भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.
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देवेंद्र कुमार गुप्ता मोबाइल वाणी के माध्यम से जानना चाहते हैं कि इलाज के बाद ईएसआई का पैसा कितने दिनों में खाते में आ जाता है और इसके लिए क्या करना पड़ता है ?
अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
जानना चाहते है की तालीस घंटे के बाद जिसको ओवर टाइम करवाया जाएगा, वो कौन कौन से मजदूर जैसे खेतिहर मजदूर मंंदेजा मजदूर और य फैक्ट्री मजदूर,तो कौन से मजदूर जो है हमारे श्रमिक के श्रेणी में आ सकते हैं कि जिन्हें अड़तालीस घंटे से ज्यादा ड्यूटी करना पड़े तो उनको बेसिक बोनस राशि दिया जाए?
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ई-श्रम कार्ड जो बने हैं इसका क्या लाभ है ?
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मनरेगा योजना का लाभ कैसे किया जाए?
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