माध्यमिक शिक्षा को प्राथमिक शिक्षा व उच्च शिक्षा के बीच की कड़ी माना जाता है। प्राथमिक में सीखे गए ज्ञान को माध्यमिक विद्यालयों में ही सही आधार मिलता है तो बच्चे उच्च शिक्षा के लिए बेहतर रूप से तैयार हो पाएंगे। यदि माध्यमिक स्तर पर दसवीं व बारहवी स्तर पर यदि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न मिल सके तो छात्रों के पास मूलभूत ज्ञान की कमी हो जाती है। राज्य सरकारें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था हेतु संकल्पित तो दिखती हैं, प्रत्येक पंचायत में हाई स्कूल खोले गए हाई स्कूलों को प्लस टू में अपग्रेड किया, दूर से आने वाले बच्चों के लिए साइकिल दी गयी इन सभी प्रयासों से बच्चे का नामांकन तो हुआ लेकिन धरातल पर बच्चों को सबकुछ मिलते हुए कुछ न मिला तो वे रह गए छात्र -शिक्षक के अनुपात में योग्य शिक्षक। स्कूलों को तो उत्क्रमित किया गया मध्य विद्यालयों को उच्च विद्यालयों में , उच्च-विद्यालयों को उच्चतर विद्यालयों में लेकिन विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति को पूरी करना चुनौती बनी रही। राज्य में छठे चरण में तीस हजार माध्यमिक शिक्षकों की प्रक्रिया शुरू तो वर्षों पहले शुरू हुई लेकिन आज तक मझदार में ही है। दूसरी बात यह कि इसमें एसटीईटी 2012 उतीर्ण अभ्यर्थी को ही हिस्सा लेना था । अधिकांश विषयों में इनकी संख्या नाम मात्र की थी जिससे आवेदन भी बहुत कम आये।यदि यह भर्ती हो भी जाती है मुख्य विषयों के पदों का रिक्त रहना तय ही है। शिक्षा विभाग द्वारा माध्यमिक व प्लस टू स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए एसटीईटी परीक्षा 2019 का आयोजन की सहमति बनी । विज्ञापन में इसे एक पात्रता सह भर्ती परीक्षा का प्रारूप दिया गया जिसमें विषय के रिक्तियों के अनुसार कोटिवार श्रेणी में घटते क्रम में रिक्ति के बराबर अभ्यर्थियों को उतीर्ण करना था। परीक्षा होने के बाद एन रिजल्ट के वक़्त इस परीक्षा को अनियमितता का हवाला देते हुए रद्द कर दिया जाता है , फिर ऑनलाइन परीक्षा होती है लंबे इंतजार के बाद रिजल्ट के समय फिर पता चलता है कि माननीय उच्च न्यायालय के आलोक एक सौ छह परीक्षार्थियों के पुनः परीक्षा ली जाय। अब इस परीक्षा में तीन विषय के अभ्यर्थियों को शामिल होना था तो बोर्ड ने मार्च 2021 में तीन विषयो विज्ञान , संस्कृत व उर्दू को छोड़कर सभी विषयों का परीक्षाफल प्रकाशित कर दिया। और शेष विषय का परीक्षा परिणाम एक सौ छह परीक्षार्थियों के अप्रैल में परीक्षा लेकर मई के प्रथम सप्ताह में रिजल्ट जारी करने की आधिकारिक बातें कही गयी। परीक्षा तो अप्रैल में हो गयी किंतु मई पहले सप्ताह में आने वाला परिणाम अभी तक लंबित ही है। यहां बताते चले कि प्लस टू स्कूलों में लगभग बारह हजार रिक्तियों के मुकाबले लगभग आठ हज़ार पाँच सौ एवं हाई स्कूलों के रिक्ति में भी जिन विषयों का रिजल्ट आया है उनमें लगभग सोलह हजार अभ्यर्थी उतीर्ण हुए। अब इस परिणाम के मायने यह हैं कि प्लस टू विद्यालयों में अभी भी सीट भरने की उम्मीद नहीं है। माध्यमिक में यदि सरकार व विभाग तत्परता के साथ बचें तीन विषयों का रिजल्ट देकर बहाली प्रक्रिया शुरू करती है तो कोविड के बाद स्कूलों के खुलने से पहले विद्यालयों को शिक्षक मिल सकेंगे। इस परीक्षा के सभी अभ्यर्थी योग्य ,प्रशिक्षित, व कुशल होंगे क्योंकि बिहार में पहली बार माध्यमिक पात्रता परीक्षा में सिर्फ बीएड प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों को ही शामिल किया गया था। इसमें मात्र सोलह प्रतिशत अभ्यर्थियों का ही औसतन रिजल्ट हो पाया। लेकिन इन सभी के बीच बड़ी बात यह आती है कि आखिर विद्यालयों को कब मिलेंगे ये शिक्षक! दूसरी ओर एसटीईटी परीक्षा 2019 उतीर्ण अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की आस में वर्षों इंतज़ार किया है । अभ्यर्थियों की माने तो बिहार में पिछले पांच - छः वर्षों से कोई भी स्थायी बहाली हुई ही नहीं है। यहां पूरे देश मे सबसे अधिक शिक्षकों के पद लगभग 3 लाख से अधिक रिक्त हैं। इसमें माध्यमिक स्कूलों में छात्र शिक्षक अनुपात और भी दयनीय है, शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर साफ असर पड़ा है, बाँकी किसी तरह कोचिंग करके रिजल्ट बच्चे प्राप्त करते थे जो कि पिछले दो सत्रों में कोविड-19 महामारी में बन्द ही हैं।ऐसे में अब इन बच्चों के भविष्य की जिम्मेवारी कौन तय करेगा। शिक्षक अभ्यर्थियों की प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक नियोजन कि कहानी काफी हैरान करती हैं, दो साल पहले बहाली निकलती है लेकिन हर बार किसी न किसी बजह से आज तक अपने अंजाम तक न पहुंच पाई है और न जाने कब तक पूर्ण होगी। इतने बड़े बेरोजगारी व महामारी आपदा में इन अभ्यर्थियों का दैनिक जीवन काफी प्रभावित हुआ है। कई अभ्यर्थी इस कोरोना काल मे अकाल मृत्यु को प्राप्त हो गए। ऐसे में अब कोरोना की रफ्तार धीमी हो रही है तो राज्य सरकारों को इन अभ्यर्थियों की सुधि लेनी चाहिए । प्राथमिक की बहाली पूरी करने में सरकार द्वारा कुछ तेजी अति जा रही है । इसी प्रकार शिक्षा विभाग आगे एसटीईटी उतीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति माध्यमिक विद्यालयों में शीघ्र कैसे हो इसपर रोडमैप तेजी से तैयार करें , साथ ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से अभ्यर्थियों ने मार्मिक अपील की है कि मात्र 106 अभ्यर्थियों के रिजल्ट के साथ तीन विषयो के सम्पूर्ण रिजल्ट प्रभावित हो रहें हैं तो इसपर शीघ्रता से अमल करते हुए एसटीईटी के बचें विषयों का रिजल्ट जारी करें ताकि आगे हाई स्कूलों व प्लस टू स्कूलों को छात्रों को 37000 योग्य विषयवार शिक्षक मिल सकें। यदि ये नियोजन शीघ्र पूरी हो जाती है तो कोविड बंदी से बेपटरी हुई शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर ला जाने में ये शिक्षक अपने राज्य सरकार व शिक्षा विभाग के साथ मिलकर बिहार की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ करने में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं।। पूरी खबर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
