलेंडर एवं राशन घर तक पहुंचाते रहे और अभी भी जरूरतमंदों का सहयोग जारी है और सेंटर ने अपने शानदार कार्य का आज इसका एक महीना लगातार पूरा कर लियाl वहीं हेल्प लाइन सेंटर के सदस्य सह माले जिला कमेटी सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि आपदा में अवसर समझकर निजी अस्पतालों, दवा दुकानदार एवं जांच घर द्वारा सामान्य एवं कोरोना मरीजों से इलाज एवं जांच के नाम पर भारी लूट मचाए हुए हैं। इसके खिलाफ हेल्पलाइन सेंटर के सदस्य इलाजरत परिजन के साथ मजबूती से खड़ा है और कई इलाजरत परिजनों को नि:शुल्क इलाज कराने में भी हेल्पलाइन सेंटर सहयोग किया है। माले नेता ने बताया कि माले सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी ही नहीं बल्कि जन सारोकार से जुड़ी पार्टी है. अपने स्थापना काल से जनता की विपत्ति में हमेशा खड़ा रही है और रहेगी. उन्होंने लोगों से अपील किया कि जनाकांक्षा के प्रति समर्पित पार्टी माले को तन मन धन से सहयोग देकर मजबूत करें ताकि और मजबूती से जनसेवा के लिए मैदान में उतरा जाए.
