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दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
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जिले के खैरा प्रखंड के अरुणमा बांक पंचायत के पंचायत सरकार भवन में सोमवार को ग्राम सभा का आयोजन किया गया ग्राम सभा की अध्यक्षता पंचायत की मुखिया श्रीमती फुलवंती देवी ने किया। मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए मुखिया फुलवंती देवी ने कहा कि पंचायत के विकास के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है साथ ही पंचायत के विकास से जुड़ी कई योजनाओं के क्रियान्वयन करने की आवश्यकता है।
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सोनू कुमार, उम्र 30 वर्ष, पिन कोड 811305
सोनू कुमार, उम्र 30 वर्ष, पिन कोड 811305
प्रिंस कुमार, उम्र 18 वर्ष, पिन कोड 811305
प्रिंस कुमार, उम्र 18 वर्ष, पिन कोड 811305
प्रभात तिवारी, उम्र 30 वर्ष, पिन कोड 811305
